खाद्य पदार्थों में रासायनिक रंगों का हो रहा प्रयोग

Updated at : 15 Oct 2019 2:24 AM (IST)
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खाद्य पदार्थों में रासायनिक रंगों का हो रहा प्रयोग

धड़ल्ले से व्यवसायी उड़ा रहे सरकारी नियमों की धज्जियां त्यौहारी मौसम में भी लोगों के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़ दुर्गापुर : खाने में रासायनिक रंगों को मिलाना कानूनी रूप से दंडनीय है. लेकिन शिल्पांचल में विभिन्न खाद्य पदार्थों में रसायनों रंगो को मिश्रित किया जा रहा है. बेनाचिती सहित विभिन्न बाजारो में दुकानदारो द्वारा […]

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धड़ल्ले से व्यवसायी उड़ा रहे सरकारी नियमों की धज्जियां

त्यौहारी मौसम में भी लोगों के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

दुर्गापुर : खाने में रासायनिक रंगों को मिलाना कानूनी रूप से दंडनीय है. लेकिन शिल्पांचल में विभिन्न खाद्य पदार्थों में रसायनों रंगो को मिश्रित किया जा रहा है. बेनाचिती सहित विभिन्न बाजारो में दुकानदारो द्वारा लोगो को आकर्षित करने के लिए खाद्य पदार्थों खास कर त्योहारी मौसम मे बिकने वाली मिठाइयो में उपयोग किया जा रहा है. खाद्य व पेय पदार्थों में रंगों की प्रवृत्ति और इसकी मात्रा के उपयोग को लेकर नियम निर्धारित किए गए हैं, जिसके तहत प्राकृतिक रंगों को ही खाद्य रंगों की श्रेणी में रखा गया है.

अलग-अलग पदार्थों के लिए इसकी मात्रा तय है. जैसे मिठाई में 200 पीपीएम ही रंग मिलाया जा सकता है. मोटे तौर पर बड़े स्तर पर कार्य करने वाली कम्पनियों में तो किसी हद तक इन मानकों का ध्यान रखा भी जाता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर और छोटे-मोटे कारोबारियों को नियमों की जानकारी तक नहीं है. अक्सरहां वे प्राकृतिक रंगों के स्थान पर रसायनिक रंगों का ही प्रयोग करते हैं.

इन दोनों की कीमत में 10 से 15 गुना तक का अंतर रहता है. इसके साथ ही वे रंगों का प्रयोग भी मनमाने ढंग से करते हैं. भले ही रंगों की चमक से उनकी बिक्री में इजाफा हो जाता हो, लेकिन ऐसे खाद्य पदार्थ ग्राहकों के लिए बेहद ही खतरनाक बन जाते हैं. हानिकारक रंगों की मिलावट सबसे अधिक मिठाइयों में ही रहती है. इसके साथ ही फल-सब्जी, जूस, मसाले व बेसन आदि को भी अधिक अच्छा दिखाने या मिलावट छिपाने के लिए रासायनिक रंगों का प्रयोग किया जाता है. दुकानदार ने बताया कि मिठाइयो का आकर्षण बढ़ाने के लिए रसायनिक रंग मिलाया जाता है.

प्राकृतिक रंगों की कीमत अधिक होने के कारण मजबूरी मे रसायनिक रंग का प्रयोग किया जाता है. स्थानीय लोगो का आरोप है कि इसकी जानकारी होने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. सस्ते और घटिया अखाद्य रासायनिक रंगों का प्रयोग खाद्य पदार्थों में किया जा रहा है, जिसके चलते व्यवसायी तो मोटा मुनाफा कमाते हैं, जबकि उपभोक्ताओं को बीमारियां मिलती हैं.

फूड एंड सेफ्टी विभाग के अधिकारी प्रवेश शंकर चौबे ने बताया कि विभाग की ओर से चेकिंग के साथ साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. विभाग की टीम ने त्योहारी सीजन को देखते हुए शहर में अभियान चला रखा है. अखाद्य रसायनिक रंगों का प्रयोग को लेकर दुकानदारो को सचेत किया जा रहा है. स्थानीय स्तर पर और छोटे-मोटे कारोबारियों को नियमों की जानकारी तक नहीं है. रंगो को लेकर उनमे जागरूकता का अभाव है.

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