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बासंती देवी गोयनका विद्या मंदिर में दाखिले को लेकर हंगामा

सोमवार को रानीगंज के एनएसबी रोड स्थित बालिका विद्यालय बासंती देवी गोयनका विद्या मंदिर के गेट पर अभिभावकों ने अपनी संतानों के साथ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.

रानीगंज.

सोमवार को रानीगंज के एनएसबी रोड स्थित बालिका विद्यालय बासंती देवी गोयनका विद्या मंदिर के गेट पर अभिभावकों ने अपनी संतानों के साथ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. दाखिला नहीं मिलने से नाराज अभिभावकों ने साफ लफ्जों में कहा कि यदि उनके बच्चों का दाखिला नहीं हुआ, तो वे आनेवाले विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे.

क्या है पूरा मामला

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों के अनुसार, उनके बच्चे गिरजापाड़ा स्थित हिंदी आदर्श विद्यालय में कक्षा पांच तक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, चूंकि वो स्कूल केवल पांचवीं तक है, लिहाजा वे अगली कक्षा में दाखिले के लिए बसंती देवी गोयनका विद्या मंदिर पहुंचे थे. अभिभावकों की शिकायत है कि वे शुक्रवार से स्कूल के चक्कर काट रहे हैं, पर स्कूल की टीचर इंचार्ज स्वाति लाहा ने उन्हें यह कह कर लौटा दिया कि स्कूल इंस्पेक्टर के निर्देशानुसार इन बच्चों को यहां भर्ती नहीं किया जा सकता.

‘पंचायत क्षेत्र के स्कूल में क्यों जायें अभिभावक’

अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि उन्हें बच्चों को वल्लभपुर के स्कूलों में ले जाने को कहा जा रहा है. अभिभावकों का तर्क है कि वे आसनसोल नगर निगम क्षेत्र के निवासी हैं, तो अपने बच्चों को पंचायत क्षेत्र के स्कूल में क्यों भेजें? प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि वे अपने बच्चों का दाखिला वहीं करायेंगे, जहां पढ़ाई अच्छी लगेगी. दूसरे स्कूलों में छात्र कम हैं, इसकी जिम्मेदारी वे लोग नहीं ले सकते.

स्कूल प्रबंधन का पक्ष : एसआइ के निर्देश का हवाला

इस मामले पर स्कूल की असिस्टेंट टीचर स्वाति लाहा ने स्पष्ट किया कि वे केवल अपने उच्च अधिकारियों के आदेश का पालन कर रही हैं. उन्होंने बताया की पिछले साल शिक्षा विभाग की ओर से यह तय किया गया था कि जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है, वहां बच्चों को भेजा जाए ताकि उन स्कूलों का अस्तित्व बना रहे और वे आगे बढ़ सकें. बसंती देवी स्कूल पर पहले से ही छात्रों का बहुत अधिक दबाव है. दबाव कम करने के लिए स्कूल इंस्पेक्टर ने बल्लभपुर व अन्य स्कूलों में दाखिले का विकल्प दिया है. उन्होंने कहा कि अभिभावकों से रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट (निवास प्रमाण पत्र) मांगे गए हैं. यदि विभाग से अनुमति मिलती है, तो एडमिशन के फैसले पर पुनर्विचार किया जायेगा.

फिलहाल स्कूल और अभिभावकों के बीच यह गतिरोध बना हुआ है. अभिभावक अपनी मांग पर अड़े हैं और प्रशासन की ओर देख रहे हैं.अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य और अभिभावकों की नाराजगी को देखते हुए क्या बीच का रास्ता निकालता है.

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