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बच्चे ने गलती से पी लिया एसिड, बची जान

कोल्ड ड्रिंक्स की जगह गलती से पी गया था सल्फ्यूरिक एसिड चिकित्सकों ने अाधुनिक पद्धति का प्रयोग कर बचायी जान बच्चे की आहार नली में स्टेंट डालना अत्यधिक दुर्लभ मामला कोलकाता : चिकित्सक को धरती का भगवान माना जाता है. कई बार इस धरती के भगवान की भूमिका को लेकर सवाल भी खड़े किये गये […]

कोल्ड ड्रिंक्स की जगह गलती से पी गया था सल्फ्यूरिक एसिड

चिकित्सकों ने अाधुनिक पद्धति का प्रयोग कर बचायी जान
बच्चे की आहार नली में स्टेंट डालना अत्यधिक दुर्लभ मामला
कोलकाता : चिकित्सक को धरती का भगवान माना जाता है. कई बार इस धरती के भगवान की भूमिका को लेकर सवाल भी खड़े किये गये हैं. लेकिन एक बार फिर यह साबित हो गया है कि डॉक्टर ही धरती के भगवान हैं. धरती के इस भगवान के एक ऐसे बच्चे को नया जीवन दिया जिसने सल्फ्यूरिक एसिड पी लिया. घटना मेडिका सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की है. मरीज का नाम विश्वा (नाम परिवर्तित) है. 10 वर्षीय इस बच्चे ने गलती से कोल्ड ड्रिंक के स्थान पर सल्फ्यूरिक एसिड पी लिया. इस वजह से गले को पेट से जोड़ने वाली आहार नली बुरी तरह से झुलस गयी थी. नतीजन भोजन तो दूर की बात उसे लार भी निगलने में परेशानी हो रही है.
वह करीब एक महीने से इस समस्या से जूझ रहा था. स्थिति में सुधार न होता देख स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मेडिका सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल रेफर कर दिया. करीब एक महीने से खाना न खा पाने की वजह विश्वा कुपोषण का शिकार हो गया था. उसका वजन भी घट कर महज 20 किलो रह गया था.
मेडिका सुपरस्पेशलटी हॉस्पिटल में कन्सलटेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ जयंत सामंता की देखरेख में उसकी चिकित्सका शुरू हुई. वहीं बेरियम स्वैलो एक्सरे समेत कई रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टरों को पता चला कि उसकी आहार नली का निचला हिस्सा बुरी तरह सिकुड़ गया है, जिसकी वजह से किसी भी चीज का पेट तक पहुंचना असंभव है. नली के सिकुड़े हिस्से को फिर से खोलना न केवल मुश्किल बल्कि जोखिम भरा भी था, क्योंकि उसकी उम्र महज 10 वर्ष थी, साथ ही वह कुपोषण का भी शिकार था.
क्या कहते हैं चिकित्सक : डॉ सामंता ने बताया कि करीब महीने भर बाद बच्चे की आहार नली के सिकुड़े हिस्से को फैलाने की प्रक्रिया के बारे में सोचा गया. प्रोसीजर के दौरान पता लगा कि सिकुड़े हुए हिस्से और बायीं सांस नली के बीच संक्रमण हो गया है. सिकुड़न वाली जगह के सख्त पड़ जाने की वजह से आहार नली को बैलून के जरिए आसानी से फैलाना संभव नहीं था, जबकि इस तरह के मामलों में आमतौर पर यही प्रक्रिया अपनायी जाती है, इसलिए आहार नली को फैलाने की प्रक्रिया टाल दी गयी. करीब एक महीने के दौरान आहार नली के सिकुड़े हिस्से को फैलाने की दो बार कोशिश की गयी. इससे बच्चे को तरल पदार्थ का सेवन कराया गया. मेडिका सुपरस्पेशलटी हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ प्रदीप्ता कुमार सेठी ने बताया कि आहार नली के सिकुड़े हिस्से को शरीर से बाहर निकालने और बाकी बचे हिस्से को पेट से सीधे जोड़ने के लिए सर्जरी की गयी. इसे जोड़ने के लिए मेटैलिक स्टेंट डाला गया. बच्चे की साइज का स्टेंट मिलना कठिन था क्योंकि बाजार में आमतौर पर बड़ों में इस्तेमाल होनेवाले स्टेंट ही उपलब्ध होते हैं. बच्चे के माता-पिता भी चाहते थे कि मेजर सर्जरी की जगह स्टेंट वाला विकल्प ही चुना जाये. सिकुड़ी हुई आहार नली में कवर्ड मेटैलिक स्टेंट लगाने की अनुशंसा आमतौर पर वयस्कों के लिए की जाती है, लेकिन बच्चों में ऐसे स्टेंट लगाने का मामला बहुत दुर्लभ है, क्योंकि प्रोसीजर के दौरान इसमें बहुत सारी तकनीकी दिक्कतें आती हैं. डॉ. सामंत और डॉ सेठी की टीम ने एंडोस्कोपी के जरिए विश्वा की आहार नली में आसानी से स्टेंट लगा दिया. स्टेंट लग जाने के बाद बच्चे की सेहत सुधर रही है. प्रोसीजर के अगले दिन से ही बच्चे को तरल पदार्थ दिया जा रहा है. दो हफ्ते बाद से बच्चा सामान्य दिनचर्या में व्यस्त हो गया. डेढ़ महीने के बाद स्टेंट हटा कर विश्वा की आहार नली को पहले की तरह खोल दिया गया है. अब वह पूरी तरह से स्वस्थ्य है.
फीडिंग ट्यूट दिया जाता था भोजन
अस्पताल में बच्चे की जीआइ एंडोस्कोपी की गयी, जिससे पता लगा कि उसकी आहार नली का निचला हिस्सा बुरी तरह सिकुड़ गया है. पेट में खाना पहुंचाने के लिए आहार नली के ऊपरी हिस्से को फैलाकर वहां से पेट तक फीडिंग ट्यूट डाला गया, जिसे आमतौर पर रायल ट्यूब के नाम से जानते हैं, ताकि बच्चे का कुपोषण खत्म किया जा सके.
Prabhat Khabar Digital Desk
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