कैंसर की वजह से तीन साल पहले हटा दिया गया था अंडाशय, फिर भी बनी मां

Updated at : 12 Mar 2019 1:13 AM (IST)
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कैंसर की वजह से तीन साल पहले हटा दिया गया था अंडाशय, फिर भी बनी मां

दो बार हो चुका था गर्भपात, तीसरी बार दिया बेटी को जन्म कोलकाता : अरुणिमा ने कैंसर की वजह से अपना एक अंडाशय (ओवरी) खो दिया था लेकिन मां बनने की उम्मीद उनमें बाकी थीं. पिछले हफ्ते अरुणिमा (बदला हुआ नाम) ने एक बेटी को जन्म दिया है. बता दें कि अरुणिमा की दायीं ओवरी […]

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दो बार हो चुका था गर्भपात, तीसरी बार दिया बेटी को जन्म

कोलकाता : अरुणिमा ने कैंसर की वजह से अपना एक अंडाशय (ओवरी) खो दिया था लेकिन मां बनने की उम्मीद उनमें बाकी थीं. पिछले हफ्ते अरुणिमा (बदला हुआ नाम) ने एक बेटी को जन्म दिया है.
बता दें कि अरुणिमा की दायीं ओवरी तीन साल पहले ही निकाल दी गयी थी, लेकिन मजबूत हौसलेवाली अरुणिमा अपनी बच्ची के साथ हुगली स्थित अपने घर वापस लौटी हैं. शादी के दो साल बाद वर्ष 2015 में अरुणिमा के अंडाशय कैंसर की पुष्टि हुई थी. इसके बाद उनकी दायीं ओवरी को निकाल दिया गया.
आमतौर पर ऐसे मामलों में डॉक्टर्स दोनों ही अंडाशयों को निकाल देते हैं, लेकिन उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए डॉ एपी मजूमदार ने बायीं ओर के अंडाशय को बचा लिया. सर्जरी लगभग छह राउंड तक चली. कीमोथेरेपी के साथ अरुणिमा की मां बनने की चाहत को खत्म नहीं होने दिया गया. कैंसर के इलाज के बाद हाल्दर दंपती ने मुकुंदपुर स्थित एएमआरआई हॉस्पिटल में स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क किया.
एएमआरआई, मुकुंदपुर के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ विश्वज्योति गुहा ने बताया कि हमनें उनका इलाज शुरू किया ताकि वह सामान्य रूप से गर्भवती हो सकें. वह दो बार गर्भवती हुईं लेकिन दोनों ही बार गर्भपात हो गया. डॉक्टरों का कहना है कि यदि गर्भाशय सही है और दूसरी ओवरी काम कर रही है तो महिला का गर्भवती होना संभव है, लेकिन डॉक्टरों को तब मुश्किल का सामना करना पड़ता है, जब महिला को गर्भवती बनने से पहले कैंसर हो चुका हो. दोबारा गर्भपात होने के बावजूद अरुणिमा ने मां बनने की उम्मीद नहीं छोड़ी.
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उन्हें एएमआरआई मेडिकल सेंटर में आइवीएफ प्रक्रिया के लिए फर्टिलिटी इंचार्ज डॉ कौशिकी राय सरकार के पास भेजा. रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की वजह से महिलाओं को कई बार आगे भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. हाल्दर के मामले में डॉक्टरों ने पाया कि गर्भाशय पूरी तरह से सही है.
इसके बाद डॉक्टरों ने उसका अंडा और उसके पति के स्पर्म को आइवीएफ के लिए लिया.
इसके बाद अरुणिमा को बेटी पैदा हुई. खुशी से लबरेज परिवार अपनी बेटी के साथ वापस घर लौट गया है. एक प्राइवेट कंपनी में काम करनेवाले अरुणिमा के पति बताते हैं कि हम जानते हैं कि यह बहुत मुश्किल था लेकिन मेडिकल साइंस, भगवान और डॉक्टरों पर हमनें अपनी उम्मीद बरकरार रखी.
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