वित्तीय वर्ष में 25 फीसदी की होगी वृद्धि

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रणनीति : सीआइएल की सभी अनुषंगिक कोयला कंपनियों से श्रेष्ठ उत्पादन की दिशा में अग्रसर इसीएल पिछले वित्तीय वर्ष में उत्पादन लक्ष्य हासिल न कर पाने के बाद भी इसीएल प्रबंधन ने सीएमडी आरआर मिश्र के नेतृत्व में चालू वित्तीय वर्ष में 25 फीसदी अधिक उत्पादन करने का संकल्प लेकर कार्य शुरू कर दिया है. […]

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रणनीति : सीआइएल की सभी अनुषंगिक कोयला कंपनियों से श्रेष्ठ उत्पादन की दिशा में अग्रसर इसीएल
पिछले वित्तीय वर्ष में उत्पादन लक्ष्य हासिल न कर पाने के बाद भी इसीएल प्रबंधन ने सीएमडी आरआर मिश्र के नेतृत्व में चालू वित्तीय वर्ष में 25 फीसदी अधिक उत्पादन करने का संकल्प लेकर कार्य शुरू कर दिया है. इसके साथ ही सीएसआर में कई पायलट प्रोजेक्ट शुरू होंगे.
आसनसोल : इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) सह वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक आरआर मिश्र ने कहा कि इसीएल ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में कम से कम 25 फीसदी उत्पादन वृद्धि करने की रणनीति बनायी है. यह वृद्धि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) की सभी अनुषांगिक कोयला कंपनियों में सबसे अधिक होगी. बुधवार को एक विशेष भेंट में उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सीएसआर के तहत कई पायलय प्रोजेक्ट भी शुरू किये जाने है. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के विकास तथा सुविधाओं के प्रति भी कंपनी की जिम्मेवारी है. मौके पर कंपनी के कार्मिक निदेशक केएस पात्र तथा सीएमडी के तकनीकी सचिव नीलाद्री राय भी मौजूद थे.
सीएमडी श्री मिश्र ने कहा कि कई तकनीकी कठिनाइयों के बावजूद बीते वित्तीय वर्ष में कंपनी ने कोयला उत्पादन, प्रेषण, तकनीक क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. सभी मानकों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गयी है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने पिछले वर्ष सभी रिकॉर्ड तोड़ 40.52 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया तथा 42.99 मिलियन टन कोयले का प्रेषण किया.
वित्तीय वर्ष 2015-16 की तुलना में कोयला प्रेषण में 14.60 फीसदी की सकारात्मक वृद्धि रही. इसके कारण पहली अप्रैल, 2016 को कंपनी का कोयला स्टॉक 5.05 मिलियन टन था जो 31 मार्च, 2017 को मात्र 2.59 मिलियन टन रह गया. कोयला स्टॉक में 48 फीसदी की कमी आयी. सभी अनुषांगिक कंपनियों की तुलना में यह सर्वाधिक है. उत्पादकता में 4.43 फीसदी की सकारात्मक वृद्धि रही. भूमिगत उत्पादन में कंपनी ने लगातार पांचवें साल भी सकारात्मक वृद्धि जारी रखी तथा पिछले वर्ष 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की.
उन्होंने कहा कि झांझरा भूमिगत खदान में कंटीन्यूअस माइनर ने 31 मार्च को 5,050 टन उत्पादन कर एक दिन में सर्वाधिक उत्पादन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. झांझरा परियोजना के लांगवाल फेस से 20 दिसंबर, 2016 को 8,500 टन कोयले का उत्पादन किया. इस रिकॉर्ड के कारण इस परियोजना का कुल उत्पादन 14 हजार टन हुआ जो इस परियोजना के इतिहास में सर्वाधिक है.
सीआइएल के कार्मिक निदेशक का प्रभार संभव
डब्ल्यूसीएल तथा इसीएल के सीएमडी का दायित्व निभा रहे आरआर मिश्र को कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) के कार्मिक निदेशक का भी दायित्व मिल सकता है. सूत्रों का दावा है कि गुरुवार को इस आशय की अधिसूचना जारी हो सकती है. सनद रहे कि सीएमडी बनने से पहले श्री मिश्र सीसीएल के कार्मिक निदेशक के पद पर कार्य कर चुके हैं. सीआइएल के कार्मिक निदेशक आर मोहनदास को सेवा में विस्तार नहीं मिलने से हटा दिया गया है तथा उनका दायित्व फिलहाल एसएन प्रसाद देख रहे हैं. उनकी पृष्टभूमि मार्केटिंग की रही है.
