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केंद्र व राज्य सरकार के बीच चीनी ने घोली कड़वाहट

Updated at : 13 May 2018 2:22 AM (IST)
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केंद्र व राज्य सरकार के बीच चीनी ने घोली कड़वाहट

कोलकाता : चीनी की वजह से केंद्र व राज्य सरकार के बीच कड़वाहट पैदा हो गयी है. कारण है चीनी पर केंद्र सरकार ने सेस लगाने का फैसला किया है, जिससे पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की सरकार नाराज है और केंद्र के इस फैसले को मानने के लिए तैयार नहीं है. जीएसटी को लेकर […]

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कोलकाता : चीनी की वजह से केंद्र व राज्य सरकार के बीच कड़वाहट पैदा हो गयी है. कारण है चीनी पर केंद्र सरकार ने सेस लगाने का फैसला किया है, जिससे पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की सरकार नाराज है और केंद्र के इस फैसले को मानने के लिए तैयार नहीं है.
जीएसटी को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के बीच खींचतान थोड़ी कम हो गयी है, लेकिन चीनी ने दोनों के बीच फिर से कड़वाहट पैदा कर दी है.
केंद्र के फैसले के खिलाफ बंगाल सरकार से खोला मोर्चा
गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक के दौरान ही केंद्र सरकार ने चीनी पर सेस लगाने का प्रस्ताव पेश किया था. इसके बाद ही इसे लेकर विवाद शुरू हो गया है. केंद्र सरकार का दावा है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो इससे केंद्र सरकार के पास लगभग 6700 करोड़ रुपये आयेंगे और इस राशि को केंद्र सरकार चीनी मिल मालिकों को दे देगी और चीनी मालिक इस राशि को गन्ना के किसानों को देंगे.
इससे किसानों को उनकी उपज की कीमत मिलेगी. लेकिन केंद्र सरकार के इस फैसले का पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री डॉ अमित मित्रा ने विरोध किया है. डॉ अमित मित्रा के साथ अब आंध्र प्रदेश, ओड़िशा व केरल जैसे राज्य भी खड़े हो गये हैं.
क्या कहना है डॉ अमित मित्रा का
इस संबंध में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री डॉ अमित मित्रा ने कहा कि यह वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) के सिद्धातों के खिलाफ है. केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ बंगाल के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु व दिल्ली ने भी इसका विरोध किया है.
उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद से सेस लगाने की प्रथा खत्म हो गयी है. सेस सिर्फ चुनिंदा आइटम जैसे लग्जरी व संबधी अन्य उत्पादों पर लगाया जा सकता है. लेकिन चीनी पर सेस लगा कर केंद्र सरकार ने जनविरोधी कार्य किया है.
अगर इस प्रकार से उत्पादों पर अलग से सेस लगाने का क्रम जारी रहा तो जीएसटी को जिस सिद्धातों से लागू किया गया है, उसका कोई मतलब नहीं होगा. उन्होंने केंद्र सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है.
चीनी पर पांच प्रतिशत जीएसटी के साथ तीन रुपये सेस का प्रस्ताव
चीनी पर केंद्र सरकार ने जीएसटी के तहत पांच प्रतिशत कर निर्धारित किया है, लेकिन पांच प्रतिशत कर के साथ ही केंद्र अब प्रति किलो तीन रुपये की दर से सेस लगाना चाहती है. केंद्र सरकार का यह फैसला ममता बनर्जी की सरकार को मंजूर नहीं है. केंद्र ने चीनी पर सेस लगाने के लिए विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों को लेकर एक विशेष कमेटी का गठन किया है.
बंगाल सरकार के तल्ख रवैये को देखते हुए केंद्र सरकार ने बंगाल के वित्त मंत्री को इस कमेटी में शामिल नहीं किया है. इस कमेटी का संयोजक असम के वित्त मंत्री हिमंत विश्वशर्मा को बनाया गया है. साथ ही कमेटी में भाजपा शासित राज्यों के ही अधिकांश वित्त मंत्रियों को शामिल किया गया है. इससे इसे आसानी से पारित किया जा सकेगा.
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