कोलकाता : तेरापंथ धर्मसंघ के 155वें मर्यादा महोत्सव का भव्य आयोजन

कोलकाता : अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक तेरापंथ धर्मसंघ का अतिविशिष्ट पर्व मर्यादा महोत्सव का भव्य आयोजन आचार्यश्री महाश्रमणजी की सन्निधि में इस वर्ष कोयंबटूर की धरा पर आयोजित किया गया है. आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री डॉ पीयूषप्रभाजी के सान्निध्य में वहीं मर्यादा महोत्सव का कार्यक्रम 12 फरवरी को तेरापंथ भवन, साउथ कोलकाता […]
कोलकाता : अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक तेरापंथ धर्मसंघ का अतिविशिष्ट पर्व मर्यादा महोत्सव का भव्य आयोजन आचार्यश्री महाश्रमणजी की सन्निधि में इस वर्ष कोयंबटूर की धरा पर आयोजित किया गया है. आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री डॉ पीयूषप्रभाजी के सान्निध्य में वहीं मर्यादा महोत्सव का कार्यक्रम 12 फरवरी को तेरापंथ भवन, साउथ कोलकाता में आयोजित हुआ.
साध्वीवृंद ने मर्यादा गीत का संगान किया. साउथ सभा की उपाध्यक्ष प्रतिभा कोठारी ने स्वागत व्यक्तव्य दिया. जनमेदिनी को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ पीयूष प्रभाजी ने अनुशासन और मर्यादा के प्रतीक इस महोत्सव के महत्व को उजागर करते हुए फरमाया कि आद्य प्रवर्तक लौहपुरुष आचार्य भिक्षु की लेखनी से जो मर्यादा पत्र लिखा गया है, उसी के गुरूत्वाकर्षण पर विकसित है यह तेरापंथ धर्मसंघ.
उन्होंने कहा : आचार्य भिक्षु भविष्य द्रष्टा थे. उन्होंने महसूस किया कि यदि संघ को सुदृढ़ बनाना है, तेरापंथ को दीर्घजीवी रखना है, उसे एक तेजस्वी और प्राणवान धर्मसंघ के रुप में प्रतिष्ठित करना है तो साधु जीवन के लिए आवश्यक शास्त्रीय मर्यादाएं- पांच महाव्रत, पांच समिति और तीन गुप्ति के साथ-साथ कुछ मौलिक संघीय मर्यादाओं का पालन आवश्यक है. संघ को सुदृढ़ और सुव्यवस्थित करने के लिए आचार्य भिक्षु ने मर्यादाओं का निर्माण किया.
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