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फ्लाइओवर हादसा: फॉरेंसिक टीम ने माना दुर्घटना की वजह पिलर की कमजोरी, तृणमूल के मंत्रियों पर अंगुली उठी

Updated at : 02 Apr 2016 7:38 AM (IST)
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फ्लाइओवर हादसा: फॉरेंसिक टीम ने माना दुर्घटना की वजह पिलर की कमजोरी, तृणमूल के मंत्रियों पर अंगुली उठी

भाजपा ने दावा किया है कि विवेकानंद फ्लाइओवर हादसे के पीछे तृणमूल के मंत्रियों का हाथ है. अपने दावे की पुिष्ट के लिए भाजपा ने नारदा न्यूज का दूसरा स्टिंग वीिडयो भी जारी किया, जिसमें तृणमूल के मंत्री कथित तौर पर पैसे लेकर टेंडर पास कराने की बात कहते दिख रहे हैं. कोलकाता: विवेकानंद फ्लाइओवर […]

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भाजपा ने दावा किया है कि विवेकानंद फ्लाइओवर हादसे के पीछे तृणमूल के मंत्रियों का हाथ है. अपने दावे की पुिष्ट के लिए भाजपा ने नारदा न्यूज का दूसरा स्टिंग वीिडयो भी जारी किया, जिसमें तृणमूल के मंत्री कथित तौर पर पैसे लेकर टेंडर पास कराने की बात कहते दिख रहे हैं.
कोलकाता: विवेकानंद फ्लाइओवर हादसे के दूसरे दिन ही नारदा न्यूज का दूसरा स्टिंग वीडियो सामने आया, जिससे तृणमूल की मुश्किल बढ़ गयी है. शुक्रवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने इस वीिडयो को िदखाया. हालांकि प्रभात खबर ने वीडियो की सत्यता की जांच नहीं की है.
विधायक पैसे बना रहे हैं, हमें टेंडर भेंजे, हम पास करायेंगे : फिरहाद
राहुल सिन्हा ने कहा कि वीडियो में शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम व पूर्व परिवहन मंत्री मदन मित्रा की बातों को दिखाया गया है. श्री हकीम बोलते हुए दिखायी दे रहे हैं : विधायक पैसे बना रहे हैं. मुझे टेंडर भेजें, मैं इन्हें पास करूंगा. केवल मुझे बोलें, आप क्या काम चाहते हैं. विधायक लोभी हो गये हैं. हर चीज करने के लिए वे पैसा मांगते हैं. इससे पहले, वीडियो में वह बोलते हुए दिखते हैं : मैंने डीएम से बात की है. आप जायें और उनसे मिलें. आपका काम हो जायेगा.

वीडियो में दिखाया गया कि जब नारदा न्यूज के पत्रकार ने पांच लाख रुपये देने की पेशकश की, तो पीछे से श्री हकीम के सहयोगी कहते हैं : वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नंबर दो आदमी हैं. बॉबी (फिरहाद) हकीम एक बड़े आदमी हैं. उनकी बहुत पैरवी है. वह केवल बड़ा काम करते हैं, छोटी चीजों में उनकी रुचि नहीं है.

स्थानीय विधायक के रिश्तेदार को मिला था लेबर सप्लाई का कांट्रैक्ट
विवेकानंद फ्लाइओवर का एक हिस्सा ढहने की घटना के बाद इसकी जांच ज्यों-ज्यों आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें बड़े खुलासे हो रहे हैं. इस घटना की जांच में पता चला कि इस फ्लाइओवर के निर्माण कार्य में लेबर कांट्रैक्टर की जिम्मेदारी स्थानीय विधायक स्मिता बक्सी के रिश्तेदार रजत बक्सी को मिली थी. फ्लाइओवर ढहने के बाद से गिरीश पार्क में स्थित उनका ऑफिस भी बंद है. आसपास के लोग‍ों ने बताया कि गुरुवार दोपहर से ही ही यहां दफ्तर बंद कर यहां बैठनेवाले अधिकारी यहां से भाग गये हैं. वहीं, इस मामले में स्मिता बक्सी का कहना है कि मेरे परिवार में मेरे कई रिश्तेदार हैं. इसमें कौन रिश्तेदार क्या कर रहा है, कौन किस कांट्रैक्ट पर काम कर रहा है इसकी जानकारी उनके पास नहीं है.
