भू बंदरगाह पेट्रापोल से भारत-बांग्लादेश व्यापार ठप, यात्रियों की आवाजाही जारी

Updated at : 23 Jul 2024 1:45 AM (IST)
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भू बंदरगाह पेट्रापोल से भारत-बांग्लादेश व्यापार ठप, यात्रियों की आवाजाही जारी

भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि आधारित व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा पेट्रापोल के जरिये होता है.

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कोलकाता. बांग्लादेश में जारी हिंसा के कारण पश्चिम बंगाल के भू बंदरगाहों के माध्यम से भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी ठप रहा. हालांकि यात्रियों की सीमित आवाजाही बनी रही. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. रविवार से मालवाहक ट्रकों की आवाजाही बंद है, क्योंकि सरकार द्वारा घोषित अवकाश के कारण आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर पेट्रापोल भू बंदरगाह का बांग्लादेशी हिस्सा बंद है. भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि आधारित व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा पेट्रापोल के जरिये होता है. पेट्रापोल, उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव में स्थित है. भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (पेट्रापोल) के प्रबंधक कमलेश सैनी ने बताया कि व्यापार अभी बहाल होना बाकी है. हालांकि, लोगों, खासकर छात्रों की सीमा पार आवाजाही जारी है. अब तक बांग्लादेश से 700 से अधिक छात्र पेट्रापोल पहुंच चुके हैं. श्री सैनी ने कहा कि आने वाले छात्रों की बुनियादी जरूरतों में सहायता के लिए पेट्रापोल में एक सहायता डेस्क स्थापित किया गया है. बीएसएफ दक्षिण बंगाल फ्रंटियर ने भी बांग्लादेश में अशांति के बीच छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए सीमा पर एकीकृत जांच चौकी पर विशेष सहायता डेस्क भी स्थापित किये हैं. बीएसएफ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस अशांति के बीच, बांग्लादेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले कई भारतीय, नेपाली और भूटानी छात्रों को उनके देश वापस भेजा जा रहा है. बीएसएफ दक्षिण बंगाल फ्रंटियर ने इन छात्रों की सुरक्षित वापसी में मदद के लिए आइसीपी पेट्रापोल, एलसीएस गेदे, घोजाडांगा और महादीपुर में विशेष सहायता डेस्क स्थापित किये हैं. बीएसएफ महानिरीक्षक एके आर्य ने कहा कि बीएसएफ लगातार बीजीबी के संपर्क में है. इस समन्वय ने छात्रों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की. प्रक्रिया को और दक्ष बनाने के लिए आइसीपी पेट्रापोल में आव्रजन डेस्क अब चौबीसों घंटे खुला रहेगा, जिससे छात्रों की निर्बाध एवं सुरक्षित वापसी सुनिश्चित होगी. गौरतलब है कि बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. ढाका और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय के छात्र 1971 में पाकिस्तान से देश की आजादी के लिए लड़ने वाले युद्ध नायकों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी तक का आरक्षण देने की व्यवस्था के खिलाफ कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं.

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