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सरकारी अस्पतालों में ''''निम्न गुणवत्ता'''' वाले कैथेटर की आपूर्ति का आरोप

Updated at : 28 Nov 2024 2:00 AM (IST)
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सरकारी अस्पतालों में ''''निम्न गुणवत्ता'''' वाले कैथेटर की आपूर्ति का आरोप

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कई सरकारी अस्पतालों में कथित रूप से कम गुणवत्ता वाले और स्थानीय रूप से निर्मित कैथेटर की उच्च कीमत पर आपूर्ति मामले की जांच शुरू की है

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राज्य स्वास्थ्य विभाग ने दिये जांच के आदेश

संवाददाता, कोलकाता

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कई सरकारी अस्पतालों में कथित रूप से कम गुणवत्ता वाले और स्थानीय रूप से निर्मित कैथेटर की उच्च कीमत पर आपूर्ति मामले की जांच शुरू की है, जिससे इन सुविधाओं में इलाज करा रहे मरीजों की जान को खतरा है. बताया जा रहा है कि इस तरह के केंद्रीय शिरापरक कैथेटर (सीवीसी) कथित रूप से राज्य के कम से कम पांच मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को आपूर्ति किये गये थे, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं. वितरण कंपनी, जिस पर सरकारी अस्पतालों को इन कैथेटर की आपूर्ति करने का आरोप है, ने गलती स्वीकार की, लेकिन अपने कर्मचारियों पर दोष मढ़ा. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया : हमने कुछ समय पहले स्टॉक की जांच शुरू की और मेरे अस्पताल के स्टोर में ये स्थानीय रूप से निर्मित सीवीसी पाये गये. ये कैथेटर राज्य द्वारा आवंटित किये गये कैथेटर की तुलना में कम गुणवत्ता के हैं. हमने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अन्य अस्पतालों के स्टोर में भी कम गुणवत्ता वाले कैथेटर पाये गये, जो घोटाले में अंदरूनी लोगों की संभावित संलिप्तता को इंगित करता है. उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार महीनों से उत्तर कोलकाता के हाथीबागान इलाके में एक वितरक द्वारा निम्न गुणवत्ता वाले सीवीसी की आपूर्ति की जा रही थी.

अधिकारी ने कहा : इस तरह के स्थानीय सीवीसी की कीमत करीब 1,500 रुपये है, लेकिन वितरक ने प्रत्येक डिवाइस के लिए 4,177 रुपये लिये हैं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा : सभी इकाइयों का परीक्षण किया जायेगा और यह पता लगाने के लिए उचित जांच की जा रही है कि इन आपूर्तियों से किसे लाभ हुआ. वितरण कंपनी ने घटिया गुणवत्ता वाले कैथेटर की आपूर्ति के लिए अपने कर्मचारियों को दोषी ठहराया. मैं कुछ महीनों से बीमार था. संगठन के कुछ कर्मचारियों ने यह गलती की. वितरण कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि हम अस्पतालों को दी गयी सभी इकाइयों को वापस ले रहे हैं. यह सब गलतफहमी का मामला है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज करायी गयी है. यह पूछे जाने पर कि इस तरह की घटिया गुणवत्ता वाली सीवीसी के इस्तेमाल से कितने मरीज प्रभावित हुए, अधिकारी ने कहा : जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जायेगी.

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, अस्पतालों के उपकरण प्राप्त करने वाले विभागों के कुछ कर्मचारी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कुछ स्थानीय अधिकारी कथित अनियमितताओं में शामिल हो सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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