कॉलेजों में शीघ्र होगी प्रिंसिपलों की नियुक्ति
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Aug 2018 1:53 AM
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कोलकाता : महानगर व अन्य जिलों के कुछ कॉलेज फिलहाल बिना प्रिंसिपल के ही चलाये जा रहे हैं. इन कॉलेजों में टीचर इनचार्ज के भरोसे काम चलाया जा रहा है. जरूरत के हिसाब से अब बहुत शीघ्र महानगर के पचास कॉलेजों में पूर्णकालीन प्रिंसिपलों की नियुक्ति की जायेगी. इसके लिए पश्चिम बंगाल कॉलेज सर्विस कमिशन […]
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कोलकाता : महानगर व अन्य जिलों के कुछ कॉलेज फिलहाल बिना प्रिंसिपल के ही चलाये जा रहे हैं. इन कॉलेजों में टीचर इनचार्ज के भरोसे काम चलाया जा रहा है. जरूरत के हिसाब से अब बहुत शीघ्र महानगर के पचास कॉलेजों में पूर्णकालीन प्रिंसिपलों की नियुक्ति की जायेगी. इसके लिए पश्चिम बंगाल कॉलेज सर्विस कमिशन (सीएससी) द्वारा योग्य उम्मीदवारों के साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है.
इस विषय में सीएससी के एक अधिकारी ने बताया कि पहले योग्य उम्मीदवारों की एक सूची असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए निकाली गयी. राज्य के सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेजों द्वारा भी प्रिंसिपलों के पदों के लिए आवेदन किया गया था. इनमें से कुछ चुने गये नामों की सूची कमिशन द्वारा अलग कर दी गयी है. कॉलेजों में चुने गये नामों की सिफारिश भेज दी गयी है. इसमें प्रथम चरण में लगभग पचास कॉलेजों में सितंबर के पहले सप्ताह में नियुक्ति की जायेगी.
नियुक्ति के बाद भी कई ऐसे कॉलेज बचते हैं जहां, टीचर इनचार्ज से काम चलाया जा रहा है. पिछले साल अक्टूबर में कमीशन द्वारा इसका विज्ञापन निकाला गया था. इसमें प्रिंसिपल पद के लिए वैकेंसी निकाली गयी थी. इसके लिए 100 शिक्षकों ने आवेदन किया था. इनमें से 84 को चुना गया. फाइनल उम्मीदवारों में से 72 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. चयन होने के बाद 10 शिक्षकों ने ज्वाइन करने से इंकार कर दिया. इनमें से 50 को नियुक्ति के लिए अंतत: बुलाया गया.
इस पद के लिए साक्षात्कार फरवरी में लिया गया था. कुछ प्रिंसिपलों के सेवानिवृत्त होने व त्यागपत्र देने के बाद प्रति वर्ष कई पद कॉलेजों में खाली हो जाते हैं. अब 50 पदों पर नियुक्ति की जायेगी. राज्य के कई अन्य कॉलेजों में भी कई पद खाली पड़े हुए हैं. इससे पहले आखिरी बार 2016 में राज्य के सरकारी कॉलेजों में नियुक्ति की गयी थी. कमीशन सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति करने में अभी सफल नहीं हुआ है. कमीशन सूत्रों का कहना है कि सरकार की यह नीति बनायी गयी है कि कॉलेजों में पूर्णकालिक प्रिंसिपलों की नियुक्ति की जानी चाहिए, अस्थायी तौर पर नहीं.
कॉलेजों में टीचर इनचार्ज के भरोसे काम नहीं चलाया जा सकता है. नियमानुसार, अगर कोई प्रिंसिपल सेवानिवृत्त होकर चला जाता है तो नयी नियुक्ति होने तक कॉलेज के सीनियर टीचर को ही टीचर इनचार्ज के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए लेकिन यह कुछ समय तक ही संभव है. देखा गया है कि कई कॉलेजों में अंशकालीन शिक्षक व कॉन्ट्रेक्ट पर रखे गये शिक्षक ही टीचर इनचार्ज के रूप में काम कर रहे हैं. इस पर आपत्ति की गयी.
सरकार नहीं चाहती है कि कोई भी वरिष्ठ शिक्षक को कॉलेज चलाने का दायित्व सौपा जाये, क्योंकि उनको कॉलेज के प्रशासनिक काम का अनुभव नहीं होता. ऐसे में संस्थानों के कामकाज पर काफी असर पड़ता है. कॉलेज में छात्रों व शिक्षकों से जुड़े मसलों का समाधान करने के लिए कॉलेज को प्रशासकीय अनुभवी अधिकारियों की जरूरत है. इस हिसाब से कॉलेजों में स्थायी प्रिंसपिलों की नियुक्ति के लिए कमीशन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है.
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