राहुल गांधी आज आयेंगे बड़ाबाजार, लेंगे जायजा
विवेकानंद फ्लाइओवर के हादसे के स्थल का परिदर्शन करने के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार को बड़ाबाजार आयेंगे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि शनिवार को राहुल गांधी की सभा कुल्टी, बांकुड़ा और दुर्गापुर में होगी. बड़ाबाजार में फ्लाइओवर हादसे के बाद श्री गांधी को हादसे के स्थल पर आने के लिए श्री चौधरी ने अनुरोध किया था. पूर्व में यह तय हुआ था कि सभा के बाद वापसी में श्री गांधी दुर्घटनास्थल पर जायेंगे. हालांकि श्री गांधी के कार्यालय से बताया गया है कि सुबह ही, यानी करीब 10.30-11 बजे श्री गांधी हादसे की जगह का जायजा लेंगे. इसके अलावा वह घायलों से मिलने अस्पताल भी जायेंगे.
कंपनी के 3 अधिकारी गिरफ्तार, 3 िठकाने सील
कोलकाता. विवेकानंद फ्लाइओवर को बनानेवाली कंपनी से जुड़े तीन निदेशकों को कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार शाम गिरफ्तार कर लिया. उनके नाम मल्लिकार्जुन (सीनियर मैनेजर), प्रदीप कुमार साहा (मैनेजर, स्ट्रक्चरल) और देवज्योति मजूमदार (असिस्टेंट मैनेजर, प्रबंधन) हैं.
तीनों को महानगर के विभिन्न इलाकों से गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा अन्य सात लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ हो रही है. इस मामले में कोलकाता पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) देवाशीष बोराल ने बताया कि फ्लाइओवर निर्माण करनेवाली कंपनी के महानगर के कसबा, सॉल्टलेक व जोड़ाबागान में स्थित तीनों दफ्तरों को सील करने के बाद 10 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था. उनसे इस घटना में लापरवाही बरतने के सबूत मिलने के बाद तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया. तीनों को शनिवार को अदालत में पेश किया जायेगा. अन्य लोगों से पूछताछ हो रही है. किसी भी तरह की संलिप्तता पाये जाने पर उन्हें भी गिरफ्तार किया जायेगा.
ज्ञात हो कि कोलकाता पुलिस की एक टीम ने हैदराबाद में इस कंपनी के दफ्तर में जाकर वहां के अधिकारियों से पूछताछ कर वहां से कुछ जरूरी कागजात व फ्लाइओवर का असली नक्शा जब्त किया है. वहां के भी बड़े अधिकारियों से पूछताछ हो रही है.
मृतकों की संख्या 24 हुई, कई अब भी गंभीर
विवेकानंद रोड फ्लाइओवर ढहने से मृतकों की संख्या शुक्रवार को बढ़ कर 24 हो गयी. उनमें से चार की शिनाख्त नहीं हो सकी है. 89 घायलों का महानगर के चार अस्पतालों में इलाज चल रहा है. उनमें से दर्जनभर की हालत गंभीर है, वे जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. पुलिस ने बताया कि सभी गंभीर लोगों के चिकित्सा की पूरी व्यवस्था की गयी है. उनके परिवारवालों के साथ भी लगातार पुलिस संपर्क में है. गुरुवार रात मरनेवालों की संख्या 22 थी, देर रात घटनास्थल से दो और शव बरामद किये गये. घटनास्थल पर राहत व बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों का कहना है कि अब कोई भी मलबे में नहीं दबा है. फिर भी मलबे को हटाने के बीच लोगों की खोज जारी है.
