एक मंच पर आयें तृणमूल माकपा व अन्य दल : मेधा

Updated at : 17 Nov 2018 5:42 AM (IST)
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एक मंच पर आयें तृणमूल माकपा व अन्य दल : मेधा

कोलकाता : लोगों के अधिकार, संवैधानिक व सामाजिक अधिकार की रक्षा समेत कुछ ऐसे अहम मुद्दे हैं, जिसको लेकर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और माकपा समेत अन्य विपक्षी दलों को एक मंच पर आना चाहिये. मौजूदा समय में पूरे देश की स्थिति विषम है, ऐसे में जन आंदोलनों के सशक्तीकरण की ज्यादा […]

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कोलकाता : लोगों के अधिकार, संवैधानिक व सामाजिक अधिकार की रक्षा समेत कुछ ऐसे अहम मुद्दे हैं, जिसको लेकर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और माकपा समेत अन्य विपक्षी दलों को एक मंच पर आना चाहिये. मौजूदा समय में पूरे देश की स्थिति विषम है, ऐसे में जन आंदोलनों के सशक्तीकरण की ज्यादा आवश्यकता हो गयी है.
यह बात नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने शुक्रवार को कही. वे महानगर के प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि संवैधानिक व सामाजिक अधिकार की रक्षा की मांग को लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर यानी दो अक्तूबर को जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) की ओर से राष्ट्रव्यापी संविधान सम्मान यात्रा गुजरात के दांडी से शुरू की गयी थी.
संविधान सम्मान यात्रा शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पहुंची. यात्रा 18 नवंबर तक राज्य के विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए असम की ओर रवाना हो जायेगा. 10 दिसंबर को यात्रा दिल्ली पहुंचेगी. संवाददाता सम्मेलन के दौरान मेधा पाटकर ने भाजपा नीत केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि गत चार वर्षों में किसानों, मजदूरों, श्रमिक वर्ग की स्थिति काफी दयनीय हो गयी है. लोग भाजपा के लुभावने बातों की असलियत जान गये हैं. किसानों को उनकी ऊपज की कीमत नहीं मिल पा रही है वहीं श्रमिक वर्ग और देश के युवक बेरोजगार की मार झेल रहे हैं.
दलितों, गरीबों पर अत्याचार क्या भाजपा सरकार रोक पायी है? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार में संविधान बदलने की हिम्मत नहीं है लेकिन संशोधन के नाम पर कई कानून में बदलाव की उनकी कोशिश जारी है. देश में संविधान की अवमानना की जा रही है. इसकी खिलाफत जरूरी है. देश मेें कारपोरेट कंपनियों का हित देखा जा रहा है लेकिन आम जनता के हित की अनदेखी हो रही है. सांप्रदायिक शक्तियों को बल मिल रहा है. पश्चिम बंगाल की भूमि क्रांति की है.
देश में फैली विषम स्थिति के खिलाफ यहां जन आंदोलनों को मजबूती मिलनी चाहिए. यहां राजनीतिक हिंसा को खत्म करना होगा. साथ ही कई महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वता से परे हटकर साथ खड़ा होना होगा. सेक्यूलर फोर्स को एक होने की जरूरत है. अगले वर्ष देश में लोकसभा चुनाव है. जन आंदोलन में शामिल लोगों की मुख्य मांगें हैं कि किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाये.
साथ ही श्रमिक समेत हर वर्ग के श्रमजीवी लोगों के हित का ख्याल रखा जाये. जिस पार्टी की घोषणापत्र यह होगी देश के किसान, श्रमिक वर्ग उनका साथ देंगे. मेधा पाटकर ने कहा कि 29-30 नंवबर को अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय की ओर से किसानों की संपूर्ण कर्ज माफ किये जाने समेत कई मुद्दों को लेकर दिल्ली में हल्ला बोल अभियान चलाया जायेगा.
अहिरीटोला घाट में सफाई की जरूरत
संविधान सम्मान यात्रा के दौरान मेधा पाटकर महानगर स्थित अहिरीटोला घाट पहुंचीं. उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सरकार नदी के किनारे घाटों की मरम्मत तो करा रही है, लेकिन घाटों की साफ-सफाई पर ध्यान देने की जरूरत है. केवल नर्मदा ही नहीं देश की तमाम नदियां महत्वपूर्ण हैं. इन्हें प्रदूषण मुक्त करना जरूरी है.संवाददाता सम्मेलन के दौरान मानवाधिकार कर्मी सुजात भद्र, सामाजिक कार्यकर्ता समर बागची, किसान नेता अभिक साहा, भूपेंद्र रावत समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहे.
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