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निष्पक्ष ढंग से विस चुनाव हुआ, तो 50 हजार वोटों के अंतर से हार जायेंगे मलय, नरेंद्र व हरेराम

Updated at : 21 Jun 2025 1:37 AM (IST)
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निष्पक्ष ढंग से विस चुनाव हुआ, तो 50 हजार वोटों के अंतर से हार जायेंगे मलय, नरेंद्र व हरेराम

पश्चिम बंग दिवस पर आसनसोल में भाजपा की रैली से शुभेंदु अधिकारी ने भरी हुंकार, बोले

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46 फीसदी वोट से बनी तृणमूल की सरकार, जिसमें 80 फीसदी वोट था विशेष समुदाय का, भाजपा को मिले थे 39 फीसदी वोट बंगाल में सनातनियों से एकजुट होने का किया आह्वान, सुरक्षित नहीं है बंगाल, जहां की छवि हुई है धूमिल आसनसोल. पश्चिम बंगाल विधानसभा नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव हो तो मलय घटक, नरेंद्रनाथ चकरवर्ती, हरेराम सिंह तीनों के तीनों 50 हजार वोटों के अंतर से हारेंगे. जनता इनके साथ नहीं है. 2021 में 46 फीसदी वोट (ढ़ाई करोड़) पाकर तृणमूल की सरकार भी थी. जिसमें दो करोड़ वोट तो विशेष समुदाय के थे. भाजपा को 39 फीसदी वोट मिला था. राज्य सरकार तुष्टिकरण की राह पर चल रही है. इसका अंत निश्चित है. पश्चिमबंग दिवस पर शुक्रवार को आसनसोल में आयोजित भाजपा की रैली में शामिल हुए श्री अधिकारी ने सभा को संबोधित करते हुए ये बातें कही. मौके पर आसनसोल साउथ की विधायक अग्निमित्रा पाल, कुल्टी के विधायक डॉ. अजय पोद्दार, दुर्गापुर पश्चिम के विधायक लक्ष्मण घोरुई, भाजपा जिलाध्यक्ष देबतनु भाट्टाचार्य, राज्य कमेटी के सदस्य जितेंद्र तिवारी, कृष्णेन्दू मुखर्जी आदि सहित भारी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल थे. इस दौरान दर्जनों तृणमूल के समर्थक भाजपा में शामिल हुए. श्री अधिकारी ने कहा कि मुस्लिम लीग के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलने के लिए प्रस्तावना लाया था, उसने कोलकाता को भी पाकिस्तान में मिलाना चाहा था लेकिन ब्रिटिश शासको ने कानूनी प्रक्रिया से मसले को हल करने का निर्देश दिया. इसके बाद 20 जून 1947 को विधानसभा में पाकिस्तान के पक्ष और विपक्ष में बंगाल को मिलाने को लेकर वोटिंग हुई थी. जिसमें 58 और 21 वोट पक्ष और विपक्ष में पड़े थे. 58 वोट में तकरीबन सभी के सभी वोट सनातनी हिंदुओं ने दिए थे, जिसमें श्याम प्रसाद मुखर्जी, हरगोविंद बनर्जी, त्रिलोचन बनर्जी, शिवलाल, चारु चंद, हेमंत मुखर्जी, ज्योति बसु, सतीश चंद्र बसु, मिहिर लाल चट्टोपाध्याय, विमल सिंघानिया, सहित आदि सनातनी हिंदू थे, बंगाल को पाकिस्तान में मिलने के समर्थन में 21 वोट पड़े जिसमें सभी के सभी मुस्लिम वोट थे. अफगानिस्तान में कभी हिंदुओं का वास होता था, आज वहां तालिबानी हुकूमत है. हिंदुओं की संख्या पाकिस्तान में आज मात्र एक फीसदी रह गयी है. बांग्लादेश में 1947 में 33 प्रतिशत हिंदू थे, 1971 में 23 प्रतिशत और 2025 में सात फीसदी ह बचे हैं. मुर्शिदाबाद और कोलकाता के दंगों से यह स्थिति साफ हो चुकी है कि राज्य की स्थिति काफी दयनीय है. जो यह सोच रहे हैं कि हम बहुमत में है, बिल्कुल इस भ्रम में ना रहें. परिस्थिति बदल रही है. वर्ष 1958 में पश्चिम बंगाल में 85 फीसदी हिन्दू थे. वर्ष 2011 में 72 फीसदी और 2027 में यह आंकड़ा 65 फीसदी से भी नीचे गिर जाएगा. सेक्यूलर बोल कर कोई शब्द नहीं रह जायेगा, यहां सरिया कानून चलने लगेगा. धूलिया के हरगोविंद दास और कृष्ण दास को देवी देवताओं की मूर्ति बनाने की सजा दी गयी. पाकिस्तान पर भारत के हमले को लेकर टुकड़े-टुकड़े गैंग सोशल मीडिया पर देश के खिलाफ पोस्ट कर रहा था. उत्तर प्रदेश, ओडिशा तथा मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया पर देश विरोधी पोस्ट करने वाले को योगी जी मोहन यादव जैसे नेताओं ने सीधा कर दिया. देश में मोहम्मद अली जिन्ना के अवैध संतान अभी भी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है. हरियाणा, दिल्ली बिहार में भगवा लहराने के बाद पश्चिम बंगाल में भी भगवा ध्वज लहरायेगा. उन्होंने सभी सनातनियों से एकजुट होकर रहने का अनुरोध किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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