निमचा, तालतोड़ में हाइवाल माइनिंग तकनीक
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कंपनी में कंटीन्यूअस माइनर, पावर्ड सपोर्ट लांगवाल, सरफेस माइनर जैसी अत्याधुनिक खनन तकनीकों का उपयोग हो रहा है. इसके साथ ही सतग्राम क्षेत्र के निमचा में तथा श्रीपुर क्षेत्र के तालतोड़ परियोजनाओं में अत्याधुनिक हाइवाल जैसी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग शीघ्र किया जायेगा. इस तकनीक का उपयोग जापान, पोलैंड तथा अमेरिका में होता है. दो दिन पहले ही बोर्ड ने इसकी मंजूरी दी है.
खुली खदान परियोजना में अपने किस्म की यह अनोखी तकनीक है. इसके माध्यम से जहां ओसीपी में खनन की सुविधा समाप्त हो जायेगी, इसके माध्यम से गैलरी बना कर मशीनों के माध्यम से खनन तिया जायेगा. इसके लिए बैंच बनाने की भी जरूरत नहीं होगी. तीन सौ मीटर तक कोयले की सीम में यह मशीन कोयले का खनन करेगी. इसके पहले एसइसीएल में इस तकनीक का उपयोग हो रहा है. उन्होंने कहा कि झांझरा परियोजना में आधुनिक तकनीक का उपयोग हो रहा है. पहली बार प्री-स्टीयर्ड व्हेकिल, मैन राइडिंग सिस्टम आदि तकनीक का उपयोग हो रहा है.
कंपनी की वित्तीय मजबूती का प्रयास
सीएमडी श्री मिश्र ने कहा कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए कई पहल की गयी है. केंद्र सरकार से पष्चिम बंगाल तथा झारखंड में कोयले ब्लॉक आवंटन की मांग की गयी है. बंगाल में बेहतर ब्लॉक नहीं होने के कारण झारखंड के दुमका तथा राजमहल में कोयला ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. इनके आवंटन से कंपनी की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो जायेगी. दुमका में दो सौ मिलियन टन तथा नॉर्थ राजमहल व साउथ राजमहल कोल ब्लॉक में 12 सौ मिलियन टन खनन योग्य कोयले का भंडार है.
उन्होंने कहा कि यह तय नहीं किया गया है कि इससे खनन विभागीय स्तर पर होगा या आउटसोर्सिग से. इनके आवंटन होने के बाद निर्णय लिया जायेगा. उन्होंने कहा कि इन कोल ब्लॉकों से कोयला उत्पादन शुरूहोने पर कंपनी का औसतन उत्पादन एक सौ मिलिटन टन से अधिक हो जायेगा. इससे कंपनी आर्थिक रूप से काफ ी मजबूत हो जायेगी. इसके कारण समय-समय पर विभिन्न कारणों से कंपनी पर पड़नेवाले आर्थिक बोझ से कंपनी की संपत्ति निगेटिव नहीं होगी.
सूचना व प्रौद्योगिकी का भी उपयोग
श्री मिश्र ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर कंपनी की गतिविधियों में पारदर्शिता लाने के लिए कई एप्प लांच करने का निर्णय लिया गया है. इनमें से कई विकसित हो गये हैं. इनमें बिल ट्रेकिंग सिस्टम, स्वच्छ विद्यालय, शिकायत निवारण (निदान) तथा विक्रय व विप्पणन एप्प शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मार्केटिंग के लिए संपर्क एप्प विकलित किया गया है. इसमें कंपनी की विभिन्न कोलियरियों में कोयले के भंडार, उनके ग्रेड, बिक्री के लिए ऑफर किये गये डीओ की मात्र, उनका ऑफर रेट समेत सभी विवरण उपलब्ध होंगे. सभी गतिविधियां ऑनलाइन होंगी तथा ग्राहकों को किसी भी तरह की शिकायत नहीं मिलेगी.
