नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस की कवायद फेल, विपक्षी एकता में पड़ी दरार

Updated at : 27 Dec 2016 1:37 AM (IST)
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नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस की कवायद फेल, विपक्षी एकता में पड़ी दरार

कोलकाता. नोटबंदी के बाद पुराने 500-1000 रुपये के नोटों को बदलने के लिए मोदी ने 30 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया है. उनके इस अल्टीमेटम के शेष होने के तीन दिन पहले मंगलवार को कांग्रेस ने नोटबंदी के मुद्दे पर अपनी भूमिका तय करने के लिए दिल्ली में विपक्षी पार्टियों की एक बैठक बुलायी है. […]

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कोलकाता. नोटबंदी के बाद पुराने 500-1000 रुपये के नोटों को बदलने के लिए मोदी ने 30 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया है. उनके इस अल्टीमेटम के शेष होने के तीन दिन पहले मंगलवार को कांग्रेस ने नोटबंदी के मुद्दे पर अपनी भूमिका तय करने के लिए दिल्ली में विपक्षी पार्टियों की एक बैठक बुलायी है. इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए कांग्रेस ने माकपा और तृणमूल कांग्रेस सहित देश के 16 विपक्षी दलों को आमंत्रित किया है, लेकिन माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने यह साफ कर दिया है कि इस संवाददाता सम्मेलन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हिस्सा नहीं ले रही है.
जानकारों के अनुसार, माकपा के इस फैसले से विपक्षी एकता में दरार पड़ने की संभावना दिख रही है. वहीं माकपा के महासचिव श्री येचुरी ने पार्टी की ओर से लिए गये इस फैसले के पीछे विभिन्न विरोधी दलों के साथ कांग्रेस की मशविरा तथा समन्वय की कमी बताया है. सीताराम येचुरी सोमवार महानगर के अलीमुद्दीन स्ट्रीट स्थित माकपा राज्य कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हमने कांग्रेस द्वारा आयोजित विपक्षी दलों के संवाददाता सम्मेलन से दूर रहने का फैसला किया है क्योंकि कांग्रेस ने इससे पूर्व माकपा समेत किसी भी पार्टी से इस संबंध में कोई चर्चा नहीं की. उन्होंने कहा अधिकतर दलों के साथ न तो सलाह मशविरा किया गया और न ही संवाददाता सम्मेलन के एजेंडा के बारे में सूचित किया गया. जिस तरह से संवाददाता सम्मलेन बुलाया गया है, उससे कई दलों को आपत्ति है.

उन्होंने बताया कि 27 दिसंबर को होनेवाले इस संवाददाता सम्मेलन को लेकर कुछ दिन पहले उन्हें कांग्रेस नेतृत्व की ओर से एक फोन किया गया था जिसमें उनकी पार्टी को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया लेकिन जब मैंने यह जानना चाहा कि बैठक का क्या एजेंडा होगा, कार्ययोजना क्या होगी और क्या सभी विपक्षी दलों को बुलाया गया है, तो मुझे कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद हमने इस संवाददाता सम्मेलन से दूर रहने का फैसला लिया. पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या संवाददाता सम्मेलन से दूर रहने के फैसले से भाजपा खेमे को बल नहीं मिलेगा. इस पर येचुरी ने कहा जब आप 16 दलों की विपक्षी एकता को संसद स्तर से राजनीतिक स्तर तक ले जाना चाहते हैं तो आपको राजनीतिक नेतृत्व के साथ विचार विमर्श करने की आवश्यकता है. उचित विचार विमर्श के आधार पर कोई फैसला किया जाना चाहिए. वैसा नहीं किया गया,जो दुर्भाग्यपूर्ण है.

ममता बनर्जी के संवाददाता सम्मेलन में हिस्सा लेने से हमे परेशानी नहीं है. उन्होंने आश्चर्य जताया कि सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही संवाददाता सम्मेलन के लिए क्यों आमंत्रित किया गया. उन्होंने सवाल किया कि त्रिपुरा, बिहार एवं गैर भाजपा सरकारवाले प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को क्यों नहीं बुलाया गया. यह पूछे जाने पर कि क्या संवाददाता सम्मेलन से दूर रहने का उनकी पार्टी का फैसला ममता बनर्जी की मौजूदगी से प्रभावित है. इस पर येचुरी ने कहा कि नहीं, हम मशविरा तथा समन्वय की कमी के कारण संवाददाता सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहें हैं. अगर तृणमूल कांग्रेस कारण होती तो हम संसद के बाहर नोटबंदी के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों से दूर रहते, जिसमें तृणमूल कांग्रेस भी मौजूद थी.
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