अड्डा ने एमएसटीपी में स्थित 22 उद्योगों को भेजा लीगल नोटिस

Updated at : 20 Jan 2020 5:20 AM (IST)
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अड्डा ने एमएसटीपी में स्थित 22 उद्योगों को भेजा लीगल नोटिस

आवंटित जमीन से अधिक जमीन पर कब्जा करने के मामले में भेजा नोटिस सब लीज, लीज ट्रांसफर की प्रक्रिया हो सकती है रद्द, गिरवी की अनुमति हो सकती है वापस 60 एकड़ जमीन पर पाया गया कब्जा, जमीन का बाजार मूल्य 80 करोड़ से अधिक डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया के तहत सर्वे में हुआ था मामला उजागर […]

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  • आवंटित जमीन से अधिक जमीन पर कब्जा करने के मामले में भेजा नोटिस
  • सब लीज, लीज ट्रांसफर की प्रक्रिया हो सकती है रद्द, गिरवी की अनुमति हो सकती है वापस
  • 60 एकड़ जमीन पर पाया गया कब्जा, जमीन का बाजार मूल्य 80 करोड़ से अधिक
  • डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया के तहत सर्वे में हुआ था मामला उजागर
आसनसोल. रानीगंज इलाके में स्थित मंगलपुर सेटेलाइट टाउनशिप प्रोजेक्ट (एमएसटीपी) के बखतारनगर और मंगलपुर मौजा में आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (अड्डा) की 60 एकड़ जमीन पर विभिन्न उद्योगों द्वारा कब्जा करने के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अड्डा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ने राज्य के शहरी विकास विभाग को पत्र लिखा.
सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के तहत उद्योगों में सब लीज और ट्रांसफर की प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा गिरवी (मोर्टगेज) की अनुमति को वापस लेने की कार्रवाई करने की अनुमति के लिए अपील की गई है. शहरी विकास विभाग यदि यह अनुमति प्रदान कर देता है तो उद्योगों के लिए कठिन समस्या उत्पन्न हो जाएगी.
सनद रहे कि अड्डा प्रबंधन ने डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया के तहत एमएसटीपी इलाके का टोटल स्टेशन सर्वे (जमीन की नापी) करायी. जिसमें यह खुलासा हुआ है कि इस इलाके में स्थित 22 उद्योगों ने आवंटित जमीन के परिमाण से अधिक करीब 60 एकड़ जमीन पर कब्जा कर रखा है.
अतिरिक्त जिला सब रजिस्टार (एडीएसआर) के लैंड वैल्यूएशन के अनुसार, कब्जा वाली जमीन का बाजार मूल्य करीब 84 करोड़ रुपये है. कब्जा करने वालों की सूची में शामिल 22 उद्योगों में से बखतारनगर मौजा में स्थित हुगली मिल्स प्रोजेक्ट ने अकेले ही करीब बीस करोड़ रुपये मूल्य की 14.40 एकड़ जमीन पर कब्जा किया है. जिसका कोई दस्तावेज अड्डा के पास नहीं है.
कुछ उद्योग ऐसे हैं, जो पूर्णतया कब्जा की गयी जमीन पर ही स्थित हैं. अड्डा ने इन उद्योगों को प्रोविजनल अलॉटमेंट दिया था. जमीन का पैसा जमा नहीं होने और अन्य तकनीकी कारणों से अड्डा से जमीन का लीज डीड आवंटित नहीं हुआ. इसके बावजूद प्रोविजनल अलॉटमेंट पर ही उद्योग स्थापित हो गए और वर्षों से चल रहे हैं.
इन उद्योगों को अड्डा ने नोटिस जारी कर कब्जे वाली जमीन का सम्पूर्ण ब्योरा देते हुए जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज (लीज डीड) अड्डा में जमा करने को कहा गया. किसी ने भी कागजात जमा नहीं किया. जिसके उपरांत सभी उद्योगों को लीगल नोटिस जारी करने की प्रक्रिया आरम्भ हुई. 22 में से सिर्फ एक उद्योग से ही अबतक लीगल नोटिस का जवाब मिला है.
शहरी विकास विभाग से कार्रवाई की अनुमति की मांग
पश्चिम बर्दवान जिला शिल्पांचल क्षेत्र है. यहां के उद्योगों को जिले का रीढ़ माना जाता है. ऐसे में उद्योगों पर किसी भी प्रकार कार्रवाई के लिए अड्डा प्रबंधन काफी फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहा है.
एमएसटीपी में 22 उद्योगों द्वारा 60 एकड़ जमीन पर कब्जा के मामले में अड्डा प्रबंधन ठोस कार्रवाई करने को लेकर सकते में है. अड्डा के सीईओ ने इन उद्योगों पर कार्रवाई के लिए शहरी विकास विभाग को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगा है. सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के तहत उद्योगों में सब लीज व ट्रांसफर की प्रक्रिया पर रोक लगाने और गिरवी की अनुमति को वापस लेने की अनुमति देने की अपील की गई है.