उन्हें विभिन्न स्तर पर होनेवाली परेशानियों से भी निजात मिलेगी. उन्होंने कहा कि कई एप्प प्रक्रियाधीन है. इनमें ई-आवास योजना, उद्यम संसाधन नियोजन प्रणाली तथा खदान जल निकासी पद्धति शामिल है. उन्होंने कहा कि खदान जल निकासी पद्धति के एप्प में विभिन्न कोलियरियों में जल के स्त्रोत, उनसे निकलनेवाले पानी की मात्र, उनका उपयोग, उनसे जुड़ी परियोजना की विस्तृत जानकारी, लाभुक ग्रामीणों की संख्या आदि की विस्तृत जानकारी मिल सकेगी.
सीएसआर के तहत समानान्तर आर्थिक संरचना: सीएमडी श्री मिश्र ने कहा कि सीएसआर के तहत ग्रामीणों की सुख सुविधा बढ़ाने के लिए कई पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं तथा कई शुरू किये जाने हैं. उन्होंने कहा कि कोलकाता के दक्षिणोश्वर, कालीघाट मंदिर, तारापीठ मंदिर तथा बैजनाथधाम (देवघर) में मंदिरों में चढ़ाये जानेवाले पुष्प, बेलपत्ते आदि को संरक्षित कर खाद बनाने का प्रोजेक्ट लागू बो गया है. फिलहाल दक्षिणोश्वर तथा देवघर में खाद बन रहा है. जबकि तारापीठ तथा कालीघाट में शीघ्र इसे शुरू किया जायेगा.
इसके बाद इस प्रोजेक्ट को कल्याणोश्वरी में भी लगाया जायेगा. उन्होंने कहा कि मंदिरों की इन सामग्रियों से बड़े पैमाने पर नदियों में प्रदूषण बढ़ता था. इन सामग्रियों को जमा कर इन्हें सूखाया जाता है तथा फिर इन्हें मशीन के माध्यम से जैविक खाद में बदला जाता है. इसका उपयोग किसान करते हैं. इसकी कीमत आम तौर पर 12 रूपये प्रति किलो आती है तथा यह खेती के लिए काफी लाभदायक है. इसका साइड इफेक्ट भी नहीं है. उन्होंने कहा कि श्रीपुर क्षेत्र में गुंजन पार्क की तर्ज पर झांझरा क्षेत्र में इकोलॉजिकल पार्क बनाय ा गया है तथा शीघ्र ही सालानपुर क्षेत्र तथा मुगमा क्षेत्र में ऐसे पार्क बनाये जायेंगे.
खदान के पानी का उपयोग विभिन्न मद में
उन्होंने कहा कि कंपनी की विभिन्न कोलियरियों से रोजाना छह करोड़ गैलन पानी की निकासी होती है. इनसे जुड़ी 11 परियोजनाओं का संचालन हो रहा है तथा 90 हजार ग्रामीण इससे लाभान्वित है.
इस तरह की 15 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है. इनके पूरा होने पर 98 हजार ग्रामीण लाभान्वित होंगे. घरेलू उपयोग के लिए पांच करोड़ गैलन पानी प्रतिवर्ष 101 गांवों में दिया गया. कृषि के लिए 2.6 करोड़ गैलन पानी की सप्लाइ 130.03 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए की गयी. उन्होंने कहा कि खदानों से निकलनेवाले रॉ वाटर का ट्रीटमेंट कर उसे पेयजल बनाने के लिए निंघा कोलियरी में पायलट प्रोजेक्ट लगाया जायेगा. वह ट्रीटमेंट पेयजल को आम जनता के लिए उपलब्ध कराया जायेगा. यदि यह प्रोजेक्ट सफल हुआ तो अपने स्तर से या पीपीपी मॉडल पर या किसी अन्य तरीके से इसके व्यवसायिक उपयोग पर विचार किया जायेगा ताकि ग्रामीण युवकों के लिए रोजगार सृजित हो सके. उन्होंने कहा कि खदान के पानी से पेयजल बनाने से इलाके की बड़ी समस्या दूर होगी.
