इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन अगस्त तक : प्रो मित्रा
Updated at : 04 Aug 2019 6:59 AM (IST)
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कोलकाता : राज्य में कई संस्थानों में अब भी सभी इंजीनियरिंग सीटों पर दाखिला नहीं हुआ है. ज्वाइंट इंट्रेस परीक्षा बोर्ड द्वारा सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग होने के बाद भी पूरी सीटों पर दाखिला नहीं हुआ है. कई तकनीकी कॉलेजों में अभी सीटें रिक्त पड़ी हैं. हालांकि अभी तीसरे चरण की सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग हो चुकी है. इसके […]
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कोलकाता : राज्य में कई संस्थानों में अब भी सभी इंजीनियरिंग सीटों पर दाखिला नहीं हुआ है. ज्वाइंट इंट्रेस परीक्षा बोर्ड द्वारा सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग होने के बाद भी पूरी सीटों पर दाखिला नहीं हुआ है. कई तकनीकी कॉलेजों में अभी सीटें रिक्त पड़ी हैं. हालांकि अभी तीसरे चरण की सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग हो चुकी है.
इसके बाद भी काफी सीटें खाली रह गयी हैं. सभी इंजीनियरिंग व फार्मेसी कॉलेज माैलाना अबुल कलाम आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलोजी के तत्वावधान में चल रहे हैं. इन कॉलेजों में दाखिले को लेकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अगस्त माह तक चलेगी. इसके बाद ही राज्य में कुल रिक्त पड़ीं सीटों का सही विवरण सामने आयेगा.
यह जानकारी माैलाना अबुल कलाम आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलोजी के वाइस चांसलर प्रो सैकत मित्रा ने दी. उनका कहना है कि अब भी लगभग 15,000 सीटें खाली हैं. इसके पीछे कारण यही है कि छात्र नये विषय जैसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग व डाटा साइंस को लेकर पढ़ना चाहते हैं.
जिन कॉलेजों में ये विषय नहीं हैं, वहां काफी सीटें खाली हैं. राज्य के मध्यम स्तर के कॉलेजों में दाखिला कम हुआ है. छात्र बेहतरीन संस्थान अपने रुचि के विषयानुसार चुन रहे हैं. उनका कहना है कि सिविल, मैकेनिकल व ऑटोमोबिल इंजीनियरिंग कोर्स में काफी सीटें खाली पड़ी हैं. सभी कॉलेजों को यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है, अगस्त के अंत में ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पायेगी.
इस बारे में ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की सिलेबस रिवीजन कमेटी (कम्प्यूटर साइंस) के पूर्व अध्यक्ष अनुपम बसु का कहना है कि सभी विषयों में मध्यस्तरीय कॉलेजों में सीटों को भरने को लेकर संकट है.
जिन संस्थानों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर या अच्छे शिक्षक नहीं हैं, वहां छात्र दाखिला नहीं ले रहे हैं. इकोनॉमिक्स, लॉ व स्पोट्स मेडिसिन में नौकरी के ज्यादा अवसर हैं, इसलिए विद्यार्थी इन विषयों में अधिक रुचि ले रहे हैं. प्लेसमेंट सुविधा को भी युवा महत्व दे रहे हैं.
हाल ही में महानगर में एक कार्यक्रम में आये ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के चैयरमेन डॉ अनिल सहसराबुद्धे ने कहा था कि क्वालिटी एजुकेशन व इंफ्रास्ट्रक्चर पर संस्थान अधिक जोर दें. इसके लिए एक कमिटी गत वर्ष स्थापित की गयी थी, जिसमें तकनीकी शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों को रखा गया.
उनका कहना है कि देश में जितनी सीटों की जरूरत है, उससे ज्यादा ही सीटें संस्थानों में उपलब्ध हैं, लेकिन संस्थानों को रुचिकर विषयों के विभाग खोलने चाहिए. साथ ही उनका एकेडमिक स्तर बेहतरीन होना चाहिए. अगर स्तर नहीं सुधारा, तो बेरोजगार इंजीनियरों की संख्या और बढ़ जायेगी. कॉलेजों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे चैप्टर शुरू करने चाहिए. अच्छे अनुभवी शिक्षकों को रखना चाहिए. अभी चाैथे चरण में जेइइ बोर्ड द्वारा फिर से सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग की जायेगी.
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