पश्चिम बंगाल के तूफानगंज के 73 गांव तुलसी ग्राम घोषित

Updated at : 17 Nov 2019 9:01 PM (IST)
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पश्चिम बंगाल के तूफानगंज के 73 गांव तुलसी ग्राम घोषित

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के तूफानगंज के करीब 73 गांव को तुलसी ग्राम घोषित किया गया है. तूफानगंज के एक नंबर ब्लॉक के घर-घर में तुलसी का पौधा लगाया गया है. डॉ डिंडा के प्रयास से खुश होकर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (बीएमओएच) व पब्लिक हेल्थ नर्सिंग ने ब्लॉक को तुलसी गांव घोषित किया. […]

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल के तूफानगंज के करीब 73 गांव को तुलसी ग्राम घोषित किया गया है. तूफानगंज के एक नंबर ब्लॉक के घर-घर में तुलसी का पौधा लगाया गया है. डॉ डिंडा के प्रयास से खुश होकर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (बीएमओएच) व पब्लिक हेल्थ नर्सिंग ने ब्लॉक को तुलसी गांव घोषित किया.

इसके अलावा तूफानगंज के अन्य 72 गांव को तुलसी गांव घोषित किया गया है. यहां के सभी गांवों के स्कूल व पंचायत दफ्तर में तुलसी के पौधे वितरित किये जा रहे हैं.भारतीय संस्कृति में तुलसी को पूजनीय माना जाता है. धार्मिक महत्व होने के साथ तुलसी औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेद में औषधीय गुणों के कारण तुलसी को विशेष महत्व दिया गया है.

भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में तुलसी के औषधीय गुणों का उल्लेख मिलता है. तुलसी में गजब की रोगनाशक शक्ति है. विशेषकर सर्दी, खांसी व बुखार में अचूक दवा का काम करती है. इसके अतिरिक्त एलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं को बानने के लिए तुलसी का प्रयोग किसी न किसी रूप में किया जाता है. औषधी के रूप में तुलसी का इस्तेमाल किये जाने के कारण कूचबिहार जिले के नाटाबाड़ी के भेलापेटा स्थित तूफानगंज एक नंबर ब्लॉक को तुलसी ग्राम घोषित किया गया है.

नाटा बाड़ी ब्लॉक हॉस्पिटल के सीनियर आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर (आयुर्वेद) डॉ बासब कांति डिंडा ने बताया : उत्तर बंगाल के मौसम के कारण यहां रहनेवाले लोग बुखार, गले के दर्द, सर्दी, खांसी, अस्थमा, फेफड़े में संक्रमण की बीमारी से बार-बार जूझना पड़ता है. उक्त पद पर साल 2013 में नियुक्ति के बाद उन्होंने देखा की नाटाबाड़ी ब्लॉक हॉस्पिटल में अधिकतर मरीज उक्त संक्रामक बीमारियों के साथ पहुंचते थे.

उन्होंने इन बीमारियों के साथ अस्पताल पहुंचे वाले मरीजों को तुलसी को विभिन्न रूप में इस्तेमाल करने की की सलाह दी. तुलसी के इस्तेमाल से मरीजों को काफी लाभ मिला. उनके सुझाव पर गांव के घर-घर में तुलसी का पौधा लगाया गया.

दवा के तौर पर तुलसी के इस्तेमाल में लाने के लिए डॉ डिंडा ने पहले स्थानीय स्कूलों के शिक्षक व आशाकर्मियों के साथ प्रचार अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया. तुलसी गांव को लेकर डॉ डिंडा को इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2019 के कार्यक्रम में इस साल सम्मानित किया गया है.

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