2002 के बाद शामिल किये गये 2.78 करोड़ नये नाम
Updated at : 16 Oct 2025 1:27 AM (IST)
विज्ञापन

राज्य में करीब 23 वर्ष पहले 2002 में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) हुआ था. अब चुनाव आयोग ने राज्य में फिर से एसआइआर लागू करने की कवायद शुरू की है.
विज्ञापन
एसआइआर : सीमावर्ती क्षेत्रों की वोटर लिस्ट में मिली बड़ी गड़बड़ी
संवाददाता, कोलकाताराज्य में करीब 23 वर्ष पहले 2002 में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) हुआ था. अब चुनाव आयोग ने राज्य में फिर से एसआइआर लागू करने की कवायद शुरू की है. राज्य में एसआइआर लागू करने से पहले चुनाव आयोग द्वारा जारी ‘मैपिंग एंड मैचिंग’ में सीमावर्ती क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में बड़ी गड़बड़ी सामने आयी है. इसमें सीमावर्ती उत्तर व दक्षिण 24 परगना सहित कई जिलों की मतदाता सूची में त्रुटियां मिली हैं. 2002 में हुए एसआइआर के बाद राज्य की मतदाता सूची में दो करोड़ 78 लाख नये मतदाताओं के नाम शामिल किये गये हैं. यानी वे पिछले 22 वर्ष में राज्य में नये मतदाता बने हैं. बताया गया है कि मौजूदा मतदाता सूची से 2002 की वोटर लिस्ट का मिलान कर देखा गया है कि इसमें 2002 के केवल 45 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ही शामिल हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 20-22 वर्षों में सिर्फ उत्तर 24 परगना में 55 प्रतिशत नये मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किये गये हैं. इसी बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने एसआइआर के तहत बूथ मैपिंग प्रक्रिया में तेजी लायी है. झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर और अलीपुरदुआर जिलों का डेटा पहले ही चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है. यह मैपिंग कार्य दिवाली अवकाश से पहले तेज किया गया है, जो 18 अक्तूबर से शुरू हो रहा है. राज्य के सीईओ कार्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर जिले में बूथ मैपिंग 62.94 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, झाड़ग्राम में 51.36 व अलीपुरदुआर में 53.73 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है. इनके अलावा कई अन्य जिलों में भी बूथ मैपिंग का काम तेजी से चल रहा है. पुरुलिया में अब तक 61.29 प्रतिशत, कलिम्पोंग में 64.27, मालदा में 54.49 व कोलकाता उत्तर में 55.35 प्रतिशत काम पूरा हो गया है. उत्तर 24 परगना में प्रक्रिया 45 प्रतिशत तक पहुंची है, जबकि दक्षिण 24 परगना में यह 50 से 55 प्रतिशत के बीच है. अधिकारी ने बताया कि ये आंकड़े 2002 के एसआइआर मानक के आधार पर तैयार किये जा रहे हैं, जिन जिलों का डेटा अपलोड किया जा चुका है, वहां के मतदाता अब अपने ईपीआइसी नंबर के जरिये ऑनलाइन अपने विवरण की जांच कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि सभी जिला मजिस्ट्रेट, जो जिले के निर्वाचन अधिकारी भी हैं, को प्रक्रिया शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये गये हैं.क्या है मैपिंग एंड मैचिंग
चुनाव आयोग की मैपिंग एंड मैचिंग एक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची की सटीकता को बढ़ाना है. यह दो प्रमुख तरीकों से किया जाता है: मतदाता सूची की मैपिंग (मानचित्रण) : इस प्रक्रिया में, मतदाताओं को उनके भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार मैप किया जाता है. मतदान केंद्रों को निर्वाचन क्षेत्रों और ब्लॉकों के साथ जोड़ा जाता है.मतदाता सूची की मैचिंग (मिलान) :
यह प्रक्रिया डुप्लिकेट प्रविष्टियों व मृत वोटरों के नाम हटाने के लिए की जाती है. चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची में प्रत्येक व्यक्ति का विवरण सही हो और कोई दोहराव न हो.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




