सेवानिवृत्त शिक्षकों के अधिकारों को लेकर बांकुड़ा में सम्मेलन आयोजित

Updated at : 17 Oct 2025 9:44 PM (IST)
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सेवानिवृत्त शिक्षकों के अधिकारों को लेकर बांकुड़ा में सम्मेलन आयोजित

पश्चिम बंगाल महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय सेवानिवृत्त शिक्षक कल्याण संघ (डब्ल्यूबीसीयूआरटीडब्ल्यूए) का पहला बांकुड़ा जिला सम्मेलन बांकुड़ा सम्मिलनी महाविद्यालय के रामानंद सभागार में आयोजित किया गया.

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बांकुड़ा.

पश्चिम बंगाल महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय सेवानिवृत्त शिक्षक कल्याण संघ (डब्ल्यूबीसीयूआरटीडब्ल्यूए) का पहला बांकुड़ा जिला सम्मेलन बांकुड़ा सम्मिलनी महाविद्यालय के रामानंद सभागार में आयोजित किया गया. सम्मेलन में राज्य के सेवानिवृत्त शिक्षकों से संबंधित विभिन्न समस्याओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.

पेंशन विसंगति और वेतनमान को लेकर असंतोष

बैठक में 1 जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त शिक्षकों की बढ़ी हुई पेंशन लागू न होने, 33/20 वर्ष से कम सेवा करने वाले प्रोफेसरों को पूर्ण पेंशन का लाभ न देने, पारिवारिक पेंशन में विशेष रूप से सक्षम बच्चों को शामिल न करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे. इसके अलावा सेवानिवृत्त राज्य सहायता प्राप्त कॉलेज शिक्षक (एएसीटी) के लिए सेवा आयु 60 से 65 वर्ष तक बढ़ाने, पूर्ण वेतनमान व सेवानिवृत्ति लाभ लागू करने और 2006 में स्वीकृत 5.6% वेतन वृद्धि का भुगतान न होने पर भी शिक्षकों ने नाराजगी जतायी.

सम्मेलन में यह भी सवाल उठाया गया कि जब दिल्ली के बंग भवन या चेन्नई के राज्य अतिथिगृहों में कार्यरत राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय दर पर महंगाई भत्ता दिया जा सकता है, और राज्य के खजाने से वेतन पाने वाले आइएएस व आईपीएस अधिकारियों को भी केंद्रीय दर का डीए मिलता है, तो शिक्षण कर्मचारियों को यह सुविधा क्यों नहीं दी जाती.

शिक्षा नीति और जनविरोधी नीतियों पर चिंता

प्रतिभागियों ने केंद्र और राज्य सरकारों की जनविरोधी नीतियों की आलोचना करते हुए पुराने कानूनों को वापस लेने की मांग की. देश और राज्य में शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव तथा अप्रिय घटनाओं पर भी चिंता जतायी गयी.

नवगठित जिला समिति का गठन

सम्मेलन का उद्घाटन राज्य सचिव प्रोफेसर तरुण पात्रा ने किया. इस अवसर पर राज्य अध्यक्ष प्रोफेसर हरीश सरकार, राज्य उपाध्यक्ष प्रोफेसर सदानंद भट्टाचार्य और प्रोफेसर संतोष चौधरी ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम के अंत में नई जिला समिति का गठन किया गया, जिसमें प्रोफेसर अरूप घोष को अध्यक्ष, प्रोफेसर रंजीत मेद्या को उपाध्यक्ष और प्रोफेसर प्रतीप मुखर्जी को सचिव बनाया गया. समिति में कुल 21 सदस्य शामिल किये गये. सम्मेलन में जिले के लगभग सभी महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और व्याख्याता उपस्थित रहे.

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