आसनसोल.
अमेरिका की सेना की ओर से वेनेजुएला में की गई कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी के कथित अपहरण के विरोध में मंगलवार को आसनसोल के रबींद्र भवन के सामने वाममोर्चा की ओर से विरोध-सभा आयोजित की गई. सभा में पार्थ मुखर्जी, विक्टर आचार्य सहित आसनसोल के कई सीपीएम नेता और समर्थक मौजूद रहे. सभा को संबोधित करते हुए पार्थ मुखर्जी ने कहा कि 3 जनवरी को अमेरिका की सेना ने वेनेजुएला में जो अभियान चलाया, उसकी निंदा के लिए शब्द कम पड़ते हैं. वेनेजुएला एक सार्वभौमिक देश है और वहां के राष्ट्रपति व उनकी पत्नी के खिलाफ सैन्य अभियान चलाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है.‘तेल भंडार पर है नजर’
पार्थ मुखर्जी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम के पीछे असली मकसद वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा करना है. उन्होंने कहा कि इसी तरह अमेरिका भारत के खिलाफ भी लगातार बयानबाजी कर रहा है और टैरिफ युद्ध शुरू कर चुका है. अमेरिका भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा है, लेकिन भारत की ओर से वैसा विरोध सामने नहीं आ रहा है, जैसा लैटिन अमेरिकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष कर रहे हैं.अमेरिकी आरोप व जवाबी सवाल
सभा में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी पर मादक पदार्थों के कारोबार में शामिल होने तथा अमेरिका विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए हैं. इन्हीं आरोपों के आधार पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में अभियान चलाकर राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को अमेरिका ले जाकर उनके खिलाफ वहां के कानून के तहत मामला शुरू किया. वाममोर्चा नेताओं ने इसे एक स्वतंत्र देश की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

