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राज्यपाल ने लोगों को दो मई का सीसीटीवी फुटेज दिखाया

Updated at : 10 May 2024 12:15 AM (IST)
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राज्यपाल ने लोगों को दो मई का सीसीटीवी फुटेज दिखाया

राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर राजभवन की एक महिला कर्मचारी की ओर से छेड़छाड़ का आरोप लगाये जाने के बाद राज्यपाल ने गुरुवार को आम लोगों को परिसर की दो मई की सीसीटीवी फुटेज दिखायी.

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गवर्नर पर महिला कर्मचारी ने लगाया है छेड़छाड़ का आरोपएजेंसियां, कोलकाता राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर राजभवन की एक महिला कर्मचारी की ओर से छेड़छाड़ का आरोप लगाये जाने के बाद राज्यपाल ने गुरुवार को आम लोगों को परिसर की दो मई की सीसीटीवी फुटेज दिखायी. राजभवन के ग्राउंड फ्लोर पर सेंट्रल मार्बल हॉल में कुछ लोगों को दो मई शाम करीब 5.30 बजे की मुख्य (उत्तरी) गेट पर लगे दो सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखायी गयी. राजभवन की एक संविदा महिला कर्मचारी ने कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी कि बोस ने राज्यपाल आवास में उसके साथ छेड़छाड़ की थी. बोस ने बुधवार को कहा था कि वह ‘राजनीतिक नेता’ ममता बनर्जी और “उनकी पुलिस” को छोड़कर आम लोगों को संबंधित सीसीटीवी फुटेज दिखायेंगे. एक घंटे से अधिक समय के फुटेज में, नीली जींस और टॉप पहने महिला को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ पुलिस चौकी की ओर जाते देखा गया जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के सिलसिले में राजभवन परिसर में तैनात थे. मोदी दो मई को राजभवन में रात में ठहरे थे और उन्होंने तीन मई को राज्य में तीन राजनीतिक रैलियों को संबोधित किया था. राजभवन के एक अधिकारी ने कहा: कम से कम 92 लोगों ने हमें मेल या फोन किया और सीसीटीवी फुटेज देखने की इच्छा व्यक्त की. हालांकि, केवल कुछ ही लोग आये. इरादा यह था कि लोग घटना को देखकर फैसला कर सकें. फुटेज देखने आये लोगों में शुमार प्रोफेसर तुषार कांति मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने फुटेज देखी और महिला के व्यवहार में कोई असामान्यता नहीं पायी. राज्यपाल से संबंधित मामले में हाइकोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार कोलकाता. कलकत्ता हाइकोर्ट ने राज्यपाल से संबंधित एक मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है. याचिका में कोलकाता पुलिस द्वारा मीडिया स्रोतों को दिये गये बयानों पर अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गयी थी, जिसमें कथित रूप से राज्यपाल सीवी आनंद बोस के कार्यालय को कलंकित किया गया. वकील ने प्रस्तुत किया कि पुलिस ने मीडिया में ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिनसे कथित रूप से राज्यपाल की प्रतिष्ठा धूमिल हुई, जिन्हें अनुच्छेद 361 के तहत संवैधानिक छूट प्राप्त है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायाधीश हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने कहा कि यह कोई जनहित याचिका का आधार नहीं हो सकता. हम राज्यपाल को जनहित याचिका में क्या करना चाहिए, यह सलाह नहीं दे सकते. गौरतलब है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर राजभवन की महिला संविदा कर्मचारी ने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

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