राहत कार्य में सरकार की लापरवाही : नकवी
भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शुक्रवार को तृणमूल सरकार के खिलाफ आरोप पत्र जारी करते हुए बड़ाबाजार में निर्माणधीन ओवर ब्रिज हादसे के राहत कार्य में सरकार पर घोर लापारवाही बरतने का आरोप लगाया. श्री नकवी ने घटना स्थल पर चिकित्सा अधिकारियों के ना होने और अस्पतालों की दुर्व्यवस्था का भी आरोप लगाते हुए इसे ममता सरकार की आपराधिका अनदेखी करार दिया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि इस सरकार ने राहत कार्य में थोड़ी भी तेजी दिखाती होती तो आज मरने वालों सी सूची शायद इतनी लंबी नहीं होती. उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी होते ही मैंने गृहमंत्री और रक्षामंत्री से सीधे बात की और 15 मिनट के अंदर एनडीआरएफ, सेना और अन्य केंद्रीय बल घटना स्थल पर पहुंच गये और राहत कार्य शुरू कर दिया.गृहमंत्री खुद इस दुर्घटना की खबर ले रहे थे. घटना के लिए तृणमूल और सीपीएम दोनों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि एक सरकार ब्लैक लिस्टेड कंपनी को ब्रिज बनाने का प्रोजेक्ट देती है और दूसरी सरकार उसे काम करने में मदद करती है. ऐसा लगता है कि बंगाल में भ्रष्टाचार सिंडिकेट चल रहा है, आम जनता के पैसे को लुटने की होड़-सी मची हुई है.
कटा पांव मिला, शरीर का पता नहीं
विवेकानंद फ्लाइओवर के नीचे कई लोगों को मृत अवस्था में पाया गया और अनेक लोगों को घायलावस्था में बाहर निकाला गया. शुक्रवार की सुबह भी मलबे से दो शव निकाले गये. इन दोनों शवों को कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इन दोनों शवों के अलावा एक कटा हुआ पांव भी लाया गया. यह कटा हुआ पांव किसका है, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है. आश्चर्य की बात है कि उसके बाकी शरीर का पता नहीं चल पाया है.
घटना के बाद से ही सेना, एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन और कोलकाता पुलिस के जवान घटनास्थल पर मलबा हटाने में जुटे हुए हैं. मलबे के नीचे से जिन लोगों को निकाला गया, उनको मेडिकल कॉलेज अस्पताल के साथ-साथ एसएसकेएम, आरजी कर अस्पताल, मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी तथा एनआरएस अस्पताल भेजा गया है. कटा हुआ पांव बरामद होने के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन ने अन्य अस्पतालों से भी संपर्क साधा, लेकिन कहीं से ऐसा कोई शव मिलने की जानकारी नहीं मिली, जिसका पांव कटा हुआ हो. मलबे को हटाने में जुटी सेना के अधिकारी ने भी बताया कि पूरे मलबे को हटाने में कम से कम और दो-तीन दिन का समय लगेगा. साथ ही उन्होंने किसी के मलबे में दबे रहने की कोई आशंका जाहिर नहीं की.
तीन शवों की नहीं हो पायी शिनाख्त
फ्लाइओवर हादसे में मारे गये लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज के पास स्थित मॉर्ग में ले जाया गया था, लेकिन उसमें से अब तक तीन लोगों के शवों की शिलाख्त नहीं हो पायी है.
