बंगाल चुनाव 2026: काउंटिंग से पहले भवानीपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा, ममता बनर्जी ने खुद संभाला मोर्चा, पढ़ें बवाल की इनसाइड स्टोरी

Published by :Mithilesh Jha
Published at :03 May 2026 6:00 PM (IST)
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बंगाल चुनाव 2026: काउंटिंग से पहले भवानीपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा, ममता बनर्जी ने खुद संभाला मोर्चा, पढ़ें बवाल की इनसाइड स्टोरी
भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के स्ट्रांग रूम के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी.

Bhabanipur Counting Centre Protest: भवानीपुर मतगणना केंद्र पर भाजपा के झंडे वाली कारों के प्रवेश को लेकर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए मोर्चा संभाल लिया. चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज.

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Bhabanipur Counting Centre Protest: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से एक दिन पहले राज्य की सियासत गरमायी हुई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में रविवार को उस वक्त भारी हंगामा हुआ, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने मतगणना केंद्र के भीतर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के झंडे वाली दो संदिग्ध कारों के प्रवेश का आरोप लगाया. शेखावत मेमोरियल गर्ल्स स्कूल के स्ट्रांग रूम के बाहर टीएमसी समर्थकों ने जमकर प्रदर्शन किया और सुरक्षा में चूक का दावा करते हुए केंद्रीय बलों को कटघरे में खड़ा कर दिया.

आखिर क्या हुआ रविवार सुबह?

मतगणना केंद्र से महज 100 मीटर की दूरी पर डेरा डाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं ने सुबह करीब 10 बजे शोर मचाना शुरू कर दिया. कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब सीएपीएफ (CAPF) के जवान बिना वैध आईडी कार्ड के किसी को अंदर नहीं जाने दे रहे, तो भाजपा के झंडे लगी 2 गाड़ियां स्ट्रांग रूम के इतने करीब कैसे पहुंच गयीं. पुलिस ने गाड़ियों को हटाने का वादा किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे काफी देर तक वहीं खड़ी रहीं.

ECI की सफाई, कार में नहीं था कुछ आपत्तिजनक

निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले को शांत करते हुए कहा कि कारें हरीश मुखर्जी रोड से गुजर रही थीं. सुरक्षा बलों ने जांच की और कुछ भी आपत्तिजनक न मिलने पर उन्हें जाने दिया गया.

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ममता बनर्जी का आधी रात वाला धरना

यह तनाव तब और बढ़ गया, जब खुद ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार रात को इसी मतगणना केंद्र के सामने 4 घंटे तक धरना दिया था. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि स्ट्रांग रूम में अनधिकृत लोग घुसने की कोशिश कर रहे हैं. ममता बनर्जी कई बार सार्वजनिक मंचों से ‘ईवीएम से छेड़छाड़’ और ‘मतगणना में गड़बड़ी’ की आशंका जता चुकी हैं.

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सिर्फ भवानीपुर नहीं, राज्यभर में फैला संदेह का जाल

टीएमसी ने स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर कई अन्य जिलों में भी मोर्चा खोल रखा है. टीएमसी उम्मीदवार कुणाल घोष और डॉ शशि पांजा ने इंडोर स्टेडियम में डाक मतपत्रों (Postal Ballots) की अनधिकृत छंटाई का आरोप लगाते हुए धरना दिया.

Bhabanipur Counting Centre Protest: हावड़ा, आसनसोल और बारासत में भी विरोध

हावड़ा में स्ट्रॉन्ग रूम के पास लोक निर्माण विभाग (PWD) के मरम्मत कार्य का विरोध हुआ, जिसके बाद चुनाव आयोग को काम रुकवाना पड़ा. आसनसोल और बारासात जिले में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि सीसीटीवी (CCTV) कैमरे कई मिनट तक बंद रहे. हालांकि आयोग ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया.

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बीजेपी का पलटवार- हार से डर गयी टीएमसी

भाजपा प्रवक्ता सजल घोष ने टीएमसी के इन आरोपों को हास्यास्पद बताया. उन्होंने कहा कि जो पार्टी हमेशा बल प्रयोग से चुनाव जीतती आयी है, वह अब बेबुनियाद आरोप लगा रही है. घोष ने पूछा- क्या ममता बनर्जी हार के डर से ये सब कर रही हैं?

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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