हालांकि यह मांग काफी पुरानी है, लेकिन बांग्ला भाषा अनिवार्यता की चिंगारी ने इस आग को फिर से भड़का दिया है. पिछले दो सप्ताह से दार्जीलिंग, कर्सियांग, मिरिक, कालिम्पोंग तो उबल ही रहा है, साथ ही डुआर्स व तराई में भी इसका असर दिखने लगा है. गोरखालैंड की मांग पर पहाड़ बंद का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है. मंगलवार को पहाड़ पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में आंदोलन जारी रखने के साथ राज्य सरकार द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होने का प्रस्ताव पारित हुआ है. इधर मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार को होनेवाली इस सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता राज्य के गृह सचिव करेंगे. उनके अलावे राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री इस बैठक में शामिल होंगे. विभिन्न राजनीतिक दलों के इस बैठक में शामिल होने को लेकर संदेह है. भाजपा इस बैठक में शामिल नहीं हो रही है.
सिलीगुड़ी जिला भाजपा अध्यक्ष प्रवीण सिंहल ने बताया कि यह बैठक राज्य सरकार ने बुलायी है. गोरखालैंड की आग को भड़काने में प्रत्यक्ष रुप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का हाथ है. जब मुख्यमंत्री स्वयं ही उपस्थित नहीं रहेंगी तो इस सर्वदलीय बैठक का कोई मतलब ही नहीं बनता है. भाजपा पहाड़ पर अशांति नहीं चाहती.

