कोलकाता : ह्रदय के बाद अब महानगर में हुआ सफल लिवर प्रत्यारोपण

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Sep 2018 10:41 PM

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– 10 दिनों में यह तीसरा अंग प्रत्यारोपण – मेडिका में भर्ती मरीज के परिजनों ने ब्रेन डेड के बाद लिवर किया कोलकाता : अंग प्रत्यारोपण को लेकर कोलकाता इन दिनों काफी चर्चा में हैं. दस दिनों में यह तीसरा सफल अंग प्रत्यारोपण है. गत 24 सितंबर को यहां के निजी अस्पतालों ने दो लोगों […]

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– 10 दिनों में यह तीसरा अंग प्रत्यारोपण

– मेडिका में भर्ती मरीज के परिजनों ने ब्रेन डेड के बाद लिवर किया

कोलकाता : अंग प्रत्यारोपण को लेकर कोलकाता इन दिनों काफी चर्चा में हैं. दस दिनों में यह तीसरा सफल अंग प्रत्यारोपण है. गत 24 सितंबर को यहां के निजी अस्पतालों ने दो लोगों का सफल ह्रदय प्रत्यारोपण कर कीर्तिमान हासिल किया है. इस कड़ी में लिवर प्रत्यारोपण भी जुड़ गया. महानगर के अपोलो हॉस्पिटल ने कल्याणी निवासी विश्वरुप चटर्जी का सफलतापूर्वक लिवर प्रत्यारोपण किया है.

गौरतलब है कि विश्वरूप को लिवर देने वाला डोनर दक्षिण परगना जिला के बारूईपुर से है. उनका नाम चंपा नस्कर (47) है. उनके पति सपन नस्कर ने हमें बताया कि गत रविवार चम्पा बाथरूम जाते समय ही गिर पड़ी थी. इसके बाद ही उन्हें कई बार उल्टी हुई. तब हमने आनन-फानन में उन्हें मुकुंदपुर स्थित मेडिका सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया. जांच के बाद पता चला कि चंपा को सेरिब्रल अटैक पड़ा है. चिकित्सा शुरू हुई लेकिन उनकी स्थिति खराब होती गयी. उनका रक्तचाप नियंत्रित नहीं हो रहा था.

इस बीच शनिवार दोपहर को गहन चिकित्सकीय जांच के बाद चंपा को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया. अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिजनों की काउंसलिंग किये जाने पर वे अंग दान करने के लिए तैयार हुए. सपन ने बताया कि वे शनिवार को ही अंगदान कर दिये होते. लेकिन इस दिन उनके पुत्र का जन्मदिन था इसलिए रविवार को यह कार्य किया गया.

केवल लिवर ही आया काम

गौरतलब है कि मेडिका और अपोलो के चिकित्सक चंपा के लिवर और हार्ट दोनों को लेना चाह रहे थे. पर जिस मरीज को प्रत्यारोपित करना था उससे मैच नहीं होने की वजह से अपोलो के चिकित्सक हार्ट नहीं ले सके. मरीज का केवल लिवर ही लिया गया. इस संबंध में मेडिका के कार्डियक क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ अर्पण चक्रवर्ती ने हमें बताया कि अस्पताल की ब्रेन डेथ कमेटी ने नियमानुसार दो बार एपनिया की जांच के बाद शुक्रवार रात के 2 बजे मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया.

नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के नियमानुसार ही सारी प्रक्रिया की गयी है. उधर, अपोलो में दोपहर 1.05 मिनट पर विश्वरुप का लिवर प्रत्यारोपण शुरू किया गया, जो देर शाम तक चला. मेडिका के चेयरमैन डॉ आलोक राय तथा अस्पताल के उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) तथा कार्डियो थोरेसिर सर्जन का कहना है कि हमें खुशी हो रही है यह देख कर कि लोग अंगदान के प्रति जागरूक हो रहे हैं. चंपा के परिजनों को हम अस्पताल प्रबंधन की ओर से तहे दिल से इस अंगदान के लिए धन्यवाद देते हैं.

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