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बंगाल में वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच बढ़ी दरार, माकपा नेता सलीम ने कांग्रेस अध्यक्ष को बताया ममता का करीबी

Updated at : 30 Jan 2026 8:40 AM (IST)
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बंगाल में वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच बढ़ी दरार, माकपा नेता सलीम ने कांग्रेस अध्यक्ष को बताया ममता का करीबी

Bengal Election: बंगाल में अधीर गुट वामदलों से गठबंधन के पक्ष में हैं, वहीं सुभंकर गुट 'एकला चलो' नीति का समर्थन कर रहे हैं. हालांकि पार्टी के भीतर इस बारे में काफी चर्चा हुई, लेकिन आधिकारिक तौर पर कुछ भी घोषित नहीं किया गया. अब, सलीम का ताजा बयान गठबंधन को और कमजोर कर सकता है.

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Bengal Election: कोलकाता: बंगाल में तीसरे मोर्चे के घटक दलों में मतभेद बढ़ता जा रहा है. बंगाल में वाम मोर्चा इस बार कांग्रेस का साथ छोड़ सकता है. तृणमूल और भाजपा से एकजुट होकर लड़ने की बात करनेवाली माकपा की ओर से गठबंधन को लेकर बड़ा बयान आया है. हुमांयू कबीर से मुलाकात के बाद माकपा नेता सलीम ने कांग्रेस को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने कांग्रेस पर निर्णय नहीं लेने का आरोप लगाया है. सलीम ने गठबंधन टूटने के संकेत देते हुए यहां तक कहा है कि वाम मोर्चा अब और इंतजार नहीं करेगा. दो दिन पहले ही हुमांयू कबीर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि उनकी इच्छा कांग्रेस से गठबंधन की नहीं है, वो इस मामले में केवल वाम मोर्चा के संपर्क में है. ऐसे में लग रहा है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अलग-थलग हो जायेगी.

माकपा नेता का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर बड़ा आरोप

बंगाल में गठबंधन को लेकर सीपीएम के राज्य सचिव सलीम ने बंगाल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाया है. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष की अनिर्णयता पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सुभंकर को तृणमूल के प्रति अधिक सहानुभूति है. सलीम ने कहा- मैं किसी को पीछे नहीं छोड़ूंगा, मैं किसी को रोक नहीं पाऊंगा. किसे गठबंधन में रहना है किसे बाहर जाना है, वो खुद फैसला करे. कांग्रेस को फैसला लेना होगा. वाम मोर्चा लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकता. सलीम ने कहा कि जब राजनीतिक मंच पर किसी के साथ गठबंधन बनता है, तो यह तभी बनता है जब उनके साथ अच्छे संबंध हों. आज के हालात में हमारा गठबंधन कैसे संभव है.

माकपा और कांग्रेस में नहीं बैठ रहा तालमेल

कांग्रेस की बंगाल नीति पर सवाल उठाते हुए सलीम कहते हैं- जब अधीर चौधरी कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब वाम मोर्चा के साथ सीटों का समझौता था. अब जो अध्यक्ष बने हैं उनके साथ तालमेल नहीं बैठ पा रहा है. कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष सुभंकर बाबू तृणमूल के प्रति थोड़ी अधिक सहानुभूति रखते प्रतीत होते हैं. वह खुद कोई फैसला नहीं ले सकते. वह एआईसीसी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. इसके बाद सलीम ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा-हमने चुनाव प्रचार का काम शुरू कर दिया है. कांग्रेस को यह तय करना होगा कि वे भाजपा, तृणमूल या वामपंथी दलों में से किसके साथ जाएंगे. हम चाहते हैं कि भाजपा के तृणमूल विरोधी सभी लोग एकजुट हों.

अकेले लड़ने के मूड में प्रदेश कांग्रेस

जानकार बताते हैं कि बंगाल में अधीर गुट वामदलों से गठबंधन के पक्ष में हैं, वहीं सुभंकर गुट ‘एकला चलो’ नीति का समर्थन कर रहे हैं. हालांकि पार्टी के भीतर इस बारे में काफी चर्चा हुई, लेकिन आधिकारिक तौर पर कुछ भी घोषित नहीं किया गया. अब, सलीम का ताजा बयान गठबंधन को और कमजोर कर सकता है. सलीम कहते हैं-अगर सुभंकर बाबू इसे नहीं चाहते, अगर अधीर बाबू इसे चाहते हैं, तो यह उनकी पार्टी का मामला है. हमने कहा कि हमें पहले अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी कि हम भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ हैं. सुभंकर बाबू को अभी भी यह बात समझ नहीं आई है, वे इस बात पर विचार कर रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के साथ जाना फायदेमंद होगा या भाजपा के साथ या वामपंथी दलों के साथ. राजनीति इस तरह से काम नहीं करती.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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