वेस्ट बंगाल क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन ने की जांच

Updated at : 10 Jul 2018 2:47 AM (IST)
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वेस्ट बंगाल क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन ने की जांच

कोलकाता : इलाज में लापरवाही बरतने वाले दो निजी नर्सिंग होम पर गाज गिरी है. वेस्ट बंगाल क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन ने जांच के बाद दोनों पर जुर्माना लगाया है. यह जानकारी कमिशन के चेयरमैन जस्टिस असीम कुमार राय ने दी. हेल्थ कमीशन के कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन करते हुए जस्टिस राय ने यह जानकारी […]

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कोलकाता : इलाज में लापरवाही बरतने वाले दो निजी नर्सिंग होम पर गाज गिरी है. वेस्ट बंगाल क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन ने जांच के बाद दोनों पर जुर्माना लगाया है. यह जानकारी कमिशन के चेयरमैन जस्टिस असीम कुमार राय ने दी. हेल्थ कमीशन के कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन करते हुए जस्टिस राय ने यह जानकारी दी.
पहला मामला बेहला स्थित एक निजी नर्सिंग होम का है. इस मामले में मरीज देवजीत कुमार घोष ने अस्पताल के नर्सिंग होम के खिलाफ ममाला दर्ज किया था. प्राप्त जानकारी के अनुसार फिस्टुला की सर्जरी के लिए श्री घोष अस्पताल गत वर्ष चार दिसंबर को दाखिल हुए थे. अगले दिन सर्जरी की जानी थी, लेकिन ऑपरेशन के पहले शारीरिक जांच के लिए रक्त कै सैंपल लिया गया थ.
इस दौरान चिकित्सकों ने एचअाइबी जांच भी करायी थी. रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल के आरएमओ ने श्री घोष को बताया कि वह एचआइवी पॉजिटिव हैं. इलसिए फिलहाल सर्जरी संभव नहीं. अगले दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गयी.
जस्टिस राय ने कहा कि एचआइवी पॉजिटिव की बात सुन कर मरीज मानसिक रूप में कमजोर पड़ गया था, लेकिन अस्पताल से छुट्टी मिलने पर उसने फिर नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जांच करायी तो पता चला की वह इस जानलेवा बीमारी के चपेट में हैं ही नहीं. इसके बाद मरीज के परिजनों कमिशन से इसकी शिकायत की. जस्टिस राय ने बताया कि जांच के बाद कमीशन ने अस्पताल प्रबंधन को दोषी पाया और उस 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.
हेल्थ कमिशन ने पश्चिम मेिदनीपुर के नर्सिंग होम पर लगाया 2 लाख 10 हजार का जुर्माना
हेल्थ कमिशन ने एक अन्य मामले में सुनवायी करते हुए पश्चिम मिदनापुर स्थित एक निजी अस्पताल पर 2 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करना होगा. घटना 21 मई 2017 की है. इस अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मरीज का एक हाथ काट दिया गया. मरीज का नाम बादल चंद मन्ना है.
बायें हाथ की कलाई टूट जाने के कारण उसे 21 मई को उक्त नर्सिंग होम में दाखिल कराया गया था. जहां 22 मई को डॉ लतिफ ने सर्जरी की. बता दें कि डॉ लतिफ मिदनापुर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से भी जुड़े हुए हैं. सर्जरी के बाद चिकित्सक दो दिन अस्पताल गया ही नहीं. उसकी अनुपस्थिति में अस्पताल के अन्य किसी डॉक्टर ने भी मरीज की इलाज नहीं की. दो दिन बाद चिकित्सक के अस्पताल पहुंचने पर पाया की मरीज के हाथ की हालत गंभीर हो गयी है. कई तरह की जांच के बाद चिकित्सक ने उसे कोलकाता रेफर कर दिया.
कोलकाता में कई निजी अस्पतालों का चक्कर लगाने के बाद अंत में परिजनों ने मरीज को इकबालपुर स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया. उसके हाथ में गैंगरीन फैल जाने के कारण चिकित्सकों टेनिस एल्बो तक के हिस्से को काट कर अलग कर दिया. उधर,मरीज के इलाज के लिए उक्त चिकित्सक पहले ही क्षतिपूर्ति के तौर पर दो लाख 90 हजार का भुगतान कर चुका है.
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