चार वर्षों से कृत्रिम ऑक्सीजन पर जी रहे रबींद्रनाथ दे
Updated at : 14 Jun 2025 9:43 PM (IST)
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शहर के वार्ड 23 के बीटू इलाका के रहनेवाले रबींद्रनाथ दे (59) अपने दोनों फेफड़े खराब हो जाने से बीते चार वर्ष से कृत्रिम ऑक्सीजन के जरिए जीवन की डोर थामे हुए हैं. मरीज की माली हालत इतनी खराब है कि उनके पास ऑक्सीजन खरीदने के भी पैसे नहीं हैं.
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दुर्गापुर.
शहर के वार्ड 23 के बीटू इलाका के रहनेवाले रबींद्रनाथ दे (59) अपने दोनों फेफड़े खराब हो जाने से बीते चार वर्ष से कृत्रिम ऑक्सीजन के जरिए जीवन की डोर थामे हुए हैं. मरीज की माली हालत इतनी खराब है कि उनके पास ऑक्सीजन खरीदने के भी पैसे नहीं हैं. ऑक्सीजन के लिए रबींद्रनाथ की पत्नी बबीता दे दर-दर भटकने को विवश हैं. ऐसे में मरीज के सहयोग के लिए भिरंगी स्थित माया देवी तारा मां आश्रम के नफे सिंह अपने सहयोगी मदन शर्मा के साथ आगे आये और रबींद्रनाथ के घर जाकर आर्थिक सहयोग किया. नफे सिंह ने बताया कि धर्म के प्रसार के साथ समाज कल्याण के लिए प्रयास किया जाता है. खबर मिलने के बाद रबींद्र नाथ के घर पहुंच कर कुछ सहयोग किया है. समाज के दूसरे लोगों को ऐसे मरीजों के सहयोग के लिए आगे बढ़ना चाहिए. मानवता के लिए यह जरूरी है. रबींद्रनाथ ने बताया कि वर्ष 2001 में एमएएमसी बंद होने के बाद उनकी नौकरी चली गयी. उसके बाद जामुड़िया के श्याम सेल लोहा फैक्टरी में कई वर्ष काम करने के बाद वर्ष 2023 में कारखाने के प्रदूषण के कारण उनके तन के दोनों फेफड़े बेकार हो गये. फिर हार्ट-अटैक होने पर उनका किसी तरह इलाज कराया गया. अब तो ऑक्सीजन सिलिंडर पर ही जीवन बिता रहे हैं. हर दिन दो सिलिंडर ऑक्सीजन सांस लेने में खर्च हो रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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