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राहत: ईरान में फंसे स्टूडेंट्स को बॉर्डर से जाने की मिली इजाजत; एग्जाम बाद में होंगे

Updated at : 02 Mar 2026 2:00 PM (IST)
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Iran War stranded Students will be allowed to leave through its land borders exams to be held later.

ईरान में फंसे छात्र. एआई फोटो- एक्स (@fahaadofficial).

Iran War Student: ईरान युद्ध में फंसे छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर आई है. ईरानी मीडिया ने मंत्रालय के हवाले से कहा है कि युद्ध में फंसे छात्रों को देश से बाहर जाने की इजाजत दी जाएगी. इसके लिए वे रोड बॉर्डर का इस्तेमाल कर सकेंगे.

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Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में फंसे छात्रों को बड़ी राहत मिली है. तेहरान ने घोषणा की है कि देश के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे विदेशी नागरिकों को ईरान की स्थलीय सीमाओं के जरिए देश छोड़ने की अनुमति दी जाएगी. ईरान में इस समय लगभग 1200 भारतीय छात्र बचे हैं, जिनको इससे फायदा होगा.  इसके अलावा, छात्रों को सेमेस्टर के अंत की परीक्षाओं में बाद में शामिल होने और अपनी डॉक्टोरल थीसिस (शोध प्रबंध) का डिफेंस बाद में करने की भी अनुमति दी जाएगी. इनकी तारीखें बाद में घोषित की जाएंगी. यह बात ईरानी मीडिया ने देश के विज्ञान मंत्रालय के हवाले से यह बात कही है.

एक्स पर एक पोस्ट में तस्नीम न्यूज ने लिखा, ‘बिना किसी अनुमति के विदेशी छात्रों के स्थलीय सीमाओं के जरिए देश छोड़ने की संभावना. विज्ञान मंत्रालय के छात्र मामलों के संगठन के प्रमुख: सभी विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों को देश छोड़ने में आवश्यक सहयोग देने और सेमेस्टर-अंत परीक्षाओं या थीसिस डिफेंस के लिए वैकल्पिक तिथियां घोषित करने के लिए बाध्य हैं.’ यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईरान में विश्वविद्यालय और सार्वजनिक संस्थान अस्थायी रूप से बंद हैं और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए उसका हवाई क्षेत्र भी बंद कर दिया गया है.

हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद बढ़ी समस्या

भारतीय अधिकारियों ने अपने छात्रों से बार-बार ईरान छोड़ने की अपील की है, लेकिन हवाई क्षेत्र बंद होने और लॉजिस्टिक समस्याओं के चलते निकासी प्रयास जटिल हो गए हैं. तेहरान, उरमिया और अन्य क्षेत्रों में छात्र आवश्यक सेवाओं, जैसे अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान तक सीमित पहुंच की समस्या झेल रहे हैं. इन्हें अगले 15 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. ईरान में लगभग 3000 भारतीय छात्र पढ़ते हैं, इनमें से लगभग 2000 कश्मीर हैं. ज्यादातर छात्र लौट आए थे, लेकिन कुछ वहीं रुके हुए थे. अब हालात बिगड़ने पर उनके परिवारीजनों ने भी सरकार से अपील की थी.

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छात्रों ने बताए ईरान के हालात

श्रीनगर की छात्रा आयशा ने ANI से बात करते हुए हालात को बेहद गंभीर बताया. उन्होंने कहा, ‘हम सभी का इंटरनेट पूरी तरह बंद है. हर 15 मिनट में बम धमाकों की आवाज सुनाई देती है. यहां हालात बहुत परेशान करने वाले हैं. जब हमारे दूतावास ने हमें ईरान छोड़ने की सलाह दी, तो हमारी यूनिवर्सिटी ने सहयोग नहीं किया. उन्होंने कहा कि अगर आप जाएंगे तो फेल कर दिए जाएंगे. विश्वविद्यालय, अस्पताल और सब कुछ इस समय 15 दिनों के लिए बंद है. हम दूतावास के बहुत आभारी हैं; हम उनके संपर्क में हैं. लेकिन वे भी अभी बेबस हैं, क्योंकि हर देश के लिए यहां से हवाई क्षेत्र बंद है. हम निकासी नहीं कर पा रहे हैं.’

एक अन्य छात्र मुसर्रफ ने बढ़ते तनाव और हालिया मिसाइल गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम उरमिया में हैं. यहां का माहौल बहुत तनावपूर्ण है. सुबह करीब 9 बजे मैंने कम से कम छह मिसाइलें देखीं. अब विश्वविद्यालय सहयोग कर रहा है. हम दूतावास के संपर्क में हैं और उन्होंने कहा है कि वे आगे क्या करना है, इसकी जानकारी देंगे. तेहरान में हालात बहुत तनावपूर्ण हैं. अगर संभव हो तो निकासी में हमें प्राथमिकता दी जानी चाहिए. विश्वविद्यालय बसें उपलब्ध कराएगा और हमें आर्मेनिया या अज़रबैजान की सीमा तक पहुंचाने में मदद करेगा, और आगे के कदम के बारे में दूतावास बताएगा.’

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कैसे और किस रूट से आएंगे छात्र?

भारतीय दूतावास छात्रों के लगातार संपर्क में है और आर्मेनिया व अजरबैजान जैसे पड़ोसी देशों के रास्ते निकासी के विकल्पों पर मार्गदर्शन दे रहा है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र पर पाबंदियों और जारी मिसाइल हमलों के कारण अधिकारी मानते हैं कि तत्काल निकासी एक जटिल चुनौती बनी हुई है. छात्र और उनके परिवार सुरक्षा, संचार व्यवस्था ठप होने और सहायता में देरी को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं. इस बढ़ते संकट के बीच भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की तत्काल जरूरत है. ऐसे में ईरान की यह पहले अभिभावकों के लिए जरूर राहत देने वाली बात है. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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