बोलपुर सीट पर मुख्य मुकाबला तृणमूल बनाम भाजपा

बीरभूम का बोलपुर विधानसभा क्षेत्र कभी वामपंथियों का लालदुर्ग था. लेकिन वर्ष 2011 के परिवर्तन में यह सीट तृणमूल कांग्रेस की झोली में चली गयी. लाल दुर्ग पर राज्य के मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आरएसपी प्रार्थी तपन होर को परास्त कर जोड़ाफूल खिलाया था.
मुकेश तिवारी, बोलपुर.
बीरभूम का बोलपुर विधानसभा क्षेत्र कभी वामपंथियों का लालदुर्ग था. लेकिन वर्ष 2011 के परिवर्तन में यह सीट तृणमूल कांग्रेस की झोली में चली गयी. लाल दुर्ग पर राज्य के मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आरएसपी प्रार्थी तपन होर को परास्त कर जोड़ाफूल खिलाया था. यहां से आरएसपी प्रार्थी तपन होर चार बार निर्वाचित हो चुके हैं. वर्ष 1991-2006 तक तपन होर ने इस क्षेत्र का नेतृत्व किया. 1977-2006 तक इस सीट पर आरएसपी सात बार जीती है, पर इस बार यहां लड़ाई जोरदार है. राज्य के मंत्री व विधायक चंद्रनाथ सिन्हा लगातार तीन बार जीत कर विधायक बने हैं. वह यहां से इस दफा जीत कर अपना ही हैट्रिक का रिकॉर्ड तोड़ने को बेताब हैं. पर उन्हें यहां से भाजपा के दिलीप कुमार घोष और कांग्रेस प्रार्थी रथीन सेन से कड़ी चुनौती मिल रही है. वाममोर्चा की ओर से अभी तक अपना प्रार्थी नहीं घोषित किया गया है. जिसे लेकर जोरदार चर्चा है.वैसे भी इस सीट के अधीन शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय आता है, जो हाल के वर्षों में राज्य सरकार व केंद्र के बीच तनातनी का केंद्र रहा है. विश्वभारती परिसर को चहारदीवारी से घेरने को लेकर इस केंद्रीय विश्वविद्यालय और राज्य सरकार में काफी तकरार हुई थी. यहां तक कि केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ा. बावजूद इसके यह तकरार चुनाव पर असर डाल सकती है. तृणमूल कांग्रेस कोर कमेटी के कन्वेनर अनुब्रत मंडल लगातार बोलपुर नगर पालिका क्षेत्र में चंद्र नाथ सिन्हा के समर्थन में प्रचार कर रहे है. चूंकि गत चुनाव में अपने ही गढ़ में चंद्र नाथ सिन्हा को काफी कम वोट मिला था. सियासी लड़ाई के बीच भाजपा को स्थानीय स्तर पर चुनाव में फायदा मिल सकता है. स्थानीय किसानों में भी तृणमूल के प्रति गुस्सा है. वाममोर्चा के जमाने में स्थानीय किसानों से जिस भूमि का अधिग्रहण किया गया था, उसे तृणमूल के शासनकाल में आवास योजना के लिए बड़े-बड़े उद्यमियों को दे दिया गया. यह मुद्दा इस चुनाव में एक बार फिर तृणमूल पर भारी पड़ सकता है. हालांकि इस सीट से भाजपा प्रार्थी दिलीप कुमार घोष भी पूरा जोर लगा रहे हैं. राजनीति के पंडित मानते हैं कि अबकी बोलपुर सीट पर तृणमूल के प्रत्याशी चंद्रनाथ सिन्हा की राह सुगम नहीं है. उनकी राह में भाजपा बड़ा रोड़ा है. इस लिहाज से यहां दोहरी संघर्ष तय है. उल्लेख्य है कि 2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के चंद्रनाथ सिन्हा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आरएसपी के तपन होर को 50027 वोटों के अंतर से हराया था. चंद्रनाथ को 1,13,258 वोट मिले थे, वोट जबकि तपन होर को 63,231 मिले थे. इसके पहले वर्ष 2011 विधानसभा चुनाव में तृणमूल के चंद्रनाथ सिन्हा ने आरएसपी के तपन होर को 16627 बोटों से हराया था. श्री सिन्हा को 89394 मत और श्री होर को 72767 मत मिले थे. 2016 के विधानसभा चुनाव में बोलपुर सीट से 85 प्रतिशत मतदान हुआ था. बोलपुर संसदीय सीट के अधीन ही बोलपुर विधानसभा सीट भी आती है. 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी असित कुमार माल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के रामप्रसाद दास को 106402 मतों के अंतर से हराया और बोलपुर लोकसभा सीट से सांसद बने थे. राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले चरण 23 अप्रैल को यहां मतदान होगा. मतगणना में साफ हो जायेगा कि बोलपुर सीट से निर्वाचित होकर कौन राज्य विधानसभा में जायेगा.मालूम हो कि बोलपुर सीट जनरल होने के साथ ही यह सीट नगर पालिका और ग्राम पंचायत क्षेत्र को लेकर बना है. इस क्षेत्र में जहां बोलपुर नगर पालिका पड़ता है. वही इलम बाजार ब्लॉक के साथ ही बोलपुर श्रीनिकेतन ब्लॉक के तहत रूपपुर, रायपुर, सुपुर तथा सत्तोंर ग्राम पंचायत क्षेत्र आते है.बोलपुर में विश्व भारती शांति निकेतन पड़ता है जो कि एक ऐतिहासिक धरोहर है.वर्ष 2021 में इस सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक चंद्र नाथ सिन्हा को 1,16443 वोट मिला था. जबकि दूसरे स्थान पर भाजपा के अनिर्बान गांगुली को 94163 वोट मिला था.तीसरे स्थान पर वाम मोर्चा के सहयोगी पार्टी आरएसपी प्रार्थी तपन होर को महज 9965 वोट ही मिला था. चंद्र नाथ सिन्हा 9.8 प्रतिशत के मार्जिन से चुनाव जीत कर इस वर्ष हैट्रिक का रिकॉर्ड बनाया था. लेकिन इस बार इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने चौथी बार अपने प्रार्थी चंद्र नाथ सिन्हा को ही प्रार्थी घोषित कर चुनाव में उतारा है. वही भाजपा ने इस बार दिलीप कुमार घोष को अपना प्रार्थी बनाया है. कांग्रेस ने भी इस बार रथीन सेन को प्रार्थी के रूप में उतारा है. जबकि वाममोर्चा ने इस बार इस सीट से आइएसएफ के बापी सोरेन को समर्थन देकर इस सीट से प्रार्थी के रूप में उतारा है. 30 मार्च से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है. सभी राजनीतिक दल पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में जुट गए है .इस बार मुख्य रूप से भाजपा और तृणमूल के बीच होने वाले मुकाबले के बाद यह तय करना बड़ा मुश्किल हो रहा है कि इस बार इस सीट पर ऊंट किस करवट बैठेगा ?
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