भाषा समाज की पहचान व संस्कृति का आधार : शाह
Updated at : 22 Feb 2019 2:10 AM (IST)
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कार्यक्रम के दौरान पुलवामा में शहीद हुए जवानों व हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक को भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी कोलकाता : भाषा समाज की पहचान है, संस्कृति का आधार है. किसी देश और राज्य की भाषा का सशक्त होना बहुत जरूरी है, वहीं राजस्थानी भाषा को अभी तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पाना एक तरह […]
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कार्यक्रम के दौरान पुलवामा में शहीद हुए जवानों व हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक को भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी
कोलकाता : भाषा समाज की पहचान है, संस्कृति का आधार है. किसी देश और राज्य की भाषा का सशक्त होना बहुत जरूरी है, वहीं राजस्थानी भाषा को अभी तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पाना एक तरह का अन्याय है. ये बातें राजस्थानी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष रतन शाह ने ‘राजस्थान प्रचारिणी सभा’ द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय भाषा दिवस’ पर गुरुवार को भारतीय भाषा परिषद में आयोजित ‘भाषा की दशा और दिशा पर विमर्श व महिला कवि गोष्ठी’ में कही.
उन्होंने कहा अभी लोग भाषा के प्रति जागरूक हुए हैं, पर अभी भी मातृभाषा पर बहुत से काम करना बाकी है. विशेष अतिथि सीए व प्रबंधन विशेषज्ञ बिनोद कोठारी ने बताया कि किस प्रकार कोई भी मातृभाषा समाज के लिए बहुत जरूरी है. उन्होंने स्वरचित आठ पंक्ति की कविता पढ़ी और कहा कि समाज में बेटों के पास सोने-चांदी है, पर मां का चोख खाली है. उन्होंने कहा कि राजस्थानियों को अपनी मातृभाषा के लिए काम करना चाहिए. विशेष अतिथि उद्योगपति महावीर प्रसाद मणकसिया ने कहा कि हम अपनी मातृभाषा के लिए सचेत नहीं हो रहे हैं. जिसके कारण हमारी सही पहचान कायम नहीं हो रही है.
उन्होंने कहा कि हम कार्य स्थल पर कोई भी भाषा बोलते हों, पर हमें अपने घर पर अपनी राजस्थानी भाषा बोलनी चाहिए. कार्यक्रम का संचालन करते हुए महेश लोढा ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातृभाषा मात्र ‘मां’ से ही नहीं, वरन हमारे जन्म स्थल से भी जुड़ा हुआ है.
कार्यक्रम के दौरान पुलवामा में शहीद हुए जवानों व हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक को भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. कार्यक्रम में प्रसन चोपड़ा, इंदु चांडक, मृदुला कोठारी, अनिला राखेचा, गुलाब बैद, विद्या भंडारी व सुशीला चनानी ने कविता पाठ किया. इस कविता पाठ का संचालन सुंदर पारख ने किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में संदीप गर्ग, बालकिशन खेतान, अजय अग्रवाल, नरनारायण हरलालका, श्री गोपाल डागा, गौरी शंकर शारड़ा, कैलाश धानुका, रमामोहन लाहोटिया, प्रमोद शाह, द्वारका प्रसाद गनेड़िवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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