- जन समर्थन मिलने लगा है सेव फूड एवं सेव लाईफ अभियान को
- कोलकाता से बचा भोजन आसनसोल तक पहुंच रहा है वाहनों से
आसनसोल : सेव फूड एवं सेव लाईफ अभियान के तहत नष्ट होने वाले भोजन को जरूरतमंद लोगों के उपयोग के लिए देनेवाले फुड इडूकेशन एंड इकॉनोमिक डेवलपमेंट सोसाइटी के संस्थापक चंद्रशेखर कुंडू के अभियान को जनसमर्थन मिलने लगा है.
उन्होंने कहा कि आइआइएम (कोलकाता) के चार कैंटीन के प्रतिदिन का पका हुआ बचा भोजन, कोलकाता की बड़ी निजी कंपनी के कैंटीन एवं आसनसोल के इंजीनियरिंग कॉलेज के कैँटीन का बचा भोजन पहले डस्ट बीन में फेंक दिया जाता था. इस समय सैकड़ों जरूरतमंदों के पेट भरने में काम आता है. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में देश में 22 हजार टन खाद्यान्न नष्ट हुए हैं.
एक साल में 88 हजार करोड़ रूपये मूल्य का पका हुआ बचा भोजन बिना उपयोग किये नष्ट हो जाता है. देश के एक साल का मिड डे मील का बजट 9500 करोड़ रूपये है. उन्होंने कहा कि देश के शिर्ष संस्थानों के अधिकारियों को पत्र लिख कर कोस्मेटिक, सौंदर्य प्रसाधनों की तरह ही पके हुए भोजन को नष्ट करने से बचाने के लिए विज्ञापन के प्रचार प्रसार कर लोगों को जागरूक करने का आग्रह किया गया है. उन्होने कहा कि शादी, अनुष्ठानों, क्लबों एवं रेस्टोरेंट से भी भोजन को नष्ट न करने का आग्रह किया गया है.
उन्होंने कहा कि कोलकाता के तारातला में बडी कंपनी के कैंटीन के प्रतिदिन का बचा हुआ पका भोजन, इंडियन इंस्टिच्यूट ऑफ मेनेजमेंट के चार कैंटीनों का पका हुआ बचा भोजन और आसनसोल के एक बैरक के प्रतिदिन का पका हुआ बचा भोजन से प्रतिदिन 180 जरूरतमंद लोगों के उपयोग में लाया जा रहा है.
कोलकाता की कंपनी अपने सीएसआर राशि से वाहन भेज कर जरूरतमंद लोगों तक, आइआइएम इंस्टिच्यूट के स्टूडेंटस संगठन का ग्रुप प्रतिदिन अपने वाहन से बचे हुए पके भोजन को जरूरतमंद लोगों तक निर्धारित समय के अंदर पहुंचा देती है. अभिजीत देबारनाथ, अपूर्व चटर्जी, अमिताभ चटर्जी, सूजय दास महापात्रा, बिश्वजीत दास, शंकरजी बनर्जी, अंजना साहा आदि सहयोग कर रहे हैँ.