अड्डा की अनुमति के बगैर किसी भी उद्योग को सब लीज पर नहीं दिया जा सकता है और लीज ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकता है. ऐसे में जो उद्योग रुग्ण हैं वे सब लीज या लीज ट्रांसफर कर पैसे नहीं निकाल पाएंगे. लगभग सभी उद्योग बैंक के पास जमीन गिरवी रखकर कर्ज लेते हैं. अड्डा की लीज वाली जमीन को गिरवी रखने के लिए अड्डा की अनुमति लेनी होती है. तभी बैंक उसे गिरवी रखकर कर्ज देता है.
अड्डा यदि गिरवी की अनुमति बैंक से वापस लेती है तो सभी उद्योगों पर बैंक का कर्जा चुकाने को लेकर दवाब बढ़ जाएगा. ऐसे में उद्योगों की हालत खराब हो सकती है. कनूनी प्रावधान के तहत अड्डा के पास यह अधिकार है कि लीज डीड का उल्लंघन करने पर वह गिरवी अनुमति वापस ले सकती है.
क्या है पूरी कहानी?
दुर्गापुर प्लानिंग एरिया और आसनसोल प्लानिंग एरिया, दोनों का विलय कर वर्ष 1980 में अड्डा का गठन हुआ था. शहरी और औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए वर्ष 1986 में जिले के बखतारनगर, मंगलपुर और रोनूई इन तीन मौजा में स्थित खतियान एक (वेस्टेड लैंड) से 720 एकड़ जमीन राज्य सरकार ने अड्डा को दी.
इसके एवज में अड्डा ने 76 लाख रुपये का भुगतान किया था. इसके साथ ही अड्डा ने यहां 120 एकड़ रैयती जमीन का भी अधिग्रहण किया. कुल 840 एकड़ जमीन पर अड्डा ने एमएसटीपी की नींव रखी. एमएसटीपी के अंतर्गत ही औद्योगिक क्षेत्र मंगलपुर इंडस्ट्रियल स्टेट (एमआईएस) बनाया गया.
जहां उद्योग लगाने के लिए वर्ष 1995 से जमीन आवंटन का कार्य आरंभ हुआ. यहां बड़े, मझौले और छोटे कुल 45 उद्योग स्थापित हैं. उद्योगों के लिए अड्डा ने वर्ष 1995 से जमीन आवंटन का कार्य आरंभ किया. राज्य सरकार से मिली 720 एकड़ जमीन का अड्डा के नाम पर ट्रांसफर मई 2018 में हुआ.
जिसके बाद जमीन का डिजिटलाइजेशन मैप बनाने के लिए इलाके का टोटल स्टेशन सर्वे कराया. जिसमें 22 उद्योग ऐसे पाये गये, जिन्होंने आवंटित जमीन के परिमाण से पांच कट्ठा से लेकर 14 एकड़ तक अतिरिक्त जमीन पर अतिरिक्त कब्जा करके उसे अपने औद्योगिक परिसर में शामिल कर चारदीवारी से घेर लिया. कब्जे वाली जमीन का परिमाण 60 एकड़ पाया गया. जिसका वर्तमान बाजार मूल्य 84 करोड़ रुपया है.
जमीन कब्जा करने वाले उद्योगों की सूची
अड्डा प्रबंधन के अनुसार एमआईएस में जिन उद्योगों ने अतिरिक्त जमीन पर कब्जा किया है उसमें बखतारनगर और मंगलपुर मौजा में अम्बो एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड एंड अम्बो फूड प्राइवेट कंपनी, द कम्युनिक, धनबाद फ्यूल्स लिमिटेड, श्री गोपाल गोविंद प्राइवेट लिमिटेड, हुगली मिल्स प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, जय बालाजी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मानभूम इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, मंगलपुर सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड, मोटेल वेलकम, प्रगति व्यापार प्राइवेट लिमिटेड, रैनमैक वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, सत्यम आयरन एंड स्टील कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड, श्री श्याम एग्रो बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, विदेही
सिरामिक्स @ हर्क इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड, सृष्टि सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड, मनपसंद सीमेंट, जय सलासर बालाजी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, खेतान सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड, मंगलम जनरल वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड और मनपसंद एग्रो फूड प्राइवेट लिमिटेड शामिल है.
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