...तन-मन मिट जायेगा, जब शराब के भंवर में जीवन फंस जायेगा, तेजी से महिलाओं को गिरफ्त में ले रही है शराब

Published at :20 Aug 2018 1:51 AM (IST)
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...तन-मन मिट जायेगा, जब शराब के भंवर में जीवन फंस जायेगा, तेजी से महिलाओं को गिरफ्त में ले रही है शराब

कोलकाता : नशा के कई जरिया हैं, जिनमें एक नाम शराब का भी है. यह जिसको अपनी गिरफ्त में लेता है वह शराब को नहीं बल्कि शराब उसे पीने लगता है. चिंता वाली बात तो यह है कि अब यह लत महिलाओं में भी बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के […]

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कोलकाता : नशा के कई जरिया हैं, जिनमें एक नाम शराब का भी है. यह जिसको अपनी गिरफ्त में लेता है वह शराब को नहीं बल्कि शराब उसे पीने लगता है. चिंता वाली बात तो यह है कि अब यह लत महिलाओं में भी बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति वर्ष औसतन 15 वर्ष से अधिक उम्र का हर पुरुष 33 लीटर शराब पीता है जबकि महिला में शराब पीने का परिमाण 11 लीटर बताया गया है.
यह आंकड़ा देश में खपत होने वाले शराब के कुल परिमाण के अनुसार बताया गया है. गत कुछ वर्षों मेें शराब के आदि होने वाले कुल लोगों में करीब 60 प्रतिशत पुरुषों और 90 प्रतिशत महिलाओं की मौत की वजह यही नशा का जरिया बना. उपरोक्त बातों से शायद यह कहना गलत नहीं होगा कि तन मिट जायेगा, मन मिट जायेगा, जब शराब के भंवर में जीवन फंस जायेगा.
हर दिन 15 लोगों की मौत की वजह शराब
एनसीआरबी की वर्ष 2013 की एक रिपोर्ट में भारत में प्रतिदिन करीब 15 लोगों की मौत की वजह शराब की लत और उससे होने वाली बीमारी होती है. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओइसीडी) की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व में शराब पीना मौत और अपाहिज होने का पांचवा सबसे प्रमुख कारण बन गया है.
वहीं डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुुसार देश में होने वाली कुल मौत में करीब 7.6 प्रतिशत पुरुषों और लगभग 4 प्रतिशत महिलाओं की मौत शराब का सेवन बनता है. इतना ही नहीं में कुछ वर्षों में देश में औसतन शराब सेवन के परिमाण में करीब 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि पूरे विश्व में करीब 16 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है.
निम्न व उच्च वर्ग की महिलाएं नशे की गिरफ्त में ज्यादा
दुनिया भर में शराब पीने वालों में पुरुषों की संख्या, महिलाओं के मुकाबले ज्यादा है लेकिन अब महिलाओं में भी इसकी लत बढ़ती जा रही है. मनोचिकित्सक अभिषेक हंस ने बताया कि कई रिपोर्ट के अध्यन के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा समय में हमारे देश में खासतौर से पश्चिम बंगाल में निम्न और उच्च वर्ग से ताल्लुक रखने वाली महिलाएं शराब की गिरफ्त में ज्यादा हैं.
शराब का सेवन करने वालों की दो श्रेणी हैं. पहली सोशल ड्रिंकर (किसी समारोह या कार्यक्रम में कभी-कभी शराब पीने वाला) और दूसरी हबीचुअल ड्रिंकर (नियमित रूप से शराब पीने वाला). शुरुआत शराब के थोड़े सेवन के साथ ही होती है लेकिन जब व्यक्ति इसका आदि हो जाता है तब वह इसके सेवन की वजह ढूंढ़ने लगता है.
महिलाओं के लिये ज्यादा खतरनाक : चिंता की बात ये है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के शरीर पर शराब के सेवन बुरा असर ज़्यादा और तेजी से होता है. चिकित्सकों का कहना है कि अल्कोहल पचाने के लिए लिवर से अल्कोहल डी-हाइड्रोजिनेस नाम का एंजाइम निकलता है. महिलाओं में ये एंजाइम कम निकलता है.
इसकी वजह से उनके लिवर को शराब पचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसके अलावा जो औरतें ज्यादा शराब पीती हैं, उनमें दूसरे नशों की लत पनपने की संभावना पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा होती है. शराब के सेवन से हाई ब्‍लड प्रेशर, पेट की बीमारियां, यकृत (लीवर) की बीमारी विशेषतः सिरोसिस, स्नायु तंत्र की कमज़ोरियां, कैंसर जैसी बीमारी हो सकती हैं.
कैसे मिले छुटकारा
मनोचिकित्सक अभिषेक हंस के अनुसार शराब की लत में फंसे व्यक्ति का इलाज खुद व्यक्ति पर निर्भर करता है. शराब के छुटकारे के लिये पीड़ित व्यक्ति को दवा दी जाती है, साथ ही काउंसिलिंग भी की जाती है. सामान्य तौर पर पीड़ित छह महीनों में शराब की लत छोड़ सकता है. इसके बाद मैनटेनेस ट्रीटमेंट की जाती है जो करीब डेढ़ वर्ष तक चल सकता है. शराब की लत छूटने के बाद भी व्यक्ति उसके चंगुल में फंस सकता है. सप्ताह में एक बार उसकी काउंसिलिंग की जाती है ताकि वह पूरी तरह से ठीक हो पाये.
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