अंग प्रत्यारोपण में आगे बढ़ रहा है बंगाल

Updated at : 25 Dec 2018 3:56 AM (IST)
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अंग प्रत्यारोपण में आगे बढ़ रहा है बंगाल

कोलकाता : जब भी बात अंग प्रत्यारोपण की होती है तो आंखें स्पेन की ओर उठती हैं. ‘ग्लोबल आब्जर्वेटरी आन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांट’ के अनुसार विश्व में अंगदान व आॅर्गन ट्रांसप्लांट के मामले में स्पेन सबसे आगे है. लेकिन पश्चिम बंगाल भी इस दौड़ में पीछे नहीं है. इस साल जुलाई से लेकर दिसंबर तक […]

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कोलकाता : जब भी बात अंग प्रत्यारोपण की होती है तो आंखें स्पेन की ओर उठती हैं. ‘ग्लोबल आब्जर्वेटरी आन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांट’ के अनुसार विश्व में अंगदान व आॅर्गन ट्रांसप्लांट के मामले में स्पेन सबसे आगे है. लेकिन पश्चिम बंगाल भी इस दौड़ में पीछे नहीं है.
इस साल जुलाई से लेकर दिसंबर तक तकरीबन 14 अंग प्रत्यारोपण किया गया, जिसमें सबसे अधिक संख्या हृदय प्रत्यारोपण की है. ध्यान देनेवाली बात यह है कि यहां पहली बार ब्रेन डेथ के घोषित कैडेवर यानी शव से लिये गये हर्ट का भी सफल प्रत्यारोपण किया गया.
गौरतलब है कि उक्त पांच में से दो ट्रांसप्लांट देश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेज कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क किया गया. जिसके लिए दोनों हृदय पश्चिम बंगाल से ही मिला था. बाकी के तीन महानगर के निजी अस्पताल में हुआ. जिनमें फोर्टिस हॉस्पीटल अव्वल रहा.
यहां लगातार दो हर्ट ट्रांसप्लाट किया तो वहीं आर एन टैगोर हॉस्पिटल में एक किया गया. ग्रीन कॉरीडोर के जरिये अस्पताल में इन तीनों हृदय को दूसरे राज्य से लाया गया था.
इस हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा इस साल अंगदान के तहत मिले अन्य अंग लीवर किडनी, त्वचा व कार्निया का भी सफल ट्रांसप्लांट किया गया. विदित हो कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए निजी अस्पतालों के साथ-साथ राज्य के स्वास्थ्य भवन की ओर से भी कोशिश की जा रही है.
ब्रेन डेथ को अनिवार्यता से लागू करने पर जोर
भारत सरकार ने फरवरी 1995 में ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम‘ पास किया था, जिसके अंतर्गत अंगदान और मस्तिष्क मृत्यु को कानूनी वैधता प्रदान की गयी है. पर आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रति दस लाख लोगों पर अंग दान करने वालों की संख्या एक से भी कम है.
ऐसे में अगर ब्रेन स्टेम डेथ की घोषणा हर अस्पताल के लिए अनिवार्य कर दी जाती है तो मृत डोनर पूल में काफी वृद्धि हो सकती है. राज्य सरकार की ओर काफी गंभीरता से कदम उठाया जा रहा है.
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार की ओर से राज्य भर के अस्पतालों में ब्रेन स्टेम डेथ की घोषणा करने में राष्ट्रीय अंग और प्रत्यारोपण कार्यक्रम (एनओटीटीओ) के तहत पंजीकृत रिजनल अॉर्गन एंड टीशू ट्रांसप्लांट अॉर्गनाइजेशन (आरओटीटीओ) मदद करता है.
इस बावत सही समय पर ब्रेन डेथ की घोषणा के लिए आरओटीटीओ की ओर से विभिन्न प्रशिक्षण व कार्यशाला के जरिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. जिसमें पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम व त्रिपुरा के चिकित्सक भी शामिल हैं.
इन अंगों का किया जा सकता है दान
चिकित्सकों के अनुसार एक व्यक्ति 8 लोगों की जान बचा सकता है. किडनी, लीवर, हृदय , फेफड़े, आंत, कार्टिलेज, त्वचा, हड्डियां, कार्निया को दान किया जाता सकता है. मृतक के शरीर से लिए गये हर्ट को चार घंटे तथा 24 घंटे के भीतर किडनी व लीवर का प्रत्यारोपण करना अनिर्वाय होता है. वहीं कार्निया को 36 घंटे तक रखा जा सकता है. जबकि त्वचा, हड्डियां कार्टिलेज को कई वर्षों तक संरक्षित रखा सा सकता है.
प्रत्यारोपण के लिए केंद्र सरकार करती है मदद : अंग प्रत्यारोपण के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय अंग और प्रत्यारोपण आरंभ किया है. जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले रोगियों को प्रत्यारोपण खर्च के अलावा ट्रांसप्लांट के बाद एक साल तक दवाओं के खर्च के लिए आर्थिक रुप से मदद की जाती है. किडनी यानी गुर्दों के ट्रांसप्लांट सभी सार्वजनिक अस्पतालों में प्रत्यारोपण पर केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाती है.
तमिलनाडु और महाराष्ट्र के अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का भी अंगदान के क्षेत्र में प्रदर्शन अच्छा है. नोट्टो अब दिल्ली, जयपुर और इंदौर सहित देश के अन्य हिस्सों में प्रत्यारोपण कार्यक्रम के विस्तार में मदद कर रहा है. हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है.
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