कोलकाता : दिल्ली से आयी लिस्ट और चंदे की छपी रसीद से प्रदेश भाजपा में हड़कंप मची हुई है. जानकारी के अनुसार मोबाइल पर मिस्ड काॅल देकर भाजपा ने सदस्य बनाने का अभियान चलाया था. उसकी लिस्ट बूथ अनुसार प्रदेश नेतृत्व को मिल गयी है. अब उनके से संपर्क करने की बात है. इसके अलावा चंदा की रसीद जो कार्यकर्ताओं को मिल रही है, उनमें 500, 200, 100, 50 और 20 रुपये तक की रसीद है. रसीद में चंदा लेनेवाले और देनेवाले के नाम, बूथ और मोबाइल नंबर दिये गये हैं. इन्हें भरना होगा. इसके लिए अब भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों के घर जाना होगा. इसे लेकर प्रदेश भाजपा में हड़कंप मची हुई है.
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सदस्यता की सूची व चंदा की रसीद से प्रदेश भाजपा में हड़कंप
कोलकाता : दिल्ली से आयी लिस्ट और चंदे की छपी रसीद से प्रदेश भाजपा में हड़कंप मची हुई है. जानकारी के अनुसार मोबाइल पर मिस्ड काॅल देकर भाजपा ने सदस्य बनाने का अभियान चलाया था. उसकी लिस्ट बूथ अनुसार प्रदेश नेतृत्व को मिल गयी है. अब उनके से संपर्क करने की बात है. इसके अलावा […]
भाजपा के संगठन महामंत्री सुब्रत चटर्जी ने बताया कि वर्ष 2015 में बंगाल से मिस्ड काॅल देकर सदस्य बनने की तालिका 41 लाख तक पहुंच गयी थी. यह सिलसिला अब भी जारी है. यह संख्या 50 लाख तक पहुंच जायेगी. हमलोग इसमें तकरीबन 80 से 89 फीसदी लोगों तक पहुंच जायेंगे. उन्होंने कहा कि विधानसभा स्तर पर बने हमारे विस्तारक जिस रफ्तार से काम कर रहे हैं, उससे यह संख्या हम छू लेंगे. रसीद के पीछे मकसद लोगों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापन करना है, जिसका फायदा पार्टी को सीधे मिलेगा.
पार्टी के महासचिव राजू बनर्जी ने बताया कि अलग-अलग जिलों को अलग-अलग राशि बतौर चंदा में लेने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि कोलकाता जिले से जो चंदे की राशि मिलेगी, वह पुरुलिया या किसी अन्य जिले से उम्मीद करना बेमानी होगी. फिलहाल हम इस तरह का कार्यक्रम ले रहे हैं कि पार्टी के संगठन को सीधा फायदा मिल सके.
हालांकि नाम नहीं छापने की शर्त पर भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने बताया कि पार्टी की ओर से लगातार इतने कार्यक्रम लिये जा चुके हैं कि लोगों को दम लेने तक की फुर्सत नहीं है. मिस्ड काॅल देकर सदस्य बनाने का कार्यक्रम जब पार्टी ने लिया था, तो हम भी काफी उत्साहित थे. समूह बनाकर हमलोग निकलते थे और लोगों का मोबाइल लेकर सदस्य बना देते थे. लेकिन अब दिल्ली ने उनकी लिस्ट दे दी है. अब हमें उनसे संपर्क करना होगा और उनसे चंदा लेना होगा. यह सोच कर ही अब पसीना आ रहा है कि इतने लोगों से संपर्क कैसे किया जायेगा. इसके अलावा किसी का नंबर लेकर मिस्ड काॅल देकर सदस्य बना लेना आसान है,
लेकिन व्यक्तिगत रूप से उनसे संपर्क कर उनसे चंदा लेना सहज नहीं है. अगर हम तय लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाते हैं, तो पार्टी में हमारी सांगठनिक क्षमता पर अंगुली उठेगी. क्योंकि चंदे की जो रसीद दी गयी है, उसके मुताबिक चंदे की राशि ज्यादा मायने नहीं रखती. मायने रख रही है कि चंदा कितने लोगों ने दिया. जाहिर-सी बात है कि चंदे की रसीद जब दी जायेगी, तो पार्टी उसकी जांच भी करेगी. ऐसे में बचने का कोई रास्ता नहीं है. पार्टी में रहना है, तो कमर कस कर उतरना ही होगा. यही सोच कर भाजपा कार्यकर्ताओं को पसीना आ रहा है.
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