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बालुरघाट में चतुष्कोणीय मुकाबला : भाजपा, तृणमूल, आरएसपी व कांग्रेस प्रत्याशियों ने झोंकी ताकत

Updated at : 08 Apr 2019 7:22 AM (IST)
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बालुरघाट में चतुष्कोणीय मुकाबला : भाजपा, तृणमूल, आरएसपी व कांग्रेस प्रत्याशियों ने झोंकी ताकत

बालुरघाट : दक्षिण दिनाजपुर जिले के एक मात्र लोकसभा क्षेत्र बालुरघाट में आगामी 23 अप्रैल को मतदान होना है. मतदान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से पुरजोर तैयारी की जा रही है. चुनाव की तिथि की घोषणा के बाद से ही विभिन्न पार्टियों की ओर से भी अपने-अपने प्रत्याशियों […]

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बालुरघाट : दक्षिण दिनाजपुर जिले के एक मात्र लोकसभा क्षेत्र बालुरघाट में आगामी 23 अप्रैल को मतदान होना है. मतदान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से पुरजोर तैयारी की जा रही है. चुनाव की तिथि की घोषणा के बाद से ही विभिन्न पार्टियों की ओर से भी अपने-अपने प्रत्याशियों का जीत सुनिश्चित करने के लिए जंग जारी है.
इसी बीच तृणमूल, भाजपा, कांग्रेस, वाममोर्चा व निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है. जिला चुनाव विभाग सूत्रों से पता चला है कि बालुरघाट सीट से अबतक कुल 13 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है. नामांकन का समय समाप्त हो चुका है. अब स्कूटनी होना है. इसके साथ ही जैसे-जैसे चुनाव का दिन करीब आता जा रहा है वैसे वैसे विभिन्न राजनैतिक पार्टियों का प्रचार भी तेज होता जा रहा है.
2014 में बालुरघाट क्षेत्र से तृणमूल प्रत्याशी अर्पिता घोष विजयी हुई थी. उन्होंने आरएसपी प्रत्याशी विमलेंदु सरकार को 1 लाख 06 हजार 964 मतों से पराजित किया. जबकि भाजपा प्रत्याशी विश्वप्रिय राय चौधरी तीसरे स्थान पर थे. उन्हें कुल 2 लाख 23 हजार 014 वोट मिले था. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी ओमप्रकाश मिश्र को सिर्फ 80 हजार 715 वोट मिले थे. 2019 में बालुरघाट लोकसभा सीट से जिले से कुल 13 प्रत्याशियों ने पर्चा भरा है. लेकिन मुख्य रूप से लड़ाई चार पार्टियों के बीच है.
तृणमूल कांग्रेस पिछली बार की विजयी प्रत्याशी अर्पिता घोष को खड़ा किया गया है. 2014 के चुनाव में इस केंद्र में अर्पिता घोष को कुल 4 लाख 09 हजार 641 वोट मिले थे. प्रत्याशी का दावा है कि इलाके का विकास किया गया है. उनका कहना है कि सांसद कोष की राशि 100 फिसदी खर्च की गयी है. इसी तर्ज पर देश के 523 सांसदों में पहले 10 में अर्पिता घोष का नाम शामिल है. लेकिन इसकी कुछ खामियां भी है.
लोगों का कहना है कि वह जिले में 2017 में आये भीषण बाढ़ के समय जिलावासियों के साथ नहीं थी. साथ ही पार्टी का अंदरुनी विवाद भी उनके विपक्ष को अलग इंधन दे रहा है. साथ ही विरोधियों ने उनके कोलकाता के निवासी होने को लेकर भी तंज कस रहे है. अर्पिता घोष का कहना है कि उन्होंने अपने लोकसभा केंद्र में सांसद विकास कोष की राशि को विभिन्न विकास कार्यों में 100 फिसदी खपाया है.
इलाके में बिजली, पेयजल का टैंक, सेनेटरी से लेकर नगरपालिका के विकास योजनाओं को कार्यान्वित किया गया है. विरोधी झूठी अफवाह फैला रहे है. भाजपा के 2014 के प्रत्याशी विश्वप्रिय राय चौधरी थे. जबकि इसबार इस केंद्र से गौड़बंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुकांत मजूमदार को भाजपा के टिकट पर लड़ रहे है.
भाजपा प्रत्याशी बालुरघाट के ही निवासी है. उनका मुख्य मुद्दा इलाके में रेलवे की आवाजाही को सुचारु करना है. इनका कहना है कि उनकी साफ सुथरी छवि उन्हें अवश्य जीत दिलायेगी. हालांकि इनका सीधे तौर पर कभी भी राजनीति से संपर्क नहीं रहना विरोधियों को मौका दे रहा है. साथ ही जिले में पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के तीसरे स्थान पर होना भी इनके जीत पर संशय बनाता है. भाजपा प्रत्याशी डॉ. सुकांत मजूमदार का कहना है कि सांसद विकास कोष से जिल में क्या विकास हुआ है यह खोजकर निकलना भी मुश्किल है.
उन्होंने विजयी होने पर इलाके में रोजगार के साधन जुटायेंगे. साथ ही रेलमार्ग के विकास व बुनियादपुर में रेलवे वागन फैक्ट्री चालू करवायेंगे. वाममोर्चा के पिछली बार के प्रत्याशी विमलेंदु सरकार के स्थान पर इसबार आरएसपी प्रत्याशी रनेन बर्मन को प्रत्याशी बनाया गया है. वह इससे पहले चार बार बालुरघाट केंद्र से सांसद रह चुके है. वह इलाके के भूमिपुत्र होने के साथ ही चार बार के सांसद है.
इसलिए जिले के हर एक दूर दराज के इलाकों में उनकी जान पहचान है. हालांकि वह पार्टी के अंदरुनी विवाद के कारण कुछ दिनों तक राजनीति से दूर रहे है. जिसके कारण लोगों से उनका जुड़ाव कुछ कम हो गया है. साथ ही जिले में अब वाममोर्चा की पकड़ काफी कमजोर भी हो गयी है.
प्रत्याशी का कहना है कि उनकी पार्टी पूरे साल तक लोगों से संपर्क बनाये रखती है. अब लोग तृणमूल व भाजपा से हताश होकर वाममोर्चा पर भरोषा कर रहे है. कांग्रेस ने पिछले बार के प्रत्याशी ओमप्रकाश मिश्र की जगह इसबार भूमिपुत्र सादेक सरकार को प्रत्याशी बनाया है. हालांकि पिछली लोकसभा चुनाव में एआईयूडीएफ की ओर से लड़कर उन्होंने 10 हजार 547 वोट जुटाये थे.
अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने के कारण उम्मीद है की अल्पसंख्यक वोट बैंक उनके काम आ जाये. साथ ही वह जिले के भूमिपुत्र भी है. भाजपा, तृणमूल, आरएसपी व कांग्रेस. जीत के लिए सभी दलों के प्रत्याशी पूरी तरह से आशावादी है. अब जीत किसे मिलती है, यह मतदान के बाद 23 मई को मतगणना से पता चल पायेगा.
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