पहले दौर की वोटिंग के बाद हार की आहट से तृणमूल हताश, फैला रही है हिंसा

Edited by AMIT KUMAR
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कांग्रेस के दिग्गज नेता व पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी कमेटी के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण की बंपर वोटिंग के बाद तृणमूल कांग्रेस को समझ आ गया है कि उनकी हार तय है.

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आसनसोल.

कांग्रेस के दिग्गज नेता व पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी कमेटी के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण की बंपर वोटिंग के बाद तृणमूल कांग्रेस को समझ आ गया है कि उनकी हार तय है. द्वितीय चरण में हार से बचने को लेकर वह हिंसा फैला रही है. कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी चुनाव बाद हिंसा की बलि चढ़ गया. उसके परिवार में हाहाकार मच गया है. चुनाव के पहले और बाद, हिंसा का दौर जारी है. सोमवार को देवदीप के परिजनों से मिलने आये श्री चौधरी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं. श्री चौधरी ने देबदीप की पत्नी, एकमात्र बेटा व परिजनों से काफी देर बात की और हर प्रकार से मदद का आश्वासन दिया.

मालूम रहे कि गत 24 व 25 तारीख की दरम्यानी रात करीब 1.55 बजे देबदीप चटर्जी को कुछ युवकों ने उनके घर के सामने मेन गेट के पास बुरी तरह पीट दिया था. उसके कुछ घंटों बाद ही देबदीप की मौत हो गयी. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों शुभजीत मंडल और रबीउल आलम के साथ एक नाबालिग को गिरफ्तार किया है. शुभजीत और रबीउल 10 दिनों की पुलिस रिमांड में है. देबदीप की मौत को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर एक मैसेज पोस्ट किया, जिसके बाद से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है. रविवार को झारखंड राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी भी पीड़ित परिवार से आकर मिले और सांत्वना दी. सोमवार को अपनी चुनावी व्यस्तता छोड़ कर अधीर रंजन चौधरी आसनसोल आकर पीड़ित के परिजनों से मिले और ढांढस बंधाया.

दोषियों को सजा दिलाने को सुप्रीम कोर्ट तक जायेंगे, सड़कों पर होगा आंदोलन

अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव का मतलब हिंसा, रक्तपात, हत्या हो गया है. बंगाल अपनी भाषा खो चुका है. इसलिए पूरे बंगाल के लोग इस बार बदलाव चाह रहे हैं. 29 अप्रैल को चुनाव खत्म होने के बाद और भी हिंसा होगी. जैसे-जैसे लोग तृणमूल से लोग दूर हो रहे हैं, वह उतनी ज्यादा हिंसक हो रही है. देबदीप की हत्यारों को बचाने के लिए तृणमूल के नेता व मंत्री पोस्टमॉर्टम करनेवाले चिकित्सक पर दबाव बना रहे हैं, ताकि वह ऐसा रिपोर्ट बना दे कि आरोपी जेल से छूट जायें अथवा, एकदम सामान्य या नाममात्र की सजा हो. पर ऐसा नहीं होने दिया जायेगा. दोषियों को सजा दिलाने के लिए जिला कोर्ट, हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जायेगी. इसके साथ-साथ सड़कों पर भी आंदोलन होगा.

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