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कलकत्ता : मेडिकल कॉलेज में फिर हुआ हृदय प्रत्यारोपण

Updated at : 21 Dec 2018 2:38 AM (IST)
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कलकत्ता :  मेडिकल कॉलेज में फिर हुआ हृदय प्रत्यारोपण

कलकत्ता : मेडिकल कॉलेज में हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया. गुरुवार सुबह 11.30 बजे प्रत्यारोपण की प्रक्रिया आरंभ हुई, जो शाम के 5.30 तक चली. प्रत्यारोपण के बाद मरीज की हालत स्थिर बतायी जा रही है. ग्रीन कॉरिडोर के जरिए मरीज के हार्ट को मेडिकल कॉलेज तथा लीवर तथा एक किडनी अपोलो अस्पताल पहुंचाया गया. सीएमआरआइ […]

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कलकत्ता : मेडिकल कॉलेज में हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया. गुरुवार सुबह 11.30 बजे प्रत्यारोपण की प्रक्रिया आरंभ हुई, जो शाम के 5.30 तक चली. प्रत्यारोपण के बाद मरीज की हालत स्थिर बतायी जा रही है. ग्रीन कॉरिडोर के जरिए मरीज के हार्ट को मेडिकल कॉलेज तथा लीवर तथा एक किडनी अपोलो अस्पताल पहुंचाया गया.
सीएमआरआइ ने किया ब्रेन डेथ घोषित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोलाघाट के रहनेवाला सजल कर (20) एक सड़क हादसे का शिकार हो गया था और उसके सिर पर गंभीर चोट आयी थी. वह बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था.
इलाज के लिए मरीज को 18 दिसंबर की सुबह 3 बजे महानगर के सीएमआरआइ अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां चिकित्सकों ने बुधवार सुबह सजल को ब्रेन डेथ घोषित किया. इसके बाद अस्पताल ने सुबह 7.30 बजे रोटो (आरओटीओ) के अधिकारियों‍ से संपर्क किया.
काउंसिलिंग के बाद उसके परिजन अंगदान के लिए तैयार हुए और सजल का हृदय, दोनों किडनी और लीवर दान कर दिया. सीके बिरला अस्पताल के सीइओ उत्तम बोस ने बताया कि दूसरी बार हमनें किसी मरीज को ब्रेन डेथ घोषित किया है. इससे करीब तील लोगों को नया जीवन मिलेगा.
सजल का दिल हबीबुल को
सजल कर का हृदय मुर्शिदाबाद के हबीबुल रहमान (40) को मिला है. हबीबुल कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कार्डियो थोरेसिक वैसकुलर साइसेंस (सीटीवीएस) विभाग में गत करीब 20 दिनों से इलाजरत हैं. हबीबुल के हृदय का 15 फीसदी हिस्सा ही कार्य कर रहा था.
विभागाध्यक्ष पी मुखर्जी के नेतृत्व 12 चिकित्सकों की टीम ने इस सफल हार्ट प्रत्यारोपण को अंजाम दिया. फिलहाल हबीबुल की हालत स्थिर बतायी जा रही है.
इन्हें मिला किडनी व लीवर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक किडनी सीएमआरआइ को और एक अपोलो के मरीज को मिली है, जबकि सजल का लीवर पीजी के मरीज को मिला. लीवर जयप्रतिम घोष (38) को दिया गया है. वह दक्षिण 24 परगना को बारुईपुर का रहनेवाला है.
करीब छह महीने से श्री घोष की चिकित्सा एसएसकेएम (पीजी) में चल रही थी. पीजी में लीवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया चली. वहीं एसएसकेएम हॉस्पिटल कोे ही मरीज की त्वचा दान की गयी जबकि कार्डिनिया शंकर नेत्रालय को दान की गयी.
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