कम बारिश से सूखे की आशंका, 2010 से भी स्थिति हो सकती है भयावह

Updated at : 04 Aug 2019 3:07 AM (IST)
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कम बारिश से सूखे की आशंका, 2010 से भी स्थिति हो सकती है भयावह

कोलकाता : नौ साल पहले के मुकाबले इस बार हालात काफी गंभीर होने की आशंका है. वर्ष 2010 में कम बारिश के कारण पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल के 11 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित करना पड़ा था. मौजूदा समय में जो हालात हैं, उसमें खासकर दक्षिण बंगाल की 20 फीसदी जमीन पर […]

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कोलकाता : नौ साल पहले के मुकाबले इस बार हालात काफी गंभीर होने की आशंका है. वर्ष 2010 में कम बारिश के कारण पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल के 11 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित करना पड़ा था.

मौजूदा समय में जो हालात हैं, उसमें खासकर दक्षिण बंगाल की 20 फीसदी जमीन पर अब भी धान की खेती नहीं शुरू हो पायी है. स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाये जायें और किसानों को होनेवाले नुकसान से कैसे बचाया जाये, यह प्रशासन तय नहीं कर पा रहा है.
हालांकि किसानों को खेती के लिए राज्य सरकार की ओर से अनुदान दिया जा रहा है. स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से जिलेवार स्थिति पर नजर रखी जा रही है. प्रशासन को एक तरफ सूखा से होनेवाले नुकसान की तो दूसरी ओर अचानक कम समय में ज्यादा बारिश होने से आनेवाली बाढ़ की भी आशंका है.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 के जून-जुलाई के महीने में पश्चिम बंगाल में 31 फीसदी कम बारिश हुई थी. इस साल इन दो महीनों में 47 फीसदी बारिश कम हुई है. 2010 के अगस्त-सितंबर महीने में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण 11 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था.
फिलहाल पश्चिम बंगाल में जो हालात हैं, उसके अनुसार अगर अगस्त का अंतिम सप्ताह बीत गया, तो जो लोग खेती करेंगे, उन्हें अच्छी पैदावार नहीं मिलेगी. राज्य के कृषि निदेशक संपद रंजन पात्र के मुताबिक दक्षिण बंगाल की हालत खराब है. कई जगहों पर बीज अंकुरित हो गये हैं, लेकिन खेतों में पानी के अभाव में चारा लगाने लायक स्थिति नहीं है.
हालांकि मुर्शिदाबाद, पुरुलिया जिलों में बारिश के कारण स्थिति कुछ राहत देनेवाली है. राज्य में अमन चावल की खेती 42 लाख हेक्टर भूमि पर होती है. इसमें एक करोड़ 70 लाख मैट्रिक टन धान का उत्पादन होता है. अगर मौसम अनुकूल नहीं रहा, तो स्थिति साल 2010 से भी खराब हो सकती है. इस आशंका से परेशान है कृषि विभाग.
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