बंगाल : पंचायत चुनाव का भविष्य अब भी अदालतों में फंसा हुआ, तय तारीख को लेकर संशय

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 May 2018 8:29 AM

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हाइकोर्ट : मतदान के लिए सुरक्षा संबंधी याचिका पर सुनवाई पूरी पंचायत चुनाव का भविष्य अब भी अदालतों में फंसा हुआ है. मंगलवार को एक मामले में हाइकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को इमेल से भेजे गये नामांकन स्वीकार करने का निर्देश दिया. वहीं सुरक्षा के मुद्दे पर भी दायर याचिका पर मंगलवार […]

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हाइकोर्ट : मतदान के लिए सुरक्षा संबंधी याचिका पर सुनवाई पूरी
पंचायत चुनाव का भविष्य अब भी अदालतों में फंसा हुआ है. मंगलवार को एक मामले में हाइकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को इमेल से भेजे गये नामांकन स्वीकार करने का निर्देश दिया. वहीं सुरक्षा के मुद्दे पर भी दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई. लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं आया. इससे पंचायत चुनाव की तिथि को लेकर अब भी संशय की स्थिति बनी हुई है. गौरतलब है कि 14 मई को पंचायत चुनाव निर्धारित है.
कोलकाता : आगामी 14 मई को राज्य में पंचायत चुनाव के लिए मतदान कराना मुश्किल लग रहा है. कलकत्ता हाइकोर्ट में मंगलवार को मतदान के दौरान सुरक्षा संबंधी मामले की सुनवाई पूरी हो गयी.
हालांकि मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य व न्यायाधीश अरिजीत बंद्योपाध्याय की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा है. दूसरी ओर, पंचायत चुनाव से संबंधित दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई के लिए गुरुवार का दिन हाइकोर्ट ने निर्धारित किया है.
याचिका के जनहित में होने पर सवाल: मामले की सुनवाई में राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल किशोर दत्त ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस की ओर से अधीर चौधरी द्वारा दायर मामला जनहित याचिका नहीं है. श्री चौधरी ने राजनीतिक स्वार्थ के तहत मामला दायर किया है. सुप्रीम कोर्ट के कई निर्देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आम जनता के हित में यह मामला नहीं है. चुनाव संबंधी सभी विषयों का दायित्व चुनाव आयोग का है. किसी अन्य अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्ययोग्य नहीं है.
अनावश्यक कहे जाने पर अदालत में श्री चौधरी ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि चुनाव के पहले ही जिस तरह का हिंसा का माहौल बना है वह राज्य में लोकतंत्र को खतरे में डालता है. चुनाव के पहले बिना प्रतिद्वंद्विता के ही तृणमूल ने 34 फीसदी सीटों पर जीत हासिल कर ली है. छह अप्रैल को अदालत का निर्देश रहने पर भी कई उम्मीदवार सुरक्षा की वजह से नामांकन जमा नहीं कर सके. जो अदालत की अवमानना के समान है. अदालत के समक्ष उनका अनुरोध है कि केंद्रीय बल की सुरक्षा में चुनाव कराये जायें.
सुरक्षा व्यवस्था से राज्य चुनाव आयोग संतुष्ट
राज्य चुनाव आयोग की ओर से शक्तिनाथ मुखर्जी ने अदालत में कहा कि राज्य सरकार से सुरक्षा संबंधी एक ड्राफ्ट आयोग के पास आया है. राज्य चुनाव आयोग उपयुक्त तौर पर मतदाताओं को सुरक्षा प्रदान करते हुए तय तिथि (14 मई) के दिन ही चुनाव कराना चाहता है.
राज्य सरकार ने मतदाताओं की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाये हैं यह दाखिल करने के लिए कहा गया. राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल ने पंचायत चुनाव में सुरक्षा संबंधित एक रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि हर बूथ पर एक सशस्त्र पुलिसकर्मी व एक लाठीधारी पुलिसकर्मी की व्यवस्था राज्य सरकार ने की है. 71 हजार 500 सशस्त्र पुलिस राज्य सरकार देगी. इसके अलावा अन्य राज्यों से अतिरिक्त दो हजार सशस्त्र पुलिस आयेगी. वोट की सुरक्षा में 500 इंस्पेक्टर, 10 हजार एसआइ, एएसआइ, 61 हजार कॉन्सटेबल, होमगार्ड व एनवीएफ के 80 हजार सिविक वॉलंटियर तैनात रहेंगे.
खंडपीठ ने एडवोकेट जनरल से जानना चाहा कि प्रत्येक बूथ के लिए एक सशस्त्र व एक लाठीधारी पुलिसकर्मी ही क्या काफी है? खंडपीठ ने आयोग से जानना चाहा कि वह केंद्रीय बल चाहता है या नहीं. इस पर एडवोकेट जनरल ने कहा कि चुनाव में सुरक्षा का मामला आयोग व राज्य सरकार का विषय है.
