पेंशन नीति की समीक्षा की मांग की एआईएसीई ने
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Apr 2019 1:48 AM (IST)
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प्रावधान के अनुसार हर तीन साल पर होनी थी समीक्षा, एक बार भी नहीं विभिन्न राजनीतिक दलों ने चुनावी घोषणापत्र में नहीं किया शामिल, रोष सांकतोड़िया : कोयला अधिकारियों के संघ एआईएसीई ने पेंशन बढ़ोतरी की मांग को लेकर फिर से आवाज उठाई है. उसका कहना है कि पेंशन लागू होने के बाद से अब […]
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प्रावधान के अनुसार हर तीन साल पर होनी थी समीक्षा, एक बार भी नहीं
विभिन्न राजनीतिक दलों ने चुनावी घोषणापत्र में नहीं किया शामिल, रोष
सांकतोड़िया : कोयला अधिकारियों के संघ एआईएसीई ने पेंशन बढ़ोतरी की मांग को लेकर फिर से आवाज उठाई है. उसका कहना है कि पेंशन लागू होने के बाद से अब तक एक बार भी पेंशन पॉलिसी की समीक्षा नहीं की गई है. जबकि इसमें यह प्रावधान किया गया था कि हर तीन साल के बाद पेंशन की समीक्षा होगी.
राजनीतिक दलों को भी पत्र लिखकर उनके पेंशन मामले को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने तथा इस दिशा में कोई कदम उठाने की मांग रखी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसे लेकर भी कोयला अधिकारियों में नाराजगी है. पेंशन सहित अन्य मुद्दों को लेकर एसोसिएशन ऑफ कोल एग्जिक्यूटिव (एआईएसई) की बैठक हुई. इसमें निर्णय लिया है कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन किया जायेगा. कोल इंडिया की पेंशन स्कीम संबंधी अध्यादेश को 1998 में लागू किया गया था.
इसमें एक अप्रैल, 1994 से रिटायर होने वाले अधिकारी, कर्मचारियों को भी शामिल किया गया था. लेकिन इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है. बीते कई वर्ष से पुरानी पॉलिसी के तहत कम पेंशन राशि का भुगतान किया जा रहा है. एसोसेशन का कहना है कि कोल इंडिया व उसकी सहायक कंपनियों में 4.5 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं. कोल पेंशनर्स को पहले से ही कम पेंशन मिल रहा है. अब किसी भी पेंशनर्स को अधिकतम 45 हजार रुपए तक पेंशन भुगतान का नियम बनाने की तैयारी चल रही है. इसे लेकर भी नाराजगी है.
कोयला अधिकारी संघ की मीटिंग में डिफाइंड कंट्रीब्यूटरी पेंशन एंड रिटायर्ड एक्जीक्यूटिव पर विस्तार से चर्चा हुई. इसमें एआईएसीई ने प्रबंधन से मांग की है कि एनपीएस की राशि के साथ उनको ब्याज का भुगतान भी किया जाना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. एक जनवरी, 2007 में अधिकारियों के वेतन पुनरीक्षण के दौरान न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) का प्रावधान किया गया था. इस मद में राशि की कटौती होती रही. कई हजार करोड़ रुपये न्यू पेंशन स्कीम फंड में जमा है. इस जमा राशि पर ब्याज की मांग हो रही है.
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