हड़ताल से प्रभावित होगा कामकाज

आसनसोल: कोयला खनन (विशेष संशोधन) अध्यादेश के खिलाफ सभी केंद्रीय यूनियनों के आह्वान पर कोल इंडिया में पांच दिवसीय कोयला हड़ताल मंगलवार से शुरू होगी. यूनियनों ने इसकी तैयारी को अंतिम रूप दे दिया है. कोलकाता में उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) के साथ हुई त्रिपक्षीय वार्ता भी विफल रही. ऊर्जा मंत्री पियूष गोयल ने इस […]
आसनसोल: कोयला खनन (विशेष संशोधन) अध्यादेश के खिलाफ सभी केंद्रीय यूनियनों के आह्वान पर कोल इंडिया में पांच दिवसीय कोयला हड़ताल मंगलवार से शुरू होगी. यूनियनों ने इसकी तैयारी को अंतिम रूप दे दिया है. कोलकाता में उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) के साथ हुई त्रिपक्षीय वार्ता भी विफल रही.
ऊर्जा मंत्री पियूष गोयल ने इस हड़ताल को टालने के लिए तीन बैठकें बुलायी थी. लेकिन यूनियनों ने इसका बहिष्कार किया. हड़ताल से रोजाना 150 करोड़ से अधिक राशि के नुकसान की संभावना है.
इसीएल में सक्रिय जैक के संयोजक व एटक नेता आरसी सिंह ने कहा कि कोयला श्रमिकों के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी लड़ाई शुरूो रही है. सभी यूनियनों ने इसकी तैयारी मे एकजुटता का परिचय दिया है. यदि सरकार ने इसके बाद भी अपना निर्णय नहीं बदला तो अनिश्चित कालीन हड़ताल की जायेगी. बीएमएस नेता जयनाथ चौबे ने कहा कि केंद्रीय सरकार सार्वजनिक उद्योगों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. कोयला ब्लॉकों का आवंटन कैप्टिव माइंस के रूप में करने से किसी का विरोध नहीं है. लेकिन निजी कंपनियों को उत्खनित कोयला खुले बाजार मे बेचने की अनुमति देना श्रमिक व देश विरोधी है.
इससे निजीकरण बढ़ेगा. एचएमएस के नेता एसके पांडेय ने कहा कि यूनियनों ने एकजुटता दिखायी है और हड़ताल पूरी तरह से सफल होगी. सभी यूनियनों ने कोलियरी स्तर पर संयुक्त सभाएं व तैयारी की है. सरकार को अपनी शक्ति का पता चल जायेगा. इंटक नेता चंड़ी चटर्जी ने कहा कि बड़ी लड़ाई के बाद कोलियरियों का राष्ट्रीयकरण हुआ था. इससे खदानों की सुरक्षा के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर में भी निर्णायक बदलाव आया था. केंद्र सरकार विकास के नाम पर कोयला उद्योग को 40 साल पीछे ले जाने की कोशिस कर रही है.
पांच दिवसीय हड़ताल के समर्थन में सोमवार को राजमहल क्षेत्र और एसपी माइंस क्षेत्र की चित्र कोलियरी में संयुक्त सभाएं आयोजित की गयी. इन्हें एटक नेता आरसी सिंह, इंटक के आरपी शर्मा, बीएमएस के जयनाथ चौबे, देवनाथ यादव व सीटू नेता व स्थानीय यूनियनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया. श्री सिंह ने कहा कि यह लड़ाई आर्थिक नहीं है. सरकार के इस अध्यादेश से सीआइएन का आस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा. यह हड़ताल राष्ट्रीय स्तर पर कंपनी को बचाने के लिए की जा रही है. कंपनी के हित में इस हड़ताल का समर्थन अधिकारियों को भी करना चाहिए, क्यों सरकार का यह निर्णय सरकारी कोयला कंपनी के हितों के प्रतिकूल है. इधर कोल इंडिया अध्यक्ष एके दूबे ने केंद्रीय यूनियनों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है. उनका कहना है कि प्रबंधन ने यूनियनों की अधिसंख्य मांगें मान ली है. इस समय हड़ताल से देश को काफी परेशानी होगी. देश को ऊर्जा की जरूरत है. हड़ताल होने से कोल इंडिया अपना निर्धारित उत्पादन लक्ष्य हासिल नहीं कर पायेगी.
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