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''फ्रेंड्स यूनिटी सेंटर'' की जमीन पर भू माफिया की नजर, अस्तित्व पर संकट

Updated at : 08 Dec 2025 9:29 PM (IST)
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''फ्रेंड्स यूनिटी सेंटर'' की जमीन पर भू माफिया की नजर, अस्तित्व पर संकट

रानीगंज की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक, फ्रेंड्स यूनिटी सेंटर अपनी ज़मीन को लेकर एक नये और गंभीर विवाद में घिर गयी है.

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रानीगंज.

रानीगंज की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक, फ्रेंड्स यूनिटी सेंटर अपनी ज़मीन को लेकर एक नये और गंभीर विवाद में घिर गयी है. क्लब प्रबंधन ने सीधे तौर पर जमीन माफिया और असामाजिक तत्वों पर क्लब की वर्षों पुरानी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया है.

1965 में स्थापित क्लब पर दावा

1965 में स्थापित और 7 जून 1976 को आधिकारिक रूप से पंजीकृत यह क्लब न केवल सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, बल्कि यह गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने तथा सालभर रक्तदान शिविर, योग प्रशिक्षण, और शतरंज जैसे विशिष्ट प्रशिक्षण सहित कई महत्वपूर्ण सेवा कार्य चलाता आ रहा है.

हाल ही में, एक व्यक्ति ने अचानक क्लब की जमीन पर मालिकाना हक का दावा किया है और इस संबंध में ब्लॉक भूमि एवं भूमि सुधार विभाग में शिकायत भी दर्ज करा दी है. इससे लंबे समय से शांतिपूर्वक चल रहे इस क्लब के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. क्लब प्रबंधन का कहना है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, जो परिसर पर उनके स्वामित्व को सिद्ध करते हैं. वे नियमित रूप से ज़मीन का किराया (खाजना) और बिजली बिल जमा करते आ रहे हैं, जो मालिकाना हक के दायित्वों की पूर्ति है. दूसरी ओर, स्वयं को मालिक बताने वाले व्यक्ति ने भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही है.

क्लब प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रमोटर और असामाजिक राजनीतिक लोग मिलकर इस व्यक्ति को मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि क्लब की कीमती जमीन पर कब्जा किया जा सके. उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर यह अतिक्रमण सफल होता है, तो क्लब द्वारा संचालित निःशुल्क शैक्षिक कार्यक्रम, रक्तदान शिविर, और अन्य सभी सेवा कार्य पूरी तरह से ठप हो जायेंगे.

बुद्धिजीवी वर्ग का मानना है कि विवाद के इस घेरे में आने से शहर के छात्रों को मिलने वाले शतरंज प्रशिक्षण और अन्य सांस्कृतिक सुविधाओं पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. मामले की गंभीरता को देखते हुए, भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों ने अब तक कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है. उनका कहना है कि ज़मीन का मापन और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच प्रक्रिया जारी है. जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक मालिकाना हक स्पष्ट हो पायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMIT KUMAR

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