3 दिनों के अंदर दुकानें हटाने का दिया निर्देश
Updated at : 16 Jul 2019 2:41 AM (IST)
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विधान मार्केट में अवैध तरीके से बनी 20 नवनिर्मित दुकानों का मामला कारोबारियों में मची खलबली सिलीगुड़ी : विधान मार्केट में अवैध तरीके से बनाये गये 20 नवनिर्मित दुकानों को लेकर एसजेडीए(सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए एक नोटिस जारी किया है. सोमवार को जारी किये गये नोटिस में तीन दिनों के […]
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विधान मार्केट में अवैध तरीके से बनी 20 नवनिर्मित दुकानों का मामला
कारोबारियों में मची खलबली
सिलीगुड़ी : विधान मार्केट में अवैध तरीके से बनाये गये 20 नवनिर्मित दुकानों को लेकर एसजेडीए(सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए एक नोटिस जारी किया है. सोमवार को जारी किये गये नोटिस में तीन दिनों के भीतर दुकानों को वहां से हटाने का निर्देश दिया गया है.
नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर तीन तीनों के अंदर दुकानों को नहीं हटाया गया तो एसजेडीए द्वारा उसे तोड़ दिया जायेगा. इस नोटिस से कारोबारियों में खलबली मच गयी है. वहीं व्यापारियों का कहना है कि वहां कोई अवैध निर्माण नहीं हुआ है. नोटिस जारी होते ही सोमवार शाम को विधान मार्केट व्यवयसायी समिति के सदस्यों ने एक बैठक भी की. व्यवयसायी समिति के सचिव बापी साह ने बैठक के बाद निर्णय लिया जायेगा.
उल्लेखनीय है कि 11 जून को विधान मार्केट में सात दुकान जलकर राख हो गया था. आरोप है कि इस घटना के एक महीने के अंदर ही सात दुकानों की जगह अवैध तरीके से 20 दुकानों का निर्माण कराया गया. इसकी खबर मिलते ही शनिवार को राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने विधान मार्केट पहुंच अवैध तरीके से बने दुकानों पर ऐतराज जताया. निरीक्षण के दौरान मंत्री ने मौके पर उपस्थित एसजेडीए अधिकारियों को फटकार भी लगायी और दुकानों को तोड़ने का निर्देश दिया.
इस दौरान गौतम देव ने कुछ व्यापारियों पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध निर्माण करने व उसे बेचने का आरोप लगाया था. वहीं मंत्री के बयान से भड़के व्यापारी विधान रोड पर धरना-प्रदर्शन करने लगे. वहीं इस मामले पर गौतम देव ने रविवार को अवैध निर्माण संबंधित पूरी रिपोर्ट नवान्न को भेजने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि वे आखिरी सांस तक इस लड़ाई को लड़ेंगे. करेंगे.
सवाल यह भी पैदा हो रहा है कि आखिर सात के स्थान पर किसकी अनुमति से वहां 20 दुकानों का निर्माण करवाया गया? इतना ही नहीं, जब दुकानों का निर्माण हो रहा था तो प्रशासन व स्थानीय वार्ड पार्षद की नजर क्यों नही पड़ी? ऐसे अनेकों प्रश्न है जो स्थानीय वार्ड पार्षद पर सवालिया निशान लगा रहा है. इस पूरे घटना के बाद सोमवार शाम को एसजेडीए की ओर से एक नोटिस जारी किया गया. सोमवार को नोटिस जारी होने के बाद एसजेडीए ने यह साफ कर दिया है कि अगर अवैध दुकानों को नहीं तोड़ा गया तो एसजेडीए कानूनी कार्रवाई करेगी.
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