एक लाख रुपये के माल परिवहन पर अब ई विल नहीं : मित्रा
Updated at : 25 Jul 2018 2:00 AM (IST)
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राज्य सरकार ने लघु व मध्यम श्रेणी के उद्यमियों को राहत देते हुए माल परिवहन के क्षेत्र में ई विल सीमा में बढ़ोतरी की है. अब इ विल की न्यूनतम सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ा कर एक लाख रुपये कर दी गयी है. श्री मित्रा ने मंगलवार को विधानसभा में विधायक ज्योर्तिमय कर के […]
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राज्य सरकार ने लघु व मध्यम श्रेणी के उद्यमियों को राहत देते हुए माल परिवहन के क्षेत्र में ई विल सीमा में बढ़ोतरी की है. अब इ विल की न्यूनतम सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ा कर एक लाख रुपये कर दी गयी है. श्री मित्रा ने मंगलवार को विधानसभा में विधायक ज्योर्तिमय कर के सवाल के जवाब में बताया कि जीएसटी में एक से दूसरे राज्य में माल ले जाने पर ई विल की जरूरत होती है.
इस नियम के पालन से राज्य के व्यवसाय को क्षति पहुंच रही है. इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने निर्णय किया है कि राज्य में इ-विल की सीमा पहले 50 हजार रुपये थी. उसे बढ़ा कर एक लाख रुपये कर दी गयी है. इसके साथ ही लघु व मध्यम व्यवसायियों को सुविधा देने के लिए वस्त्र, होजियरी, चमड़ा व मुद्रण आदि के जॉब वर्क व इ-विल की जरूरत को समाप्त कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मूलभूत सुविधा विकसित किये बिना ही जीएसटी लागू कर दिया है.
इस कारण जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में लघु व मध्यम श्रेणी के व्यापारियों को काफी परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि जीएसटी में कई व्यवसायी ठीक तरह से पहले से मौजूद माल पर लगे वैन या एक्साइज ड्यूटी का इनपुट नहीं पा रहे हैं. इस कारण इस बाबत फार्म नहीं जमा कर पा रहे हैं और उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि जीएसटी की ऑनलाइन त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण व्यापारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
श्री मित्रा ने कहा कि जीएसटीएन साॅफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण हवाला लेनदेन बढ़ रहा है. जीएसटीएन साॅफ्टवेयर पर लेनदेन का अत्यधिक बोझ है, जिसके कारण हस्तलिखित फार्म भरे जा रहे हैं. उन्होंने कहा : हमने जुलाई (2017) में जीएसटी शुरू नहीं करने का आग्रह किया था, लेकिन केंद्र ने नहीं सुनी. इसके परिणामस्वरूप, जीएसटीएन साॅफ्टवेयर बड़ी संख्या में लेनदेन को संभालने में नाकाम रहा है. श्री मित्रा ने कहा : अब, कई कंपनियां ने हस्तलिखित रिटंर्स भरे हैं, क्योंकि साॅफ्टवेयर भारी लोड उठाने में नाकाम है. इसके परिणामस्वरूप, हवाला लेनदेन बढ़ा है.
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