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बंगाल की संस्कृति बचाने के लिए एनआरसी जरूरी : विजयवर्गीय

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद बंगाल में एनआरसी की जरूरत नहीं का बयान देने पर भाजपा के महासचिव व केंद्रीय प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने जमकर कटाक्ष करते हुए कहा कि बंगाल की संस्कृति बचाने के लिए राज्य में एनआरसी लागू करना जरूरी है. श्री […]

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद बंगाल में एनआरसी की जरूरत नहीं का बयान देने पर भाजपा के महासचिव व केंद्रीय प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने जमकर कटाक्ष करते हुए कहा कि बंगाल की संस्कृति बचाने के लिए राज्य में एनआरसी लागू करना जरूरी है.

श्री विजयवर्गीय ने कहा : ममता जी का बयान तुष्टिकरण की नीति के अतंगर्त वोट बैंक की चिंतावाला बयान है और हमारी चिंता देश की है. देश की आतंरिक सुरक्षा की है और बंगाल की संस्कृति बचाने की है. यदि बंगाल को घुसपैठियों से नहीं रोका गया, तो बांग्ला संस्कृति खतरे में होगी. इसलिए बंगाल की संस्कृति को बचाने के लिए बंगाल में एनआरसी आवश्यक है. हमें वोट बैंक और कुर्सी की चिंता नहीं है. हमारी चिंता देश है और बंगाल की संस्कृति की है.
उन्होंने साफ कहा कि भाजपा सरकार में आती है, तो बंगाल में एनआरसी लागू किया जायेगा और घुसपैठियों को बाहर निकाला जायेगा. शरणार्थियों को संरक्षण दिया जायेगा. श्री विजयवर्गीय ने ट्वीट किया : मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात को क्या इस अर्थ में लिया जाये और उन्होंने लिखा : अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे.
एनआरसी पर सुजन ने ममता को घेरा
कोलकाता. प्रधानमंत्री के बाद केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात के दौरान एनआरसी के मुद्दे पर कोई बात नहीं करनेवालीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने घेरते हुए कहा कि वह लोगों को भरमाने की राजनीति करती हैं.
माकपा नेता ने कहा कि एनआरसी के मुद्दे पर सड़क पर उतरकर विरोध का नाटक करनेवालीं ममता बनर्जी सही जगह पर खामोश हो जाती हैं और इसके पीछे मौन सहमति देती हैं. हालांकि ममता बनर्जी ने साफ किया है कि वह एनआरसी के मुद्दे पर अपने पुराने स्टैंड पर कायम हैं. पश्चिम बंगाल में एनआरसी की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए इस पर चर्चा करना अप्रासंगिक है. ऐसा ममता बनर्जी मानती हैं.
उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने कहा कि गृहमंत्री के साथ असम में एनआरसी के मुद्दे पर चर्चा हुई है, लेकिन बंगाल में एनआरसी के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है. सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि एक साल पहले ही माकपा पोलित ब्यूरो ने एनआरसी के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी, जबकि ममता को समझने में एक साल से भी अधिक का वक्त लग गया. उन्होंने सवाल उठाया कि एनआरसी के खिलाफ पश्चिम बंगाल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन ऐसी क्या वजह हुई कि ममता इस बात का जिक्र प्रधानमंत्री अथवा गृहमंत्री से नहीं कर पायीं. उन्होंने कहा कि दरअसल ममता बनर्जी अपने लिए प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के पास गयी थीं, जनता के लिए नहीं.
Prabhat Khabar Digital Desk
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