वार्ड संख्या 14 में ग्यारह हजार की आबादी पर हैं ग्यारह सफाईकर्मी

Updated at : 30 Jan 2020 1:02 AM (IST)
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वार्ड संख्या 14 में ग्यारह हजार की आबादी पर हैं ग्यारह सफाईकर्मी

वार्ड का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण सभी जगह नहीं पहुंच रहे कर्मी. आसनसोल : नगर निगम के वार्ड संख्या 14 के विभिन्न इलाकों में कूड़ेदान की कमी के कारण जगह-जगह कूड़े का ढ़ेर लगा है. नालियों की सफाई नहीं होने से इसमें पड़े कचरे की सड़न लोगों के लिये समस्या बनी हुई है. पानी […]

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वार्ड का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण सभी जगह नहीं पहुंच रहे कर्मी.

आसनसोल : नगर निगम के वार्ड संख्या 14 के विभिन्न इलाकों में कूड़ेदान की कमी के कारण जगह-जगह कूड़े का ढ़ेर लगा है. नालियों की सफाई नहीं होने से इसमें पड़े कचरे की सड़न लोगों के लिये समस्या बनी हुई है. पानी निकासी व्यवस्था सही नहीं होने के कारण घरों के सामने जल जमाव है. पार्षद नरेंद्र मुर्मू ने कहा कि वार्ड के क्षेत्रफल के आधार पर सफाई कर्मियों की संख्या काफी कम है. इसके बावजूद सीमित संसाधनों में बेहतर सफाई व्यवस्था देने का प्रयास किया जाता है. ग्यारह हजार आबादी वाले इस वार्ड में सिर्फ ग्यारह सफाई कर्मी हैं.
आंखो देखी.
वार्ड संख्या 14 अंतर्गत स्वीपर कॉलोनी, कल्ला इंडियन ऑयल रिफाइनरी इलाके में गंदगी की भरमार है. कूड़ेदान के अभाव में लोग खाली जमीन को ही कूड़ेदान बना दिया है. जगह-जगह कूड़े का ढ़ेर है. पानी निकासी की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों के घरों के सामने पानी जमा है. जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. नालियां गंदगी से भरी हैं. नालियों में कचरे की सड़न से इलाके में दुर्गंध फैली है.
क्या कहते हैं पार्षद?
वार्ड पार्षद नरेंद्र मुर्मू ने कहा कि उनके वार्ड का क्षेत्रफल काफी बड़ा है. नगर निगम से आवंटित 11 सफाई कर्मी इतने बड़े वार्ड के लिए पर्याप्त नहीं हैं. निगम के सेनिटेशन विभाग एवं मेयर परिषद सदस्य (सफाई) लखन ठाकुर से कर्मियों की संख्या बढ़ाये जाने की मांग की गयी थी, लेकिन कोई पहल नहीं हुई. इलाके को बांट कर सफाई कर्मी कार्य करते हैं. जरूरत के अनुसार कीटनाशक, ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव किया जाता है. उपलब्ध संसाधनों से ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने का हर सम्भव प्रयास किया जाता है.
इंडियन ऑयल रिफाइनरी इलाके के सुजन गुप्ता ने कहा कि इलाके में कूड़ेदान नहीं होने के कारण लोग निकट के मैदान में ही कचरा फेंक देते हैं. आवारा पशु कचरे को पूरे इलाके में फैला देते हैं. कचरे का प्लास्टिक चारों ओर फैला है. जिससे पूरे इलाके में गंदगी का माहौल है.
इंडियन ऑयल रिफाइनरी इलाके के एसके सिन्हा ने कहा कि इलाके में नियमित रूप से सफाई कर्मी नहीं आते हैं. जगह जगह कचरे का ढ़ेर है. नालियों में सड़ रहा कचरे की बदबू से लोग परेशान हैं.
समस्या को लेकर पार्षद से शिकायत करने पर भी कोइ सहयोग नहीं मिल पाता है.
इंडियन ऑयल रिफाइनरी इलाके के निवासी रामनाथ महतो ने कहा कि महीने में एक बार फॉगिंग मशीन का उपयोग इलाके में होता है. नियमित सफाई न होने और जंगल झाड़ के भरमार के कारण इलाके में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा है. प्रशासनिक सफाई व्यवस्था सही नहीं होने के कारण लोग खुद अपने इलाके में सफाई करते हैं.
इंडियन ऑयल रिफाइनरी इलाके के मंटू दास ने कहा कि नालियों में सड़ रहा कचरे की बदबू से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है. पार्षद इलाके में सफाई कार्य का मुआयना नहीं करते हैं. मीटिंग या अन्य कार्यक्रमों के दौरान ही नजर आते हैं. गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है.
इंडियन ऑयल रिफाइनरी इलाके की चंपा देवी ने कहा कि कूड़ेदान नहीं होने के कारण लोग खुले में कचरा फेंकने को विवश हैं. जिसे लेकर लोगों में आपसी विवाद होते रहता है. पार्षद से लगातार कूड़ेदान बनवाने की मांग की गई, लेकिन नहीं बना. जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
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