फ्लाइओवर की घटना से मेयर ने पल्ला झाड़ा
गणेश टॉकीज के पास गुरुवार को विवेकानंद फ्लाइओवर का एक हिस्सा गिरने की घटना से राज्य के मंत्री, कोलकाता नगर निगम तथा केएमडीए के अधिकारी अपना-अपना पल्लू झाड़ने में लगे हुए हैं. सभी इस घटना का ठीकरा एक-दूसरे के माथे फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इसी क्रम में शुक्रवार को मेयर शोभन चट्टोपाध्याय ने कहा कि निर्माणाधीन विवेकानंद फ्लाइओवर से जुड़ी सभी फाइलें हम नहीं देखते हैं. कुछ फाइलों का जिम्मा केएमडीए के अधिकारियों पर है. वही फाइलों के प्रस्ताव को एप्रूवल देते हैं. मेयर ने यह भी कहा कि फ्लाइओवर का काम आइवीआरसीएल कंपनी को दिया गया था. इस कंपनी ने थर्ड पार्टी सीआर कंसलटेंसी के रूप में काम शुरू किया आैर घोषित किया था कि सब काम ठीक से चल रहा है. इस घटना में कहीं भी हम जिम्मेदार नहीं हैं.
आरएसएस के सदस्यों को राहत कार्य करने से रोका
मानवीय हो या प्राकृतिक आपदा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता अपनी जान पर खेल कर लोगों की मदद करते हैं. पर यह शायद पहली बार है, जब कोलकाता में आरएसएस स्वयंसेवकों को राहत कार्य करने से रोका जा रहा है. हमें यह कह कर रोका जा रहा है कि यह दिल्ली या गुजरात नहीं, बंगाल है. यहां आरएसएस की जरूरत नहीं है. यह आरोप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दक्षिण कोलकाता शाखा के जयदीप बनर्जी ने लगाया है. फ्लाइओवर गिरने के बाद राहत कार्य में सहयोग करने पहुंचे स्वयंसेवक जयदीप बनर्जी ने बताया की दुर्घटना के बाद से ही हमारे 200 स्वयंसेवक रात-दिन राहत कार्य में सुरक्षाकर्मियों का सहयोग कर रहे हैं, लेकिन आज कुछ लोगों को यह सहन नहीं हुआ. उन्होंने हमारे स्वयंसेवकों के साथ धक्का-मुक्की की और हमें बाहर जाने को कहा. इस दौरान पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही. श्री बनर्जी ने बताया कि आरएसएस कोलकाता महानगर के सहकारी प्रमुख सुप्राज्य घोष के नेतृत्व में हमने पुलिस के पास इसकी शिकायत की, तो पुलिसवालों ने हाथ जोड़ कर कहा कि आप दुर्घटनास्थल में मत जाइये, क्योंकि आप को वहां जाने का आदेश नहीं है. आरएसएस स्वयंसेवक भवरंजन शाना ने बताया कि सुबह लगभग 11 बजे सांसद सुदीप बनर्जी घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे थे. उनके जाने के बाद कुछ लोग दुर्घटनास्थल पर आये और हमें बाहर जाने को कहा. उन्होंने हमारे स्वयंसेवकों को धक्का दिया और जबरन बाहर जाने को कहा.
मां की दुआ से जिंदा लौट आया
गिरीश पार्क इलाके में ढहे विवेकानंद सेतु की घटना ने कई परिवारों के घरों की लौ बुझा दी, लेकिन इनमें से कई ऐसे भी लोग रहे जिसे किस्मत का साथ मिला. बड़ाबाजार के राजा बिजेंद्र नाथ स्ट्रीट में रहनेवाले अनिल सोनकर की कार के ऊपर ब्रिज का एक हिस्सा गिर गया था. इसके बावजूद वह इस हादसे में बाल-बाल बच गये. हालांकि उनके सिर व दोनों पैरों में गंभीर चोटें आयी हैं. अनिल बताते हैं कि : रोजाना की तरह कार लेकर घर से सुबह 11 बजे के करीब निकला था. तकरीबन घड़ी में 12.20 से 12.25 हो रहे होंगे. गणेश टॉकीज मोड़ पर उसकी कार सिग्नल में खड़ी थी. तभी जोरदार आवाज के साथ उसकी कार के ऊपर कुछ भारी वजनदार सामान गिरा, जिससे कार का एक हिस्सा पूरी तरह से दब चुका था. बाहर निकलने के दरवाजे टेढ़े हो गये थे. उसका शरीर भी अंदर पूरी तरह से फंस चुका था. आसपास धूल और धुआं फैले होने के कारण कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा था. अंदर फंसे हालत में किसी तरह से फोन जेब से बाहर निकाला और अपनी मां उषा देवी सोनकर और दोस्त रंजीत को फोन कर मदद मांगी. इसके बाद कुछ ही देर में रंजीत उसके पास पहुंचा और कार के सामने की कांच तोड़कर अंदर फंसे हालत में काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भरती अनिल कहते हैं : मां के पूजा-पाठ के फल से ही उसकी जान बची.
