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PHOTOS : बीरभूम के अजय नदी में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी,बाउल गायकों का हुआ समागम

Updated at : 15 Jan 2024 2:43 PM (IST)
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PHOTOS : बीरभूम के अजय नदी में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी,बाउल गायकों का हुआ समागम

मकर संक्रांति में अजय नदी के उक्त घाट पर गंगा स्नान अथवा पूर्ण स्न्नान होना आरम्भ हो गया . प्रत्येक वर्ष लाखों लोग घाट पर स्नान हेतु आते हैं . तकरीबन 2500 पुलिस बल सहित नागरिक स्वयंसेवक को जयदेव मेले में तैनात किया गया है.

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बीरभूम, मुकेश तिवारी : पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के जयदेव केंदुली स्थित अजय नदी में सोमवार सुबह मकर संक्रांति के मद्देनजर जयदेव केंदुली मेला में आये कदम खंडित घाट पर लाखोंश्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और स्नान किया .

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इस दौरान बीरभूम जिला पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे .जगह जगह सीसीटीवी कैमरा ,अग्निशमन सुरक्षा के उपाय व व्यवस्था किए गए थे. नदी के किनारे गीत गोविंद के रचयिता कवि जयदेव का जन्म स्थान है .अनेक विद्वानों का कहना है कि उनका जन्म स्थान उड़ीसा के केंदुली श्मशान में हुआ था .यह चर्चा का विषय है.

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1982 में बीरभूम जिला प्रशासन ने मेला का शुरुआत किया . पहले पहल 107 अखाड़े यहां लगते थे .वर्तमान में 300 से ज्यादा अखाड़ा यहां लग रहे हैं .बाउल, कीर्तन ,लोक गीत आदि के अखाड़े यहां लगते हैं .

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बाउल, लोक, कीर्तनिया गायकों का समागम यहां देखने लायक है. रात भर शीत लहरी व कड़ाके की ठंड के बावजूद नदी किनारे बने हजारों अखाड़ों में उक्त गायकों की टीम अपनी अपनी रचनाओं को सुनाने में लगे हुए हैं .

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इस समागम में आस-पास के अलावे जिले व राज्य तथा अन्य प्रांतों व देश विदेश से लोक गायक जुटते हैं. जिला पुलिस अधीक्षक राजाराम मुखोपाध्याय स्वय ही जयदेव मेले का जायजा ले रहे है.

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पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों को बताया कि मकर संक्रांति के मौके पर जयदेव मेले में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. इस बार मेले में एसजीएफ खुफिया ड्रोन कैमरों सहित अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियां स्थापित की गई है.

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घाटों सहित हर अखाड़े व पंडाल में सीसीटीवी कैमरे, विशेष मोबाइल वैन, कंट्रोल रूम भी मेले के बाहर पर्याप्त निगरानी के साथ उपलब्ध कराए गए है. तकरीबन 2500 पुलिस बल सहित नागरिक स्वयंसेवक को जयदेव मेले में तैनात किया गया है.

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घाट पर कमल का फूल अजय नदी में तैरता हुआ आ रहा. फिर क्या था ,तभी से अजय नदी को गंगा का स्वरूप मानकर प्रतिवर्ष यहां मकर संक्रांति के रुप से पूजन की विधि चालू हो गयी.

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प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के उपलक्ष में इस स्थान पर मेला बैठता है .कथित है कि कई सौ वर्ष पूर्व जयदेव मकर संक्रांति के प्रातः बर्दवान के कटवा गंगा नदी में स्नान करने जाते थे .

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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