कोलकाता : सर्जरी के बगैर हृदय का सफल उपचार
Updated at : 18 Feb 2019 9:17 AM (IST)
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कोलकाता : हृदय जनित जानलेवा बीमारी से जूझ रहे 23 साल के कुमार यादव (बदला हुआ नाम) को मेडिका सुपरस्पेशलटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने नया जीवन प्रदान किया है. कुमार बहुत जल्द थक जाता था, उनके होंठ और अंगुलियां नीली नजर आती थीं. वह महज चार साल की उम्र से इस समस्या से जूझ रहा […]
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कोलकाता : हृदय जनित जानलेवा बीमारी से जूझ रहे 23 साल के कुमार यादव (बदला हुआ नाम) को मेडिका सुपरस्पेशलटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने नया जीवन प्रदान किया है. कुमार बहुत जल्द थक जाता था, उनके होंठ और अंगुलियां नीली नजर आती थीं.
वह महज चार साल की उम्र से इस समस्या से जूझ रहा था. काफी जांच के बाद स्थानीय चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि इस बीमारी के इलाज के लिए सर्जरी करनी पड़ेगी. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण तब सर्जरी नहीं हो पाई थी.
समय के साथ कुमार की समस्या भी बड़ी होती गई. जिसके कारण अब उसे सीढ़ियां चढ़ने पर भी सांस लेने में दिक्कत होने लगी हालत धीरे-धीरे और बिगड़ने लगी. इसके बाद उसे एक स्थानीय सरकारी अस्पताल में दिखाया गया. डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया की मरीज हृदय की समस्या से जूझ रहा है. बहेतर चिकित्सका के लिए उसे कोलकाता रेफर कर दिया. परिजन कुमार को लेकर मेडिका सुपरस्पेशलटी हॉस्पिटल पहुंचे.
यहां सीनियर कंसलटेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ राणा राठौर रॉय की देख- रखे में उसकी चिकित्सा आरंभ हुई. जांच और जरूरी इलाज के लिए मरीज को मेडिका सुपरस्पेशलटी हॉस्पिटल में सीनियर कंसलटेंट इंटरवेंशनल पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अनिल कुमार सिंघी के पास मरीज को भेजा गया. डॉ सिंघी ने बताया कि कुमार का वजन 35 किलो से भी कम था. आक्सीजन सेचुरेशन महज 58 प्रतिशत था, जबकि सामान्यतया यह 98 से 100 प्रतिशत होता है. लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित रहने के कारण उसकी लंबाई 4.9 फीट ही रह गई थी. छाती के एक्स-रे से पता चला कि कुमार का हृदय छाती के दायीं ओर स्थित है.
गड़बड़ी का पता लगाने कि लिए सीटी पल्मनरी एंजियोग्राम किया गया. इस जांच में पता लगा कि बायीं तरफ फेफड़े की धमनियां, जन्म से ही बायें अट्रियम से एक असामान्य नली के जरिये जुड़ी हुई हैं. उस असामान्य नली का व्यास लगभग एक इंच था, जो कि शरीर की मुख्य धमनी के व्यास से भी बड़ा था. उसी के जरिये अशुद्ध रक्त और शुद्ध रक्त मिल जा रहे थे. इस वजह से कुमार की अंगुलियां, नाखून और होठ नीले पड़ गये थे.
इलाज के विकल्प बहुत चुनौतीपूर्ण थे. जोखिम कम करने के लिए हमने काफी विचार विमर्श के बाद बिना सर्जरी पैर में नस के जरिए एक डिवाइस डालकर उस नली को बंद किया. प्रोसीजर को लोकल एनेसथिसिया के तहत अंजाम दिया गया. कैथ लैब में कुमार के पैर की नसों के जरिए एक तार और छोटा कैथेटर डाला गया. एंजियोग्राम व मॉनीटर के जरिये नजर रखते हुए गड़बड़ी वाली जगह पर 24 एमएम लाइफटेक मस्कुलर वीएसडी डिवाइस लगाया गया. इसके तत्काल बाद कुमार का ऑक्सीजन सेचुरेशन 99 प्रतिशत हो गया, जो कि सामान्य है.
प्रोसीजर पूरी तरह सफल रहा. तीसरे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई. कुमार को खून पतला करने वाली कुछ दवाएं खाने की सलाह दी गई है. उधर, कुमार ने बताया ‘ अब मैं आसानी से सांस ले सकता हूं ‘, मैं घर में कैद होकर रह गया था, लेकिन इलाज के बाद अब आराम से घूम-फिर सकता हूं. मेडिका के चेयर डॉ. आलोक रॉय ने बताया कि, जन्मजात हृदय रोग के इलाज की सफलता पर निश्चिच तौर पर हमारी नजर है.
डॉक्टर बिना किसी बड़ी सर्जरी के ही डिवाइस प्रत्यारोपित कर रहे हैं. कुमार का स्वस्थ हो जाना निश्चित रूप से मेडिका टीम का हौसला बढ़ायेगा.
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