बालू तथा ईंट बनाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट भी
सीएमडी श्री मिश्र ने कहा कि कंपनी के पास पहले से ही काफी ओवरबर्डेन है. नये प्रोजेक्ट के लिए भी ओवरबर्डेन के लिए ्तिरिक्त जमीन की आवश्यकता होगी. विभिन्न स्तरों से इन ओवरबर्डेन के खदानों में भरने की बात कही जा रही है. इसे देखते हुए ओवरबर्डेन से बालू व ईंट बनाने के पायलट प्रोजेक्ट लगाये जायेंगे. इससे प्रत्यक्ष लाभ यह होगा कि अन्य प्रोजेक्ट के लिए कम जमीन का अधिग्रहण करना होगा तथा जमीन अधिग्रहण के बदले कम नौकरी देनी होगी. उन्होंने कहा कि ओबी से बालू निकालने के लिए डब्ल्यूसीएल में पायलट प्रोजेक्ट लगाया गया है. इसके लिए सोदपुर वर्कशॉप की तकनीकी टीम नागपुर जायेगी.
वहां से आकर अपने वर्खशॉप में स्क्रेप की मदद से उक्त मशीन का निर्माण करेगी. उक्त मशीन से ओबी से बालू बनाया जायेगा. बाजार में आम बालू की कीमत छह सौ रुपये क्यूबिक मीटर है, जबकि इससे उत्पादित बालू की कीमत 160 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर होगी. इस बालू का उपयोग ग्रामीण निर्माण से लेकर अन्य कार्यो में कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि छर्मलों से निकलनेवाले बॉटम एश तथा ओबी के क्ले से मिला कर बेहतर ईंटों का निर्माण संभव है. डब्ल्यूसीएल में ऐसा ईंटों की लागत राशि प्रति ईंट दो रूपये से भी कम पड़ती है. उन्होंने कहा कि सोनपुर बाजारी प्रोजेक्ट के ओबी के लिए इन दो पायलेट प्रोजेक्टों का चयन किया गया है. आगामी तीन माह में इनके शुरू होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि इस बालू तथा ईंट का उपयोग सरकारी निर्माण या कंपनी के निर्माण में किया जा सकता है. इससे रोजगार तथा खर्च में कमी भी आयेगी. डब्ल्यूसीएल में इनके माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की आय होती है.
कंपनी उत्पादन में होगी 25 फीसदी की वृद्धि
सीएमडी श्री मिश्र ने कहा कि बीते वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 40.52 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है. चालू वित्तीय वर्ष 47 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला है. लेकिन कंपनी ने इस वर्ष कम से कम 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने की रणनीति बनायी है.
इस दिशा में पहल शुरू हो गयी है. यह पिछले साल की तुलना में 25 फीसदी अधिक है. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में राजमहल परियोजना, सोनपुर बाजारी परियोजना, झांझरा क्षेत्र, सालानपुर क्षेत्र तथा पांडेश्वर क्षेत्र की मुख्य भूमिका होगी. टीम वर्क शुरू कर दिया गया है तथा परिणाम भी दिखने लगे हैं.
कौशल विकास संबंधी कई प्रोजेक्ट
श्री मिश्र ने कहा कि कंपनी कमांड इलाकों में स्थानीय युवकों तथा परियोजना प्रभावित परिवारों के 21 सौ युवकों को एनएसडीसी, सीआइपीइटी, एटीडीसी, जार्ज टेलीग्राफ जैसी संस्थाओं की मदद से ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रिकल, एपेरल डिजाइनिंग, प्लास्टिक प्रोसेसिंग, प्लाबिंग आदि विभिन्न तकनीकी ट्रेडों में प्रशिक्षित किया गया है. 14 सौ युवकों को रोजगार के अवसर मिले हैं. महिलाओं को सिलाई, क़ाई तथा ब्यूटीफिशियन आदि का प्रशिक्षण दिया गया है. आइआइटी (खड़गपुर) के तत्वाधान में कृषि परियोजना के तहत पोषण और औषधीय पौधों की खेती का प्रशिक्षम दिया गया है.
की गयी है फुटबॉल अकादमी की स्थापना
िवभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए कंपनी ने फुटबॉल अकादमी की स्थापना की गयी है. इससे आसपास के इलाकों के युवकों को अपनी प्रतिभा निखारने का समुचित अवसर प्राप्त हो रहा है. आगामी वर्षो में अकादमी में फ्रशिक्षित बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे.
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