आयोग जब संतुष्ट है तो अदालत कैसे हस्तक्षेप कर सकती है. चुनावकर्मियों की सुरक्षा के विषय में सरकारी कर्मचारियों की ओर से देवाशीष शील ने कहा कि राज्य के दो लाख 92 हजार 335 सरकारी कर्मचारी चुनाव के काम में हर वर्ष हिस्सा लेते हैं.
लेकिन जिला परिषद, पंचायत समिति व ग्राम पंचायत में हर बूथ में तीन सशस्त्र पुलिस रहते हैं. अतिरिक्त पुलिस की जरूरत चुनाव परिचालन के लिए है. 2013 के चुनाव में हर बूथ में राज्य पुलिस के अलावा केंद्रीय बल के जवान भी तैनात थे. लेकिन इस बार उसकी व्यवस्था नहीं है. लिहाजा सरकारी कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा की चिंता है. सभी पक्षों की राय सुनकर खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा.
तय तिथि पर चुनाव की संभवाना नहीं : विकास रंजन भट्टाचार्य
दूसरी ओर, विकासरंजन भट्टाचार्य ने कहा कि खंडपीठ के फैसले के मुताबिक चुनाव आयोग यदि इमेल से नामांकन को ग्रहण करता है तो 14 मई को पंचायत चुनाव के लिए मतदान की संभावना नहीं है. इस तिथि पर जबरन मतदान कराया गया तो वह कानून की सहायता लेंगे.
क्या-क्या हुआ
मतदान के लिए सुरक्षा संबंधी याचिका पर मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य व जस्टिस अरिजीत बंद्योपाध्याय की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा
न्यायाधीश विश्वनाथ समाद्दार और न्यायाधीश अरिंदम मुखर्जी की पीठ ने राज्य चुनाव आयोग को इमेल से भेजे गये नामांकन स्वीकार करने का दिया निर्देश इमेल के संबंध में हाइकोर्ट के निर्देश के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट जाने का लिया फैसला
राज्य चुनाव आयोग का कहना है कि इमेल से नामांकन लेने का कोई प्रावधान नहीं है
इमेल से नामांकन ग्रहण करने पर हिंसा की घटनाओं में कमी आयेगी. शिकायतें भी कम होंगी. उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने पर मतदाताओं के पसंद के मौके भी बढ़ेंगे.
कलकत्ता हाइकोर्ट
हाइकोर्ट का इमेल से भेजे गये नामांकन स्वीकार करने का निर्देश
कोलकाता : कलकत्ता हाइकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनावों के लिए उन लोगों के नामांकन स्वीकार करने का आदेश दिया है जिन्होंने आयोग को इमेल के जरिये अपने दस्तावेज भेजे और जो जांच में वैध पाये गये. न्यायाधीश विश्वनाथ समाद्दार और न्यायाधीश अरिंदम मुखर्जी की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को 23 अप्रैल को तीन बजे तक इमेल के जरिये दायर किये गये वैध आवेदन स्वीकार करने का आदेश दिया.
इमेल के जरिये आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया गया है. उधर, हाइकोर्ट के इस निर्देश के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया है. बुधवार को आयोग सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है.
हाइकोर्ट के मुताबिक, इमेल से नामांकन ग्रहण करने पर हिंसा में मौत की घटनाओं में कमी आयेगी. शिकायतें भी कम होंगी. उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने पर मतदाताओं के पसंद के मौके भी बढ़ेंगे. हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग को सुझाव देने का अधिकार किसी राजनीतिक दल को नहीं है.
अदालत ने माकपा की ओर से दायर एक अपील पर सुनवायी करते हुए यह आदेश दिया. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यह उन उम्मीदवारों से संबंधित है, जिनके नाम अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत सूची में दिये गये हैं. राज्य चुनाव आयोग ने अपीलकर्ता की इमेल के जरिये नामांकन दायर करने की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि पश्चिम बंगाल पंचायत अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.
माकपा ने 800 से अधिक उम्मीदवारों की एक सूची जमा कराते हुए कहा था कि इन्हें निर्दिष्ट कार्यालय में नामांकन दाखिल करने से रोका गया था इसलिए इन्होंने आयोग को ई-मेल के जरिये दस्तावेज भेजे. अयाोग ने दावे का विरोध करते हुए कहा कि उसे नामांकन के आखिरी दिन 340 शिकायतें मिली थीं जिनमें से 25 इमेल के जरिये भेजी गयी थी. आयोग ने कहा कि 25 इमेल में इच्छुक उम्मीदवारों के 62 नामांकन पत्र शामिल हैं.
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