अखंड सौभाग्य की कामना से रखा वट-सावित्री व्रत

Updated at : 26 May 2025 9:54 PM (IST)
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अखंड सौभाग्य की कामना से रखा वट-सावित्री व्रत

आस्था व नारी शक्ति का प्रतीक वट-सावित्री व्रत शिल्पांचल व आसपास के इलाकों में सोमवार को पारंपरिक श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया गया. इस दिन सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और दीर्घायु कामना के साथ वट सावित्री की पूजा अर्चना की. शहर दुर्गापुर और आसपास में स्थित विभिन्न वटवृक्ष के नीचे सुहागिन महिलाओं ने सावित्री व्रत कथा सुनकर अखंड सौभाग्य की कामना की.

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दुर्गापुर.

आस्था व नारी शक्ति का प्रतीक वट-सावित्री व्रत शिल्पांचल व आसपास के इलाकों में सोमवार को पारंपरिक श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया गया. इस दिन सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और दीर्घायु कामना के साथ वट सावित्री की पूजा अर्चना की. शहर दुर्गापुर और आसपास में स्थित विभिन्न वटवृक्ष के नीचे सुहागिन महिलाओं ने सावित्री व्रत कथा सुनकर अखंड सौभाग्य की कामना की.

इस मौके पर महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा की और अपने पति की लंबी उम्र की कामना की. महिलाएं सुबह से ही पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर पूजा स्थलों पर पहुंचीं. हालांकि शुभ मुहूर्त को लेकर कई महिलाएं दोपहर बाद पूजा करने पहुंची. वही कई जगहों पर महिलाओं ने अपने घरों में गमले में बट वृक्ष लगा कर व्रत का पालन किया.

इस दौरान महिलाओं ने पूजा की थाल सजाई, वट वृक्ष की परिक्रमा की .पूजा के दौरान पंडितों ने वट सावित्री व्रत की पौराणिक कथा सुनाई, जिसमें सावित्री द्वारा यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाने की प्रेरणादायक गाथा का उल्लेख किया गया. यह कथा नारी शक्ति, संकल्प और पति-पत्नी के अटूट बंधन का प्रतीक मानी जाती है. वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत बांधती महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए और पति की दीर्घायु, वैवाहिक सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. यह सूत पति-पत्नी के सात जन्मों के अटूट संबंध का प्रतीक माना जाता है.

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