रघुनाथपुर नगरपालिका में प्रशासक की नियुक्ति रद्द, राज्य सरकार को हाइकोर्ट का झटका

Updated at : 16 Jun 2025 9:29 PM (IST)
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रघुनाथपुर नगरपालिका में प्रशासक की नियुक्ति रद्द, राज्य सरकार को हाइकोर्ट का झटका

कोलकाता उच्च न्यायालय ने रघुनाथपुर नगर पालिका में प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है. सोमवार को न्यायाधीश कौशिक चंद ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग द्वारा 19 मई को जारी किया गया आदेश वैध नहीं है और नगरपालिका कानून के अनुरूप नहीं है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रघुनाथपुर अनुमंडल अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करने का निर्देश अवैध है.

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पुरुलिया.

कोलकाता उच्च न्यायालय ने रघुनाथपुर नगर पालिका में प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है. सोमवार को न्यायाधीश कौशिक चंद ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग द्वारा 19 मई को जारी किया गया आदेश वैध नहीं है और नगरपालिका कानून के अनुरूप नहीं है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रघुनाथपुर अनुमंडल अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करने का निर्देश अवैध है.

इस निर्णय के बाद रघुनाथपुर नगरपालिका के निर्वाचित पार्षद अपने पद पर बने रहेंगे. हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार भविष्य में कानूनी तरीके से फिर से कदम उठा सकती है.

राज्य सरकार के कामकाज पर न्यायालय ने उठाये सवाल

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को शो-कॉज नोटिस और प्रशासक नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज सौंपे गये. राज्य के वकील ने बताया कि 14 मई को पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष को शो-कॉज नोटिस भेजा गया था, जिसका जवाब 17 मई को प्राप्त हुआ. उसी आधार पर 19 मई को पूरे नगर बोर्ड को भंग कर दिया गया. राज्य के वकील ने यह भी दावा किया कि आरोपों की निष्पक्ष जांच जिलाधिकारी ने की थी. साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि याचिकाकर्ता दिनेश शुक्ला के भाई स्वयं उस नगरपालिका में ठेकेदार हैं, इसलिये याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत रुचि भी जुड़ी हुई है.

याचिकाकर्ता के वकील समित भंज ने तर्क दिया कि नगरपालिका कानून के अनुसार प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से शो-कॉज नोटिस देना होता है और पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए. लेकिन राज्य सरकार ने सिर्फ अध्यक्ष के खिलाफ आरोपों के आधार पर पूरा बोर्ड भंग कर दिया.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश कौशिक चंद ने कहा कि यह प्रक्रिया नगर प्रशासनिक कानून के अनुरूप नहीं है. न तो आरोपों की पर्याप्त जानकारी दी गयी, न ही सभी पार्षदों को पक्ष रखने का अवसर दिया गया. इस कारण नगरपालिका बोर्ड को भंग करना और प्रशासक की नियुक्ति कानून के खिलाफ है. अतः राज्य सरकार के निर्देश को रद्द किया जाता है. 
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष तरुणी बाउरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अब तक अदालत के निर्देश की कोई आधिकारिक प्रति नहीं मिली है, इसलिये वे फिलहाल कुछ नहीं कह सकते.

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