हादसे की शिकार: बेटे को स्कूल से लाने गयी शबाना नहीं लौटी घर
शबाना फ्लाइओवर हादसे में शिकार हो गयी. बेटे को स्कूल से लाने के लिए घर से निकली थी. हादसे के बाद फोन आया था, पर बीच में कट गया, तब से पता नहीं लगा रहा था कि कहां है. हालांिक परिजनों ने शबाना को पैरों में पहनी पायल व कपड़े से पहचान लिया.
मैं मरना नहीं चाहती, मुझे बचा लो आप लोग. यह आखिरी वाक्य शबाना बानो ने अपने परिजनों से फोन पर कहा था. खूनी पुल के शिकार हुए लोगों में शबाना भी शामिल है. अपने बेटे को स्कूल से लाने के लिए शबाना घर से निकली थी. फिर वह घर नहीं लौट सकी. शबाना की मौत ने एक बेटे से उसकी मां को छीन लिया. साथ ही इस दर्दनाक हादसे ने उसके पूरे परिवार को झकझोर दिया.
परिवार पर टूटा कहर
30 ‍वर्षीया शबाना बानो महानगर के मौलाना सौकत अली स्ट्रीट में अपने परिवार के साथ रहती थी. पति का नाम सिराज फारूकी है. आठ वर्षीय बेटा अब्दुल मुकित और 12 वर्षीया बेटी नौसिन फारूकी हैं. सिराज के बड़े भाई अब्दुल हमिद और उनका परिवार भी साथ रहता है. सिराज किसी दुकान में काम करते है‍ं. शबाना की भतीजी हिना फारूकी ने बताया कि हादसेवाले दिन यानी गुरुवार की सुबह शबाना अपने बेटे को स्कूल से लाने के लिए घर से निकली थी. बेटा नोपानी हाइस्कूल में कक्षा दो में पढ़ता है. अपराह्न लगभग 12.30 बजे शबाना का फोन अब्दुल हमिद यानी उसके जेठ के पास आया. फोन पर उसने केवल इतना कहा कि वे लोग उसे बचा लें. वह मरना नहीं चाहती है. इसके बाद फोन कट गया. शबाना के फोन ने जैसे पूरे परिवार को झकझोर दिया. पहले वे समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें. जैसे-तैसे परिवार घटनास्थल पर पहुंचा. पहले तो लगा कि बेटा भी शबाना के साथ है. शबाना के फोन के बाद परिजन समझ नहीं पा रहे थे कि बेटा अब्दुल मुकित शबाना के साथ है या नहीं. वे काफी घबराये थे. पहले वे घटनास्थल पर पहुंचे. इधर कुछ लोग मुकित के स्कूल भी पहुंचे. वहां उसकी कुशलता से परिजनों को थोड़ी राहत मिली.
पायल व कपड़ों से शबाना पहचानी गयी
हादसे के बाद रात भर शबाना के परिजन उसे ढूंढ़ने की कोशिश में लगे रहे. पुलिस और बचाव दल से बार-बार पूछने पर एक ही जवाब मिल रहा था कि कोशिश जारी है. आखिरकार शुक्रवार को तड़के मलबे से एक महिला की लाश बरामद की गयी.
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